नई दिल्ली। देशभर में 26 दिनों तक चले छात्र आंदोलन, संसद में लगातार हंगामे और आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब शिक्षा मंत्रालय की कमान प्रह्लाद जोशी के हाथों में आ गई है. जिम्मेदारी संभालते ही उन्होंने यह संकेत देने की कोशिश की कि मंत्रालय अब इंतजार के मूड में नहीं है.
रविवार जैसे अवकाश वाले दिन भी उन्होंने मंत्रालय पहुंचकर अधिकारियों के साथ बैठक की. ऐसे समय में जब NEET पेपर लीक विवाद ने देश की परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, छात्रों की नजर नए शिक्षा मंत्री के पहले फैसलों पर है. सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि नया मंत्री कौन है, बल्कि यह भी है कि क्या अब परीक्षा व्यवस्था में वास्तव में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे या फिर यह बदलाव सिर्फ घोषणाओं तक सीमित रह जाएगा.
न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार प्रह्लाद जोशी ऐसे समय में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जब सरकार पर परीक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल करने का सबसे बड़ा दबाव है. NEET-UG पेपर लीक विवाद के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से लेकर पूरी परीक्षा प्रणाली की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं.
सरकार पहले ही पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून लाने की तैयारी कर चुकी है और अब चर्चा है कि NEET-UG परीक्षा के स्वरूप में भी बड़े बदलाव किए जा सकते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक भविष्य में परीक्षा को कंप्यूटर आधारित बनाया जा सकता है और दो चरणों में आयोजित करने जैसे विकल्पों पर भी विचार हो रहा है. हालांकि इन बदलावों पर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन नए शिक्षा मंत्री के सामने परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना सबसे बड़ी चुनौती होगी.
जिम्मेदारी संभालते ही मंत्रालय में शुरू हुई समीक्षा बैठक
रविवार को केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने आधिकारिक रूप से शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभाल लिया. मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक संक्षिप्त समीक्षा बैठक भी की. प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. उनके पास पहले से उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी भी है.
धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा कि ‘मेरे लिए यह व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है और पिछले दस दिनों में जो घटनाक्रम सामने आए, उनसे मैं व्यथित हूं.’ इसके बाद प्रधानमंत्री की सलाह पर शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को सौंपी गई.
प्रह्लाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं. वह कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से लगातार पांच बार सांसद चुने गए हैं. संगठन और संसदीय कार्यों में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने उन्हें यह अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है.
अनुभवी संगठनकर्ता और पांच बार के सांसद
प्रह्लाद जोशी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कर्नाटक से की. वह 2012 में भाजपा की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. 2014 के बाद उन्होंने संसद की विभिन्न समितियों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. साल 2019 में उन्हें संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली. तीसरी बार मोदी सरकार बनने के बाद उन्हें उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का प्रभार दिया गया.
नए शिक्षा मंत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती
नए शिक्षा मंत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती परीक्षा प्रणाली में छात्रों का भरोसा वापस लाना है. NEET पेपर लीक विवाद के बाद सरकार पर NTA में सुधार, परीक्षा सुरक्षा को मजबूत करने और भविष्य में किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने का दबाव है.
इसके अलावा नई शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन, CBSE और NCERT से जुड़े सुधार, भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और परीक्षा प्रक्रिया में तकनीक के बेहतर उपयोग जैसे कई अहम मुद्दे भी उनके सामने होंगे.
क्या NEET परीक्षा में होंगे बड़े बदलाव?
सरकारी स्तर पर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन विभिन्न रिपोर्ट्स में कहा गया है कि NEET-UG परीक्षा के प्रारूप में बदलाव पर विचार किया जा रहा है. इनमें परीक्षा को कंप्यूटर आधारित (Computer Based Test) बनाने, NTA के ढांचे में व्यापक सुधार करने और परीक्षा को दो चरणों में आयोजित करने जैसे प्रस्ताव शामिल बताए जा रहे हैं.
इन प्रस्तावों का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाना तथा पेपर लीक जैसी घटनाओं की संभावना को न्यूनतम करना है. हालांकि इन बदलावों पर अंतिम निर्णय सरकार और संबंधित एजेंसियों की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा.












