news
Tuesday, August 25, 2026
  • Home
    • Home
    • Special Story
  • Politics
  • Bureaucracy
  • National
    • Delhi
    • Uttar Pradesh
    • Bihar
    • Punjab
  • Buzz
  • Opinion
  • Economy
  • Diplomacy
  • International
  • Curated
news
  • Home
    • Home
    • Special Story
  • Politics
  • Bureaucracy
  • National
    • Delhi
    • Uttar Pradesh
    • Bihar
    • Punjab
  • Buzz
  • Opinion
  • Economy
  • Diplomacy
  • International
  • Curated
No Result
View All Result
news
Home Politics

2027 से पहले सपा में क्यों बढ़ रही है गुटबाजी?

by National Agenda
July 2, 2026
in Politics, Uttar Pradesh
0
Samajwadi Party
0
SHARES
Share on WhatsappShare on FacebookShare on X

मुरादाबाद : समाजवादी पार्टी (सपा) के मुरादाबाद में कांठ विधायक और पूर्व मंत्री कमाल अख्तर ने 30 जून को अचानक विधानसभा में सपा विधायक दल के मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा दे दिया. यह पहली नजर में एक सामान्य संगठनात्मक फैसला लग सकता है लेकिन पार्टी के भीतर और राजनीतिक हलकों में इसे कहीं अधिक गंभीर घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है.

कमाल अख्तर ने साफ कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर पद छोड़ा है और संगठन में जिम्मेदारियां बदलती रहती हैं. उनका यह बयान पूरी तरह संयमित था. उन्होंने यह भी कहा कि वह पार्टी के कार्यकर्ता हैं और आगे भी कार्यकर्ता की तरह ही काम करते रहेंगे. इसके बावजूद इस घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

दरअसल पिछले कुछ सप्ताह से मुरादाबाद में सपा सांसद रुचि वीरा और कमाल अख्तर के बीच मतभेद की चर्चाएं लगातार सामने आ रही थीं. ऐसे में मुख्य सचेतक जैसे महत्वपूर्ण पद से उनका हटना केवल संयोग माना जाए या इसे नेतृत्व की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा समझा जाए, इस पर पार्टी के भीतर भी अलग-अलग राय है.

कमाल अख्तर को जुलाई 2024 में उस समय मुख्य सचेतक बनाया गया था, जब राज्यसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन मुख्य सचेतक मनोज पांडे के बागी रुख ने पार्टी नेतृत्व को असहज कर दिया था. उस समय अखिलेश यादव ने संदेश दिया था कि विधानसभा में अनुशासन बनाए रखने की जिम्मेदारी किसी भरोसेमंद नेता के हाथ में होगी. कमाल अख्तर को उसी भरोसे के साथ यह जिम्मेदारी दी गई थी. ऐसे नेता को दो साल से भी कम समय में हटाया जाना स्वाभाविक रूप से राजनीतिक संदेश माना जा रहा है.

पार्टी का आधिकारिक पक्ष भले ही यह हो कि यह सामान्य संगठनात्मक फेरबदल है लेकिन राजनीतिक जानकार इसे उस व्यापक बदलाव से जोड़कर देख रहे हैं जो समाजवादी पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन में करना चाहती है. पार्टी नेतृत्व नए चेहरों को अवसर देने और विभिन्न क्षेत्रों में शक्ति संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है. इसी प्रक्रिया में कुछ पुराने नेताओं की जिम्मेदारियां बदली जा रही हैं.

हालांकि इस तर्क के बावजूद यह सवाल बना हुआ है कि आखिर यह बदलाव ऐसे समय में क्यों हुआ, जब मुरादाबाद इकाई पहले से विवादों में थी. राजनीतिक विश्लेषक आशुतोष गौतम कहते हैं, “किसी भी राजनीतिक दल में संगठनात्मक फेरबदल सामान्य प्रक्रिया होती है लेकिन यदि कोई फैसला पहले से चल रहे विवाद के बीच होता है तो उसके राजनीतिक अर्थ भी निकाले जाते हैं. कमाल अख्तर का मामला भी उसी श्रेणी में आता है.”

मुरादाबाद में सांसद और विधायक के बीच क्यों बढ़ी दूरी?

मुरादाबाद में शुरू हुआ विवाद समाजवादी पार्टी के सामने खड़ी सबसे बड़ी संगठनात्मक चुनौती की तस्वीर पेश करता है. यह विवाद किसी व्यक्तिगत बयान से शुरू नहीं हुआ बल्कि स्थानीय राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई से जुड़ा माना जा रहा है. जानकारी के मुताबिक विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब मुरादाबाद देहात विधानसभा क्षेत्र में आयोजित पीडीए सम्मेलन में सांसद रुचि वीरा को आमंत्रित नहीं किया गया. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच नाराजगी बढ़ी. सांसद प्रतिनिधि खुशनूद अली को लेकर भी तीखी नोकझोंक हुई और मामला धीरे-धीरे समर्थकों तक पहुंच गया. सोशल मीडिया और स्थानीय बैठकों में दोनों पक्षों के समर्थक खुलकर एक-दूसरे पर निशाना साधने लगे.

हालात ऐसे बने कि अखिलेश यादव को खुद दखल देना पड़ा. उन्होंने दोनों नेताओं को अलग-अलग लखनऊ बुलाया. बैठक में राज्यसभा सदस्य जावेद अली, पूर्व विधायक यूसुफ अंसारी और जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह यादव भी मौजूद रहे. पार्टी नेतृत्व ने पूरे मामले की जानकारी ली और अनुशासन बनाए रखने की नसीहत दी. रुचि वीरा ने बाद में कहा कि उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जानकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष को पहले ही दे दी थी. उनके अनुसार पार्टी नेतृत्व ने जो भी फैसला लिया है, वह सोच-समझकर लिया गया है. दूसरी ओर कमाल अख्तर लगातार यह कहते रहे कि उनके इस्तीफे को इस विवाद से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए.

लेकिन पार्टी के भीतर चर्चा कुछ और है. एक वरिष्ठ सपा नेता बताते हैं कि लोकसभा चुनाव के बाद जिले में शक्ति संतुलन बदल गया. सांसद बनने के बाद रुचि वीरा चाहती थीं कि जिला संगठन उनके साथ बेहतर समन्वय बनाए जबकि स्थानीय संगठन वर्षों से कमाल अख्तर और दूसरे वरिष्ठ नेताओं के प्रभाव में काम करता रहा है. यही टकराव धीरे-धीरे राजनीतिक विवाद में बदल गया.

दिलचस्प यह भी है कि रुचि वीरा को 2024 के लोकसभा चुनाव में वरिष्ठ नेता एस.टी. हसन की जगह टिकट दिया गया था. उन्होंने BJP प्रत्याशी को एक लाख से अधिक मतों से हराकर अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता साबित की. दूसरी ओर कमाल अख्तर भी जिले में लंबे समय से मजबूत संगठनात्मक आधार रखने वाले नेता हैं. वे पूर्व मंत्री रह चुके हैं और स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है. ऐसे में दोनों नेताओं के बीच प्रभाव क्षेत्र को लेकर प्रतिस्पर्धा स्वाभाविक मानी जा रही है.

बुंदेलखंड में भी दिख रही है वही कहानी

यदि केवल मुरादाबाद में ऐसा होता तो इसे स्थानीय विवाद माना जा सकता था लेकिन लगभग यही तस्वीर बुंदेलखंड में भी दिखाई दे रही है. यहां लोकसभा चुनाव में तीन सीटें जीतकर शानदार प्रदर्शन के बावजूद पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं. बांदा-चित्रकूट से सांसद कृष्णा पटेल और बबेरू विधायक विशंभर सिंह यादव के बीच विवाद ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी. मामला तब सामने आया जब विधायक ने अवैध खनन का मुद्दा उठाते हुए अप्रत्यक्ष रूप से सांसद के पति शिवशंकर पटेल पर सवाल खड़े किए. अगले ही दिन सांसद ने अलग प्रेस वार्ता कर जवाब दिया.

इसके बाद दोनों गुटों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया. बताया जाता है कि उसी दौरान पार्टी के भीतर यह धारणा बनने लगी कि जिला संगठन दो हिस्सों में बंट गया है. एक गुट सांसद के साथ दिखाई दे रहा था तो दूसरा विधायक के साथ. इसी पृष्ठभूमि में अखिलेश यादव ने 12 मई को बांदा की जिला कार्यकारिणी भंग कर दी. इसे पार्टी नेतृत्व का कड़ा संदेश माना गया कि चुनाव से पहले संगठन में अनुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता होगा.

हालांकि पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. मधुसूदन कुशवाहा सार्वजनिक रूप से कहते हैं कि गुटबाजी जैसी कोई स्थिति नहीं है और सांसद तथा विधायक के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद थे, जिन्हें दूर कर लिया गया है. लेकिन स्थानीय राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि यदि सब कुछ सामान्य होता तो जिला कार्यकारिणी भंग करने की नौबत नहीं आती.

चित्रकूट में भी जिलाध्यक्ष, विधायक और पूर्व जिलाध्यक्ष के समर्थकों के अलग-अलग समूह सक्रिय बताए जाते हैं. हमीरपुर में वर्तमान और पूर्व जिलाध्यक्षों के बीच लंबे समय से खींचतान की चर्चा है. जालौन में टिकट की राजनीति को लेकर स्थानीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है. यानी बुंदेलखंड के कई जिलों में संगठन के भीतर एक समान समस्या दिखाई दे रही है. स्थानीय राजनीतिक विश्लेषक ए.के. वर्मा कहते हैं, “जब किसी क्षेत्र में पार्टी का जनाधार बढ़ता है तो नेतृत्व के लिए सबसे बड़ी चुनौती बाहरी विरोधी नहीं बल्कि आंतरिक महत्वाकांक्षाओं का प्रबंधन होता है. बुंदेलखंड में फिलहाल यही स्थिति है.”

लोकसभा की सफलता के बाद क्यों बढ़ीं महत्वाकांक्षाएं?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समाजवादी पार्टी के भीतर बढ़ते विवादों की एक बड़ी वजह 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली सफलता भी है. लंबे समय तक विपक्ष में रहने के बाद जब किसी पार्टी का प्रदर्शन सुधरता है तो स्वाभाविक रूप से नेताओं की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं भी बढ़ती हैं. अब हर सांसद चाहता है कि जिला संगठन उसके अनुसार काम करे. विधायक अपने पुराने संगठनात्मक प्रभाव को बनाए रखना चाहते हैं. जिला अध्यक्ष स्थानीय समीकरणों को बचाने की कोशिश करते हैं. इसी खींचतान में कई बार संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच दूरी बढ़ जाती है.

समाजवादी पार्टी इस समय पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक गठबंधन की रणनीति पर काम कर रही है. इस रणनीति की सफलता काफी हद तक बूथ स्तर के संगठन पर निर्भर है. बुंदेलखंद में सपा के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं, “सपा की सबसे बड़ी ताकत उसका कैडर रहा है. लेकिन कैडर तभी प्रभावी होता है जब नेतृत्व एकजुट दिखाई दे. यदि सांसद और विधायक अलग-अलग संदेश देंगे तो नीचे तक भ्रम की स्थिति बनेगी.” उनके अनुसार 2027 के विधानसभा चुनाव के टिकट वितरण की संभावनाएं भी अभी से नेताओं के व्यवहार को प्रभावित कर रही हैं. कई जिलों में संभावित विधानसभा उम्मीदवार अपने-अपने समर्थकों का नेटवर्क मजबूत करने में जुट गए हैं. यही वजह है कि स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक नियंत्रण की लड़ाई तेज होती दिखाई दे रही है.

अखिलेश के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को एकजुट रखना

समाजवादी पार्टी फिलहाल उत्तर प्रदेश में BJP की सबसे बड़ी विपक्षी ताकत है. पार्टी को उम्मीद है कि 2027 का विधानसभा चुनाव उसके लिए बड़ा अवसर साबित हो सकता है. लेकिन चुनावी तैयारी जितनी महत्वपूर्ण है, उससे कम महत्वपूर्ण संगठन को एकजुट रखना नहीं है. पिछले कुछ महीनों की घटनाएं बताती हैं कि अखिलेश यादव लगातार ऐसे विवादों में सीधे दखल दे रहे हैं. चाहे मुरादाबाद का मामला हो या बांदा का, दोनों जगह उन्होंने नेताओं को बुलाकर बातचीत की. कई जिलों में संगठनात्मक बदलाव भी किए गए. इससे साफ संकेत मिलता है कि पार्टी नेतृत्व किसी भी कीमत पर सार्वजनिक गुटबाजी को बढ़ने नहीं देना चाहता.

सपा के एक प्रदेश पदाधिकारी का मानना है कि आने वाले महीनों में सपा में और बड़े संगठनात्मक फेरबदल देखने को मिल सकते हैं. पार्टी नेतृत्व उन जिलों पर विशेष ध्यान दे रहा है जहां सांसद, विधायक और जिला संगठन के बीच तालमेल कमजोर है. विधानसभा चुनाव से पहले बूथ स्तर तक एकजुट संगठन तैयार करना अखिलेश यादव की सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी.

  • Trending
  • Comments
  • Latest
cm yogi

नकल माफियाओं को मिट्टी में मिला देंगे, छात्रों के प्रदर्शन के बीच CM योगी ने भरी हुंकार

July 25, 2026
bulldozer action

लखनऊ में फिर गरज रहा बुलडोजर, तोड़ी जा रही 15 जिंदगियां लीलने वाली बिल्डिंग

July 25, 2026
up school

आठवीं तक के स्कूलों में नए सिरे से बनेगी सरप्लस लिस्ट, अब लागू होगा RTI मानक

July 25, 2026
toll tax

टोल टैक्स में मिलेगी बड़ी राहत, 40% तक होगा सस्ता; NHAI ने बदला फॉर्मूला

July 25, 2026
cm yogi

मेक इन इंडिया को मिलेगी रफ़्तार, लखनऊ में लगेगी देश की अत्याधुनिक गोला-बारूद फैक्टरी

up rera

यूपी रेरा का बड़ा फैसला, अब सिर्फ ₹1000 में होगा फ्लैट ट्रांसफर

cm yogi

1.43 लाख शिक्षामित्रों ट्रिपल तोहफा: सैलरी और कैशलेस इलाज की सुविधा के साथ मिलेगा जीवन बीमा कवर

दिल्ली सरकार

दिल्ली सरकार ने लॉन्च किया ‘हीट एक्शन प्लान’, 13 जिलों में तैनात स्पेशल वैन

bjp parliamentary board

बीजेपी का संसदीय बोर्ड कितना पावरफुल, कौन हो सकता है शामिल?

August 25, 2026
cm Yogi

हमारे पास 28 लाख टन का स्टॉक… UP में चीनी की कमी पर बोले CM योगी

August 25, 2026
Uttar Pradesh Cabinet

यूपी : 60 साल की महिलाओं को रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा, 81 लाख महिलाओं को मिलेगा लाभ

August 25, 2026
International cricket stadium

गोरखपुर में बन रहा इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम, सीएम योगी का है ड्रीम प्रोजेक्ट

August 25, 2026

Recent News

bjp parliamentary board

बीजेपी का संसदीय बोर्ड कितना पावरफुल, कौन हो सकता है शामिल?

August 25, 2026
cm Yogi

हमारे पास 28 लाख टन का स्टॉक… UP में चीनी की कमी पर बोले CM योगी

August 25, 2026

Categories

  • Bihar
  • Bureaucracy
  • Buzz
  • Delhi
  • Diplomacy
  • Economy
  • International
  • National
  • Opinion
  • Politics
  • Punjab
  • Special Story
  • Uncategory
  • Uttar Pradesh

Site Navigation

  • About Us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer Policy
  • Terms and Conditions
  • Advertisement
  • Contact Us
news

nationalAgenda is an independent website covering news, politics, sports, culture and everything in between. Get the latest news, reportage, analysis & exclusive information.

Contact Us :- info@nationalagenda.in

© 2025 nationalAgenda - Check out the latest news from India and around the world Era.

No Result
View All Result
  • Home
  • Politics
  • Bureaucracy
  • National
    • Delhi
    • Uttar Pradesh
    • Bihar
    • Punjab
  • Buzz
  • Opinion
  • Economy
  • Diplomacy
  • International
  • Curated

© 2025 nationalAgenda - Check out the latest news from India and around the world Era.