नई दिल्ली। धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने खुद इसकी जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है. NEET-UG पेपर लीक विवाद को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्र आंदोलनों, खासकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर मंतर पर लंबे समय से चल रहे प्रदर्शनों के बीच धर्मेंद्र प्रधान के अचानक से इस्तीफे ने सभी को चौंका दिया.
इस बीच बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रधान ने शिक्षा के लिए बहुत काम किया है और पार्टी पूरी तरीके से उनके साथ खड़ी है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ‘मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने अपने पद से त्यागपत्र दिया है.’
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर क्या बोले नितिन नवीन?
नितिन नवीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘केंद्रीय शिक्षा मंत्री के तौर पर धर्मेंद्र प्रधान ने भारत के शिक्षा क्षेत्र में सुधार लाने और ऐतिहासिक राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और अन्य पहलों को सफलतापूर्वक लागू करने में अहम भूमिका निभाई है. व्यापक हितों को प्राथमिकता देते हुए उनका पद छोड़ने का निर्णय सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और निस्वार्थ सेवा के उच्चतम मानदंडों को दर्शाता है. पार्टी इस निर्णय में श्री धर्मेंद्र प्रधान जी के साथ मजबूती से खड़ी है. मैं उनके भविष्य के प्रयासों के लिए उन्हें शुभकामनाएं देता हूं.’
दरअसल 20 जून से ही जंतर मंतर पर धरने पर बैठी कॉकरोच जनता पार्टी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी हुई थी. उनकी मांग थी कि नीट पेपर लीक की जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देंगे तभी वह अपना धरना प्रदर्शन खत्म करेंगे. इस बीच 28 जून को सोनम वांगचुक ने भी इसी मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू कर दी थी. इसके बाद सीजेपी आंदोलनकारियों ने 20 जुलाई को संसद तक मार्च की कोशिश की, जिन्हें रोकने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा. इसी दिन सरकार भी एक्टिव हुई और सीजेपी के प्रतिनिधि सौरव दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की.
इस बीच विपक्षी दल खुलकर आंदोलन के समर्थन में आ गए. राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने प्रदर्शन में हिस्सा लेकर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज कर दी थी. विपक्षी दलों के हंगामे के चलते संसद का मानसून सत्र अब तक बाधित रहा है.
अपने इस्तीफे में क्या बोले धर्मेंद्र प्रधान?
इससे पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपते हुए कहा कि ‘राष्ट्रसेवा मेरे जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है.’ उन्होंने एक्स पर जारी लंबे संदेश में कहा कि वे पिछले चार दशकों से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं तथा युवाओं की आकांक्षाओं और न्यायोचित अपेक्षाओं का हमेशा सम्मान करते रहे हैं.
प्रधान ने स्वीकार किया कि 3 मई को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितताएं सामने आई थीं, जिसके बाद केंद्र सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी, परीक्षा रद्द की और दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया. उन्होंने यह भी बताया कि अगले वर्ष से नीट परीक्षा कंप्यूटर आधारित टेस्ट मोड में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है. उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही उन्होंने इस पूरे मामले की जिम्मेदारी ली और कभी इससे पीछे नहीं हटे. उनका उद्देश्य था कि परीक्षा माफिया के कारण किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य प्रभावित न हो.
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में जंतर-मंतर पर पिछले दस दिनों से चल रहे विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मामला उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य का है. उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि देश की युवा शक्ति किसी भ्रम या राजनीतिक टकराव में उलझे या छात्रों का भविष्य कानूनी विवादों में फंस जाए. प्रधान ने लिखा कि देश की एकता बनाए रखने, छात्रों के हितों की रक्षा करने और उन्हें पढ़ाई व करियर पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर देने के उद्देश्य से उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया.












