लखनऊ : उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य को तकनीक के मामले में बहुत आगे ले जाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने यूपी में देश का पहला ‘डेटा कॉरिडोर’ बनाने का शानदार प्लान तैयार किया है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 6 लाख करोड़ रुपए का खर्च आने का अनुमान है। भौगोलिकसंदर्भ
इस योजना का मुख्य मकसद पहले चरण में 6 गीगावॉट (GW) की डेटा सेंटर क्षमता तैयार करना है। इसके जरिए उत्तर प्रदेश को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और हाई-टेक नौकरियों के मामले में दुनिया भर में एक बड़ी पहचान दिलाना है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सलाहकार अवनीश अवस्थी ने बताया कि इस योजना से यूपी ‘नए भारत का डिजिटल ग्रोथ इंजन’ बनेगा और राज्य को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में मदद मिलेगी। आज के समय में डेटा सेंटर उतने ही जरूरी हो गए हैं जितनी की सड़क और बिजली, जिससे डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन काम और तेज होंगे।
कैसे तैयार होगा प्लान और कौन रखेगा नजर
इस बड़े प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने के लिए सरकार ने बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) को काम सौंपा है। यह कंपनी अगले छह महीनों में जमीन की जाँच करेगी, मिट्टी की गुणवत्ता देखेगी और पानी-बिजली की स्थिति का अध्ययन करके सरकार को रिपोर्ट देगी। प्रोजेक्टप्रबंधन सॉफ़्टवेयर
इस पूरी योजना की देखरेख राज्य परिवर्तन आयोग (STC) करेगा, जिसके प्रमुख मनोज कुमार सिंह हैं। सरकार का अनुमान है कि 1 गीगावॉट डेटा सेंटर बनाने में करीब 1 लाख करोड़ रुपए खर्च होते हैं, इसलिए 6 गीगावॉट के पहले चरण पर 6 लाख करोड़ रुपए का भारी निवेश किया जाएगा।
देश-विदेश से तुलना और यूपी की स्थिति
आज के समय में पूरे भारत में लगभग 1.7 गीगावॉट डेटा सेंटर की क्षमता काम कर रही है और 1.8 गीगावॉट पर अभी काम चल रहा है। अगर दूसरे देशों को देखें तो अमेरिका के पास 50 गीगावॉट, चीन के पास 25 गीगावॉट और यूरोप के पास 14 गीगावॉट की क्षमता है।
फिलहाल उत्तर प्रदेश के पास सिर्फ 350 मेगावाट (0.35 गीगावॉट) की क्षमता है। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि अकेले यूपी की माँग भारत की कुल डेटा जरूरत का लगभग 20% है। यही वजह है कि भविष्य के लिए यूपी इस सेक्टर में सबसे अहम राज्य बन गया है।
सरकार खुद खोज रही है जमीन और तकनीकी जाँच
कंपनियों के भरोसे बैठने के बजाय योगी सरकार ने खुद इस प्रोजेक्ट के लिए सही जगह ढूँढने का फैसला किया है। डेटा सेंटर चलाने के लिए 24 घंटे बिजली और सर्वर को ठंडा रखने के लिए भारी मात्रा में पानी की जरूरत होती है, इसलिए सही जगह चुनना बहुत जरूरी है।
इसके लिए बीसीजी जमीन के 10 से 15 मीटर नीचे तक जाकर मिट्टी की जाँच करेगी ताकि पता चल सके कि वहाँ भारी मशीनें टिक सकती हैं या नहीं। इसके साथ ही पानी की उपलब्धता और भूकंप जैसे खतरों की भी पूरी जाँच की जाएगी ताकि सेंटर हमेशा सुरक्षित रहें।
युवाओं के लिए बंपर नौकरियाँ और AI कॉरिडोर
इस डेटा कॉरिडोर के बनने से युवाओं के लिए नौकरियों के ढेरों रास्ते खुलेंगे। सरकार का अनुमान है कि इससे साइबर सुरक्षा, एआई रिसर्च और डेटा इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में डेढ़ लाख से ज्यादा बेहतरीन नौकरियां मिलेंगी। विज़ुअलआर्ट और डिज़ाइन
सरकार ने ‘5 गीगावॉट, 5-सिटी एआई कॉरिडोर’ बनाने का प्रस्ताव भी तैयार किया है। इसमें बड़े डेटा सेंटर और आधुनिक तकनीक वाले शहर बसाए जाएँगे, जिससे राज्य का तकनीकी ढांचा और भी ज्यादा मजबूत हो जाएगा।
निवेशकों के लिए बंपर छूट और खास नीतियाँ
कंपनियों को यूपी में निवेश करने के लिए आकर्षित करने के लिए सरकार ने ‘डेटा सेंटर नीति’ बनाई है। इसके तहत निवेशकों को जमीन खरीदने पर 25% की भारी छूट दी जाएगी और 20 करोड़ रुपए तक की पूँजी सब्सिडी भी मिलेगी।
बिजली और पानी की सप्लाई कभी न रुके, इसके लिए डेटा सेंटरों को जरूरी सेवाओं (ESMA) की सूची में रखा गया है। सरकार सेंटर के गेट तक 24 घंटे बिजली, पानी, सड़क और सीवर की सुविधा खुद पहुँचाएगी। 200 करोड़ रुपए से बड़े प्रोजेक्ट्स को सरकार तुरंत मंजूरी देगी ताकि काम में कोई रुकावट न आए।












