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ऑपरेशन सिंदूर: जब आतंक पर भारत के हाईटेक स्ट्राइक से दुनिया हुई थी हैरान!

by National Agenda
May 8, 2026
in National
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AI Air Defense System
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर को आतंकवाद के खिलाफ भारत की मजबूत कार्रवाई बताया। 7 मई 2025 को तड़के 1.05 बजे शुरू हुए इस सैन्य अभियान में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे। यह कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी।

ऑपरेशन सिंदूर कुछ मिनटों तक चला, लेकिन इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक तनावपूर्ण सैन्य हालात बने रहे। इस अभियान ने दिखाया कि आधुनिक युद्ध अब केवल सैनिकों की संख्या से नहीं, बल्कि मिसाइल, ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक से लड़े जाते हैं।

इस ऑपरेशन में भारत ने लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इसे 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद भारत की सबसे बड़ी सीमा पार सटीक सैन्य कार्रवाई माना गया।

पहलगाम हमले के बाद शुरू हुआ ऑपरेशन
ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत पहलगाम आतंकी हमले के बाद हुई थी। इस हमले में आतंकियों ने आम नागरिकों पर गोलीबारी की थी। मरने वालों में एक भारतीय नौसेना अधिकारी और एक नेपाली नागरिक भी शामिल थे। भारतीय एजेंसियों ने हमले के पीछे पाकिस्तान आधारित लश्कर-ए-तैयबा का हाथ बताया था।

भारत ने इस बार केवल जवाबी हमला नहीं किया, बल्कि एयरफोर्स, नेवी और थलसेना के समन्वय से एक हाईटेक सैन्य अभियान तैयार किया। भारतीय अधिकारियों ने कहा कि इस ऑपरेशन में पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों को निशाना नहीं बनाया गया, बल्कि केवल आतंकी ढांचे पर हमला किया गया।

ऑपरेशन में कुल नौ जगहों पर हमले किए गए। इनमें मुरीदके का मरकज तैयबा, बहावलपुर का मरकज सुभान अल्लाह, मुजफ्फराबाद के सैयदना बिलाल और शवाई नल्ला कैंप, तेहरा कलां का सरजल कैंप और सियालकोट का महमूना जोया कैंप शामिल थे।

राफेल लड़ाकू विमान बने ऑपरेशन की ताकत
ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना के राफेल लड़ाकू विमानों ने सबसे अहम भूमिका निभाई। इन विमानों ने आधुनिक हथियारों के साथ दुश्मन के इलाके में सटीक हमले किए।

राफेल विमानों को इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और एयरबोर्न सर्विलांस सिस्टम का समर्थन मिला, जिससे वे दुश्मन के एयर डिफेंस से बचते हुए मिशन पूरा करने में सफल रहे। इन विमानों में स्कैल्प क्रूज मिसाइल और हैमर प्रिसिजन गाइडेड बम लगाए गए थे।

स्कैल्प मिसाइल लंबी दूरी से हमला करने में सक्षम है और इसकी रडार पकड़ बेहद कम होती है। इसका इस्तेमाल जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के मजबूत बंकर और कमांड सेंटर तबाह करने में किया गया।

हैमर बम और ड्रोन ने बदली युद्ध की तस्वीर
ऑपरेशन में भारत ने एएएसएम हैमर बम का भी इस्तेमाल किया। यह एक प्रिसिजन गाइडेड हथियार है, जो 50 से 70 किलोमीटर दूर तक सटीक हमला कर सकता है। इसका उपयोग पहाड़ी और मजबूत आतंकी ठिकानों को नष्ट करने में किया गया।

इस अभियान की एक और बड़ी खासियत कामिकाजे ड्रोन यानी लोइटरिंग म्यूनिशन का इस्तेमाल था। ये ड्रोन पहले लक्ष्य की निगरानी करते हैं और फिर खुद टकराकर हमला करते हैं। भारत ने हारोप और स्काईस्ट्राइकर जैसे ड्रोन इस्तेमाल किए।

इन ड्रोन का इस्तेमाल रडार सिस्टम, मिसाइल ठिकानों और दुश्मन के मोबाइल सैन्य ढांचे को नष्ट करने में किया गया। इससे साफ हुआ कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन की भूमिका तेजी से बढ़ रही है।

ब्रह्मोस और मेटेओर मिसाइलों ने बढ़ाई ताकत
ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के इस्तेमाल की भी चर्चा रही। भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित यह मिसाइल दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइलों में मानी जाती है। ब्रह्मोस की तेज रफ्तार और कम रडार पहचान क्षमता इसे बेहद घातक बनाती है। माना गया कि इसका इस्तेमाल मजबूत ठिकानों और रडार सिस्टम को निशाना बनाने में किया गया।

वहीं राफेल विमानों में लगी मेटेओर एयर-टू-एयर मिसाइल ने भारतीय वायुसेना को हवाई बढ़त दिलाई। यह मिसाइल लंबी दूरी से दुश्मन के विमानों को निशाना बना सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक पाकिस्तान के जेएफ-17 विमान राफेल और मेटेओर के मुकाबले कमजोर साबित हुए।

भारत की एयर डिफेंस प्रणाली बनी सुरक्षा कवच
ऑपरेशन सिंदूर केवल हमले तक सीमित नहीं था। पाकिस्तान की ओर से ड्रोन और मिसाइल हमलों की कोशिशों को रोकने में भारत की एयर डिफेंस प्रणाली ने बड़ी भूमिका निभाई।

भारतीय वायुसेना के इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम ने रडार, सैटेलाइट और निगरानी नेटवर्क से जानकारी लेकर रियल टाइम में जवाबी कार्रवाई की। इसमें आकाश, स्पाइडर, बराक-8 और एस-400 जैसे सिस्टम शामिल थे।

डीआरडीओ द्वारा विकसित आकाश मिसाइल सिस्टम ने कई हवाई खतरों को सफलतापूर्वक रोकने में अहम भूमिका निभाई। भारत ने डी4एस एंटी-ड्रोन सिस्टम का भी इस्तेमाल किया, जो दुश्मन के ड्रोन को पहचानने और नष्ट करने में सक्षम है।

सैटेलाइट और स्वदेशी तकनीक की बड़ी भूमिका
ऑपरेशन सिंदूर में सैटेलाइट और निगरानी प्रणाली भी बेहद महत्वपूर्ण रही। भारत ने नेत्र एईडब्ल्यू एंड सी और फाल्कन अवाक्स विमानों के जरिए दुश्मन की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी। इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने बाद में बताया था कि इस दौरान कम से कम 10 सैटेलाइट लगातार राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए काम कर रहे थे। भारत के नाविक सैटेलाइट नेटवर्क ने सुरक्षित नेविगेशन और सैन्य सहायता प्रदान की।

ऑपरेशन सिंदूर को आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान की बड़ी सफलता के तौर पर भी देखा गया। विशेषज्ञों का कहना है कि इस अभियान ने दिखाया कि भारत अब आधुनिक तकनीक और स्वदेशी हथियारों के दम पर बड़े सैन्य अभियान चलाने में सक्षम है।

Tags: pm modiआतंकवादऑपरेशन सिंदूरप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीहाईटेक स्ट्राइक
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