कोलकाता। बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार सोमवार को विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में कई अहम विधेयक पेश करने जा रही है। इनमें सबसे चर्चित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक है, जिसे भाजपा सरकार पेश कर सकती है।
यूसीसी के साथ विशेष सत्र में चार और विधेयक भी पेश किए जाएंगे, जिसमें अवैध तरीके से अर्जित संपत्तियों की जब्ती और नीलामी से संबंधित बिल भी शामिल होगा।
इसके अलावा राज्य सरकार पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधि नियंत्रण विधेयक, 2026 भी पेश करेगी, जिसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मॉडल की तर्ज पर तैयार किया गया है।
इस कानून के जरिए संगठित अपराध, अवैध खनन, हथियार और ड्रग्स तस्करी, मानव तस्करी तथा सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी गतिविधियों पर सख्ती की जाएगी। प्रस्तावित कानून में किसी व्यक्ति को जन सुरक्षा के लिए खतरा मानते हुए एक वर्ष तक हिरासत में रखने और अपराधियों की संपत्ति जब्त करने का प्रावधान भी रखा गया है।
तय समय के भीतर राज्य में UCC लागू करेगी शुभेंदु सरकार
मालूम हो कि भाजपा ने अपने चुनावी ‘संकल्प पत्र’ में वादा किया था कि सत्ता में आने के छह महीने के भीतर राज्य में यूसीसी लागू कर दिया जाएगा, और अब सरकार उसी ‘संकल्प’ को सिद्ध करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है।
पार्टी द्वारा चुनावी संकल्प पत्र में बताई गई छह महीने की समय-सीमा से काफी पहले ही सरकार यूसीसी विधेयक लाने जा रही है। यह घटनाक्रम हाल के समय में बंगाल में कानूनी और सामाजिक नीति के सबसे अहम बदलावों में से एक हो सकता है, क्योंकि भाजपा यूसीसी को महत्वपूर्ण सुधार के तौर पर पेश कर रही है।
सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था होगी लागू
प्रस्तावित कानून के तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था लागू होगी। सरकार का दावा है कि इससे लैंगिक समानता और समान नागरिक अधिकारों को बढ़ावा मिलेगा।
सरकार सार्वजनिक अव्यवस्था, दंगे, आगजनी, तोड़फोड़ और पुलिसकर्मियों व लोकसेवकों पर हमलों से निपटने के लिए भी विधेयक लाएगी। इन कानूनों के तहत दोषियों की संपत्ति जब्त व नीलाम कर सरकारी नुकसान की भरपाई की जा सकेगी।
एक दिवसीय विशेष सत्र बेहद अहम
सरकार का दावा है कि ये कानून राज्य में कानून-व्यवस्था मजबूत करने और अपराध पर लगाम लगाने के लिए ऐतिहासिक साबित होंगे, जबकि विपक्ष और मानवाधिकार संगठनों के बीच इसे लेकर बहस तेज होने के आसार हैं। सोमवार का विधानसभा सत्र इसलिए राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।












