news
Tuesday, August 25, 2026
  • Home
    • Home
    • Special Story
  • Politics
  • Bureaucracy
  • National
    • Delhi
    • Uttar Pradesh
    • Bihar
    • Punjab
  • Buzz
  • Opinion
  • Economy
  • Diplomacy
  • International
  • Curated
news
  • Home
    • Home
    • Special Story
  • Politics
  • Bureaucracy
  • National
    • Delhi
    • Uttar Pradesh
    • Bihar
    • Punjab
  • Buzz
  • Opinion
  • Economy
  • Diplomacy
  • International
  • Curated
No Result
View All Result
news
Home National

क्या US-चीन से आगे निकलकर भारत AI सुपरपावर बनेगा?

by National Agenda
July 28, 2026
in National
0
AI
0
SHARES
Share on WhatsappShare on FacebookShare on X

नई दिल्ली। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल इस्तेमाल करना उतना ही आसान हो गया है, जिसना फोन का डेटा इस्तेमाल करना. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के 2026 AI इंडेक्स के मुताबिक, अमेरिका और चीन के टॉप AI मॉडल्स के बीच का परफॉर्मेंस गैप सिर्फ 2.7 परसेंटेज प्वाइंट्स रह गया है. चीनी मॉडल अब रीजनिंग, कोडिंग और मल्टीलिंग्वल कैपिसिटी में अमेरिकी मॉडल्स के 90-95% के बराबर आ गए हैं. वहीं भारत के पास अभी भी कोई वैश्विक लेवल का फ्रंटियर AI मॉडल नहीं है. तो क्या भारत सच में AI की रेस में पीछे है और क्या हम भी कभी AI सुपरपावर बन सकते हैं..

कैसे चीन बना AI की दूसरी सुपरपावर?

चीन का AI सफर कोई इत्तेफाक नहीं है. यह बेहतर मैनेजमेंट, भारी-भरकम इन्वेस्टमेंट और रणनीतिक सोच का नतीजा है. इसका पैमाना देखिए:

  • चीन अगले पांच साल में करीब 2 ट्रिलियन युआन (लगभग 295 अरब डॉलर) AI डेटा सेंटर बनाने पर खर्च करने की तैयारी कर रहा है.
  • बर्नस्टीन रिसर्च के मुताबिक, चीन का सार्वजनिक AI निवेश सालाना दसियों अरब डॉलर में है, जबकि भारत ने 2024 में पांच साल के लिए सिर्फ 1.1 अरब डॉलर (10,372 करोड़ रुपये) आवंटित किए.
  • मॉर्गन स्टैनली का अनुमान है कि चीन का पूरा AI इकोसिस्टम 3 से 4 ट्रिलियन डॉलर की इनक्रीमेंटल मार्केट वैल्यू क्रिएट कर सकता है.

चीन को ताकतवर बनाने में किसका हाथ है?

चीन ने ओपन-सोर्स मॉडल्स को अपनाया. डीपसीक, अलीबाबा का क्वेन और Zhipu AI का GLM वो सारे ओपन-वेट मॉडल्स हैं, जिन्हें दुनिया भर के डेवलपर्स डाउनलोड करके इस्तेमाल कर सकते हैं. MIT और हगिंग फेस रिसर्च के मुताबिक, 2025 में चीनी मॉडल्स ने ग्लोबल डाउनलोड्स का 17.1% हिस्सा हासिल किया, जो अमेरिका के 15.8% से ज्यादा है.

सबसे बड़ी बात है लागत. चीनी मॉडल्स की कीमत अमेरिकी मॉडल्स के मुकाबले 10वें हिस्से के आसपास है. जहां OpenAI GPT-5.5 का इनपुट कॉस्ट 5 से 12 डॉलर प्रति मिलियन टोकन है. वहीं डीपसीक के मॉडल्स 0.19 से 1.74 डॉलर में मिल जाते हैं. एक इंडियन स्टार्टअप फाउंडर ने इसे ऐसे समझाया, ‘अमेरिकी मॉडल्स महंगे हैं और बहुत सारे बेसिक कामों के लिए आपको उनकी जरूरत नहीं है. यह ओवरकिल है, जैसे भीड़भाड़ वाली सड़क पर स्पोर्ट्स कार चलाना.’

2026 में तो और भी बड़ा बदलाव आया. ओपन राउटर प्लेटफॉर्म पर जून 2026 के आखिरी हफ्ते में चीनी मॉडल्स का इस्तेमाल 25 ट्रिलियन टोकन तक पहुंच गया, जो अमेरिकी मॉडल्स से 78% ज्यादा था.

AI की रेस में भारत कहां खड़ा है?

एक तरफ भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी AI टैलेंट पूल में से एक है, दूसरी तरफ उसके पास कोई ग्लोबल फ्रंटियर मॉडल नहीं है. स्टैनफोर्ड ग्लोबल AI वाइब्रेंसी इंडेक्स 2026 में भारत अमेरिका और चीन के बाद तीसरे स्थान पर है:

AI टैलेंट: भारत में करीब 9.2 लाख AI प्रोफेशनल्स हैं, जिनमें से 2.57 लाख कोर AI रोल्स में हैं. दुनिया के 16% AI वर्कफोर्स का घर है भारत.

AI अपनाने की रफ्तार: भारत अकेले ग्लोबल AI यूजर्स का 19.9% हिस्सा रखता है. चीन (20.5%) के बस एक कदम पीछे.

AI मार्केट: 2024 में 6 अरब डॉलर से बढ़कर 2031 तक 32 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है.

सॉवरेन AI मॉडल्स: फरवरी 2026 में इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में भारत ने अपने पहले सॉवरेन AI मॉडल लॉन्च किए. इसमें सर्वम-30B, सर्वम-105B और BharatGen Param2 17B MoE शामिल हैं. ये मॉडल्स भारतीय भाषाओं के बेंचमार्क्स पर कई बड़े इंटरनेशनल मॉडल्स को भी पीछे छोड़ रहे हैं.

AI सुपरपावर बनने के बीच अड़चनें क्या हैं?

भारत के आगे बढ़ने के रास्ते में 3 बड़ी अड़चनें हैं:

कंप्यूट पावर: इंडिया AI मिशन के तहत करीब 38,000 GPUs ऑनबोर्ड किए जा रहे हैं. लेकिन इसकी तुलना में चीनी कंपनियों के पास 20 लाख H200 GPUs के ऑर्डर हैं. अमेरिका के पास 10 मिलियन से ज्यादा GPUs हैं. एक फ्रंटियर AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए 10,000 से ज्यादा GPUs पर महीनों ट्रेनिंग चाहिए होती है, जिसकी लागत करोड़ों डॉलर में होती है.

निवेश: 2023 में अमेरिका ने AI में 67 अरब डॉलर, चीन ने 7.8 अरब डॉलर निवेश किए, जबकि भारत में सिर्फ 1.4 अरब डॉलर का निवेश है.

डेटा सेंटर क्षमता: भारत की डेटा सेंटर क्षमता करीब 1,280 मेगावाट है, जो 2030 तक 4-5 गुना बढ़ने की उम्मीद है. लेकिन अमेरिका के अकेले एक AI कैंपस की प्लानिंग 1 गिगावाट की है.

इंडियन कंपनियां क्यों चुन रही हैं चीनी AI?

यहां सबसे दिलचस्प मोड़ आता है. अमेरिकी सरकार के OpenAI और Anthropic जैसी कंपनियों पर सख्ती के बीच, भारतीय कंपनियां चीनी ओपन-वेट मॉडल्स की तरफ रुख कर रही हैं. मई 2025 के बाद से मीरा एसेट वेंचर इन्वेस्टमेंट्स इंडिया के CEO ने कई कंज्यूमर टेक स्टार्टअप्स को डीपसीक, क्वेन और मूनशूट AI जैसे चीनी मॉडल्स इस्तेमाल करते देखा है. इन मॉडल्स ने उनकी लागत को ‘एक पूरे नंबर के ऑर्डर’ तक कम कर दिया.

एक इंडियन डेटिंग ऐप Schmooze ने गूगल और OpenAI छोड़कर चीनी मॉडल अपनाया. इसके संस्थापक ने बताया कि ‘सब्स्टैंशियल’ कॉस्ट सेविंग्स और परफॉर्मेंस जो अमेरिकी प्रोडक्ट्स के बराबर है.

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस ट्रेंड को ‘वेक-अप कॉल’ के तौर पर देखना चाहिए. भारत की साइबर सिक्योरिटी लीडरशिप इस बात पर निर्भर करेगी कि वह एक बैलेंस्ड AI इकोसिस्टम कैसे बनाता है.

क्या भारत AI सुपरपावर बन सकता है?

यह सवाल दो हिस्सों में बंटता है, ‘फ्रंटियर AI’ की रेस और ‘रियल-वर्ल्ड AI’ की रेस. ChatGPT, Gemini और DeepSeek जैसे मॉडल बनाने वाली फ्रंटियर AI रेस में भारत अमेरिका और चीन से बहुत पीछे है. एक्सपर्ट्स का कहना है, ‘अगर पैमाना यह है कि क्या भारत ने कुछ ऐसा बनाया है जो GPT या Gemini लीडरबोर्ड में टॉप पर है, तो गैप रियल है.’

AI की रेस बदल रही है. पहला फेज वह था जिसमें सबसे बड़ा और ताकतवर मॉडल बनाने वाला जीतता था. अगला फेज़ वह हो सकता है जिसमें AI को रोजमर्रा की जिंदगी में उपयोगी बनाने वाला जीतता है.

J.P. Morgan की रिपोर्ट में स्टैनफोर्ड के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि भारत AI रेडीनेस में अमेरिका और चीन के बाद तीसरे नंबर पर है. यानी भारत के पास AI सुपरपावर बनने की बुनियाद तो है, बस उसे सही दिशा में आगे बढ़ना है.

भारत शायद कभी GPT या DeepSeek जैसा फ्रंटियर मॉडल न बनाए क्योंकि उसके पास उस स्केल का कंप्यूट पावर और कैपिटल नहीं है. लेकिन भारत AI का ‘दुनिया का सर्विस प्रोवाइडर’ बन सकता है. ऐसे एप्लिकेशन बनाने वाला जो दुनिया की सबसे बड़ी समस्याओं को सॉल्व करें.

भारत का AI भविष्य: सिर्फ उपभोक्ता या क्रिएटर?

भारत सरकार की ‘बॉटम-अप, एप्लिकेशन-फोकस्ड’ AI स्ट्रैटेजी है, जो प्रेस्टीज से ज्यादा इकोनॉमिक और सोशल इम्पैक्ट को प्राथमिकता देती है. इलेक्ट्रॉनिक्स और IT मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत AI आर्किटेक्चर के सभी पांच लेयर्स एप्लिकेशन, मॉडल, चिप, इंफ्रा और एनर्जी पर काम कर रहा है. उन्होंने बताया कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर में 70 अरब डॉलर का निवेश कंफर्म है. अगले 12 महीनों में 50 अरब डॉलर और आने की उम्मीद है.

इंडिया AI मिशन के तहत 20 इंडिजिनस AI मॉडल्स डेवलप किए जा रहे हैं. सरकार का कहना है कि जहां फ्रंटियर मॉडल्स 100% कैपेबल हैं, वहीं ओपन-सोर्स और इंडियन मॉडल्स 60-70-80% कैपेबल हैं और इंटरप्राइज़ वर्कलोड्स का एक बड़ा हिस्सा हैंडल कर सकते हैं.

  • Trending
  • Comments
  • Latest
cm yogi

नकल माफियाओं को मिट्टी में मिला देंगे, छात्रों के प्रदर्शन के बीच CM योगी ने भरी हुंकार

July 25, 2026
bulldozer action

लखनऊ में फिर गरज रहा बुलडोजर, तोड़ी जा रही 15 जिंदगियां लीलने वाली बिल्डिंग

July 25, 2026
up school

आठवीं तक के स्कूलों में नए सिरे से बनेगी सरप्लस लिस्ट, अब लागू होगा RTI मानक

July 25, 2026
toll tax

टोल टैक्स में मिलेगी बड़ी राहत, 40% तक होगा सस्ता; NHAI ने बदला फॉर्मूला

July 25, 2026
cm yogi

मेक इन इंडिया को मिलेगी रफ़्तार, लखनऊ में लगेगी देश की अत्याधुनिक गोला-बारूद फैक्टरी

up rera

यूपी रेरा का बड़ा फैसला, अब सिर्फ ₹1000 में होगा फ्लैट ट्रांसफर

cm yogi

1.43 लाख शिक्षामित्रों ट्रिपल तोहफा: सैलरी और कैशलेस इलाज की सुविधा के साथ मिलेगा जीवन बीमा कवर

दिल्ली सरकार

दिल्ली सरकार ने लॉन्च किया ‘हीट एक्शन प्लान’, 13 जिलों में तैनात स्पेशल वैन

bjp parliamentary board

बीजेपी का संसदीय बोर्ड कितना पावरफुल, कौन हो सकता है शामिल?

August 25, 2026
cm Yogi

हमारे पास 28 लाख टन का स्टॉक… UP में चीनी की कमी पर बोले CM योगी

August 25, 2026
Uttar Pradesh Cabinet

यूपी : 60 साल की महिलाओं को रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा, 81 लाख महिलाओं को मिलेगा लाभ

August 25, 2026
International cricket stadium

गोरखपुर में बन रहा इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम, सीएम योगी का है ड्रीम प्रोजेक्ट

August 25, 2026

Recent News

bjp parliamentary board

बीजेपी का संसदीय बोर्ड कितना पावरफुल, कौन हो सकता है शामिल?

August 25, 2026
cm Yogi

हमारे पास 28 लाख टन का स्टॉक… UP में चीनी की कमी पर बोले CM योगी

August 25, 2026

Categories

  • Bihar
  • Bureaucracy
  • Buzz
  • Delhi
  • Diplomacy
  • Economy
  • International
  • National
  • Opinion
  • Politics
  • Punjab
  • Special Story
  • Uncategory
  • Uttar Pradesh

Site Navigation

  • About Us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer Policy
  • Terms and Conditions
  • Advertisement
  • Contact Us
news

nationalAgenda is an independent website covering news, politics, sports, culture and everything in between. Get the latest news, reportage, analysis & exclusive information.

Contact Us :- info@nationalagenda.in

© 2025 nationalAgenda - Check out the latest news from India and around the world Era.

No Result
View All Result
  • Home
  • Politics
  • Bureaucracy
  • National
    • Delhi
    • Uttar Pradesh
    • Bihar
    • Punjab
  • Buzz
  • Opinion
  • Economy
  • Diplomacy
  • International
  • Curated

© 2025 nationalAgenda - Check out the latest news from India and around the world Era.