लखनऊ: तीर्थयात्राओं और आध्यात्म में रुचि का इंसान के दिमागी सेहत पर बहुत अच्छा असर पड़ता है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायबरेली के पांच डॉक्टरों की टीम ने पिछले साल यानी 2025 में हुए प्रयागराज महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं पर एक स्टडी की। इस स्टडी में सामने आया है कि नियमित तीर्थयात्रा और आध्यात्मिक गतिविधियां मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। डॉक्टरों की स्टडी के अनुसार जो लोग लगातार धार्मिक यात्राओं और आध्यात्मिक अभ्यासों से जुड़े रहे, उनमें अवसाद और चिंता के लक्षण अपेक्षाकृत कम पाए गए।
यह अध्ययन महाकुम्भ 2025 के दौरान संगमनगरी में संचालित एक उपकेंद्र अस्पताल के मनोचिकित्सा एवं परामर्श विभाग में आने वाले मरीजों पर आधारित है। शोधकर्ताओं ने नौ जनवरी से 27 फरवरी 2025 के बीच अस्पताल पहुंचे श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। अध्ययन में पाया गया कि अस्पताल में पहुंचने वाले कुल 61,059 श्रद्धालुओं में से 57,950 लोगों में विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएं दर्ज की गईं।
शोध में शामिल 53 ऐसे श्रद्धालुओं का विशेष अध्ययन किया गया, जो चिंता, घबराहट, अनिद्रा, मानसिक तनाव या समायोजन संबंधी समस्याओं के कारण अस्पताल पहुंचे थे। इनमें 92.4 प्रतिशत लोगों ने पिछले 12 महीनों में किसी न किसी तीर्थयात्रा में भाग लेने की बात कही, जबकि 98.1 प्रतिशत प्रतिभागी प्रतिदिन प्रार्थना या ध्यान जैसी आध्यात्मिक गतिविधियां करते थे। अध्ययन में पाया गया कि नियमित आध्यात्मिक अभ्यास करने वाले लोगों में चिंता (एंग्जायटी) के स्तर कम थे।
वहीं, तीर्थयात्राओं में बार-बार भाग लेने वाले लोगों में अवसाद के लक्षण भी कम पाए गए। शोध टीम में शामिल एम्स रायबरेली में एनॉटामी विभाग के डॉ. रजत एस. दास के अनुसार, आध्यात्मिक अनुभव व्यक्ति को भावनात्मक मजबूती, सामाजिक जुड़ाव और जीवन में उद्देश्य की भावना प्रदान करते हैं, जिससे मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है। महिलाओं में अवसाद के लक्षण पुरुषों की तुलना में अधिक पाए गए, जबकि उम्र बढ़ने के साथ संज्ञानात्मक क्षमता (कॉग्निटिव परफॉर्मेंस) में कमी देखी गई।
हालांकि तीर्थयात्रा की आवृत्ति का संज्ञानात्मक क्षमता पर कोई विशेष प्रभाव नहीं मिला। शोध में यह भी सामने आया कि 96 प्रतिशत प्रतिभागियों ने तीर्थयात्रा के बाद स्वयं को आध्यात्मिक रूप से बेहतर महसूस किया और 94.3 फीसदी लोगों का मानना था कि आध्यात्मिक गतिविधियां उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं।
मानसिक स्वास्थ्य बेहतर करने में सहायक आयोजन
यह अध्ययन जर्नल ऑफ फैमिली मेडिसिन एंड प्राइमरी केयर के दिसंबर 2025 अंक में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन टीम का निष्कर्ष है कि महाकुम्भ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन केवल आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर करने में भी सहायक हो सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि ऐसी यात्राओं से जुड़े शारीरिक तनाव और भीड़भाड़ जैसी चुनौतियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अध्ययन में भविष्य में और व्यापक तथा दीर्घकालिक शोध की आवश्यकता पर बल दिया गया है।










