लखनऊ: उत्तर प्रदेश लगातार विकास की रफ्तार पकड़ रहा है. आए दिन कोई न कोई तोहफा आमजन को मिल जाता है. अब सिटी इकोनामिक रीजन (शहरी आर्थिक क्षेत्र) के रूप में काशी-विंध्य क्षेत्र को विकसित करने की योजना बनाई जा रही है. इसके लिए राज्य सरकार ने काम भी शुरू कर दिया है. सरकार ने आवास एवं शहरी नियोजन विभाग को इस योजना का नोडल विभाग बनाने का आदेश दिया है. नोडल विभाग इस आर्थिक क्षेत्र के विकास के लिए तय मानकों के तहत इसकी वृहद कार्ययोजना (रोडमैप) तैयार करेगा.
आवास एवं शहरी नियोजन विभाग को नोडल विभाग बनाए जाने का आदेश नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने जारी किया है. प्रमुख सचिव का कहना है कि इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत काशी-विंध्य क्षेत्र के समेकित विकास के लिए नीति आयोग द्वारा तय मानकों के तहत कार्ययोजना नोडल विभाग तैयार करेगा.
इस क्षेत्र में औद्यौगिक गतिविधियों को तेज करने के साथ ही पर्यटन, एजुकेशन और मेडिकल हब के रूप में विकसित किया जाएगा. इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार अगले पांच वर्षों में 5000 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करेगी, जबकि राज्य सरकार ने भी 100 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया है. इस योजना के तहत वाराणसी, जौनपुर, चंदौली, गाजीपुर, मीरजापुर, भदोही और सोनभद्र को एकीकृत आर्थिक क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा.
बनारसी साड़ी, भदोही-मीरजापुर का कालीन, सोनभद्र की खनिज संपदा आदि के विकास पर फोकस किया जाना है. पूरे क्षेत्र को बेहतर सड़क नेटवर्क से आपस में जोड़ा जाएगा. सिटी इकोनामिक रीजन के तहत किसी बड़े शहर को उसके आस-पास के कस्बों, औद्योगिक क्षेत्र, लेबर मार्केट और सप्लाई चेन से आपस में जोड़ता है. इसका मकसद केंद्रीयकृत विकास के बजाय क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देना है.










