लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘एक जिला, एक व्यंजन’ पहल के तहत पारंपरिक खाने की चीजों की जिला-वार सूची जारी की. इस सूची में राज्य के विभिन्न जिलों से जुड़े तमाम मशहूर मांसाहारी व्यंजनों को जगह नहीं मिली. इस सूची को जारी करने का मकसद बेहतर ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार तक आसान पहुंच के जरिए स्थानीय व्यंजनों को बढ़ावा देना है.
अधिकारियों ने बताया कि जिन व्यंजनों को सूची में जगह नहीं मिली उनमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर व्यंजन शामिल हैं. लखनऊ के मशहूर टुंडे के गलावटी कबाब, अवधी बिरयानी एवं निहारी तथा रामपुर के शाही रामपुरी व्यंजन जैसे मटन कोरमा व सीक कबाब और बरेली के मशहूर मटन व्यंजन इस सूची में जगह नहीं बना पाए.
यह भी पढ़े- दिल्ली सरकार ने लॉन्च किया ‘हीट एक्शन प्लान’, 13 जिलों में तैनात स्पेशल वैन
लिस्ट में मांसाहार को नहीं किया गया शामिल
लखनऊ की तरह, वाराणसी और इलाहाबाद (प्रयागराज) भी विशिष्ट मांसाहारी स्ट्रीट फूड और करी के लिए जाने जाते हैं, जो देश भर से भोजन के शौकीनों को आकर्षित करते हैं. कुजीन सोसाइटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और जाने-माने खाद्य इतिहासकार पुष्पेश पंत ने पूर्ण शाकाहारी सूची को ‘आधा अधूरा’ कदम के रूप में वर्णित किया.
पुष्पेश पंत ने कहा कि ‘यह आधा-अधूरा कदम लगता है जिसमें कट्टरता की बू आती है. संक्षेप में कहें तो अज्ञानतापूर्ण बकवास है.’ उन्होंने स्पष्ट किया कि वह पूरी तरह से शाकाहारी व्यंजनों के पक्ष में हैं. मुझे सभी व्यंजन पसंद हैं. मैं सिर्फ इतना कह रहा हूं कि चयनात्मक भेदभाव क्यों किया जाए?
यह भी पढ़े- योगी कैबिनेट विस्तार की तैयारियां तेज, यह नाम सबसे आगे
इन जिलों के ये व्यंजन लिस्ट में शामिल
अधिकारियों ने दावा किया कि ‘एक जिला, एक व्यंजन’ (ओडीओसी) पहल के तहत तैयार की गयी फेहरिस्त में हर जिले को उसके खास व्यंजनों के साथ जोड़ा गया है. इस सूची में आगरा के पेठे व दालमोठ, फिरोजाबाद के आलू से बने व्यंजनों, मैनपुरी की सोन पापड़ी व उबले आलू के व्यंजन, मथुरा के पेड़े शामिल हैं.
सूची में अलीगढ़ को डेयरी उत्पाद व कचौड़ी, हाथरस के हींग से बने व्यंजन, कासगंज के मूंग दाल का हलवा व सिंघाड़े के आटे से बने नमकीन भी शामिल है.
अधिकारियों के अनुसार, अयोध्या की कचौड़ी, पेड़ा व कुल्हड़ दही-जलेबी, सुल्तानपुर के पेड़े व नमकीन व्यंजन, बाराबंकी की चंद्रकला और अमेठी के समोसे व गुड़ से बनी मिठाइयों को सूची में शामिल किया गया है. अन्य उल्लेखनीय प्रविष्टियों में प्रयागराज की कचौरी, समोसा और रसमलाई, फ़तेहपुर की बेड़मी पूरी और मिठाइयां, कौशांबी के गुड़-आधारित उत्पाद और प्रतापगढ़ की आंवला-आधारित वस्तुएं शामिल हैं.
यह भी पढ़े- 1.43 लाख शिक्षामित्रों ट्रिपल तोहफा: सैलरी और कैशलेस इलाज की सुविधा के साथ मिलेगा जीवन बीमा कवर
सहारनपुर शहद आधारित उत्पादों के लिए, मुज़फ़्फ़रनगर गुड़ की मिठाइयों के लिए और शामली गुड़ आधारित नाश्ते के लिए जाना जाता है. अधिकारियों ने बताया कि इस पहल का मकसद राज्य के सभी जिलों में स्थानीय व्यंजनों को व्यवस्थित तरीके से सूचीबद्ध करना और उन्हें बढ़ावा देना है.
शाकाहार भोजन को बढ़ावा देने की कोशिश
यूपी सरकार में मंत्री जेपीएस राठौड़ ने कहा, “हम किसी भी भोजन पर प्रतिबंध नहीं लगा रहे हैं या भोजन के विकल्प निर्धारित नहीं कर रहे हैं. हम केवल शाकाहारी व्यंजनों को बढ़ावा दे रहे हैं. दूसरे शब्दों में, हम उस भोजन का प्रदर्शन कर रहे हैं जो हमें लगता है कि उस जिले का सबसे अच्छा प्रतिनिधित्व करता है.
लखनऊ के लोकप्रिय शेफ और गोमतीनगर के प्रसिद्ध ‘पैक एन च्यू’ रेस्तरां के मालिक नितिन ने उप्र की इस विशेष थाली का स्वागत किया. उन्होने कहा कि व्यंजन सिर्फ बिरयानी और कबाब नहीं हैं. एक शेफ के रूप में, मेरा मानना है कि शाकाहारी व्यंजन एक ऐसा खजाना है, जिसकी खोज की जा रही है. हां, अच्छा होता अगर इसमें कुछ मांसाहार होता लेकिन अगर ऐसा नहीं है तो क्या हुआ. सूची ‘मीठे व्यंजनों’ से भरी हुई है.
सीएम योगी ने दिया ओडीओसी पहल पर जोर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सलाहकार अवनीश अवस्थी ने मंगलवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि उत्तर प्रदेश आधुनिक ब्रांडिंग और बेहतर पैकेजिंग के जरिए अपने पारंपरिक व्यंजनों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए तैयार है. यह कदम स्थानीय कारीगरों को सशक्त बनाएगा, साथ ही रोजगार और उद्यमिता को भी बढ़ावा देगा. मुख्यमंत्री के नेतृत्व में, उत्तर प्रदेश स्वाद, संस्कृति और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में एक नयी पहचान बना रहा है.
20 फरवरी को राज्य विधानसभा में बजट 2026-27 चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने भी ओडीओसी पहल पर जोर दिया था. यह योजना पारंपरिक खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता में सुधार, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, विपणन और प्रशिक्षण पर केंद्रित प्रयासों की परिकल्पना करती है, जो सफल ‘एक जिला एक उत्पाद’ मॉडल के समानांतर है. उन्होंने मेरठ की रेवड़ी-गजक, हाथरस की हींग, हापुड के पापड़, प्रयागराज का अमरूद, बलिया का हलवा जैसे उदाहरण दिए थे.











