नई दिल्ली। कई लोग अच्छी इनकम के बावजूद बड़ा फंड तैयार नहीं कर पाते। अगर आपके साथ भी ऐसी समस्या है तो आपको नीलेश शाह की सलाह पर अमल करने की जरूरत है। शाह कोटक एसेट मैनेजमेंट के एमडी और सीईओ हैं। उन्हें शेयर बाजार और इनवेस्टमेंट का व्यापक अनुभव है। उनका मानना है कि इनवेस्टमेंट के लिए धैर्य और अनुशासन बहुत जरूरी है। ज्यादातर लोग इन दोनों कसौटियों पर चूक जाते हैं। उनका मानना है कि निवेश उतना जटिल नहीं है, जितना लोग समझते हैं। वह निवेश में सिर्फ 5 बातों का ध्यान रखने की सलाह देते हैं।
फटाफट कमाई के फॉर्मूले से रहें सावधान
कई लोग इनवेस्टमेंट से फटाफट कमाई चाहते हैं। फटाफट कमाई के लिए आप लॉटरी खरीद सकते हैं, पोंजी स्कीम का हिस्सा बन सकते हैं। लेकिन, शेयर बाजार में फटाफट कमाई की चाहत में आपका नुकसान हो सकता है। ज्यादातर लोग शेयरों में निवेश से इसलिए पैसा नहीं बना पाते, क्योंकि निवेश को बढ़ने के लिए जरूरी समय नहीं दे पातें।
पहले निवेश करें, उसके बाद खर्च करें
नीलेश शाह का मानना है कि हम पहले खर्च करते हैं, फिर निवेश के बारे में सोचते हैं। यह बहुत बड़ी गलती है। अगर आप निवेश से बड़ा वेल्थ बनाना चाहते हैं तो आपको इस सिद्धांत के उलट चलना होगा। आपको पहले निवेश करना होगा, फिर खर्च करना होगा। शुरुआत में यह मुश्किल लगता है। लेकिन, एक बार इसकी आदत बन जाने पर यह बहुत आसान हो जाता है।
सही जगह पैसे का करें निवेश
कोटक एएमसी के चीफ का मानना है कि सिर्फ निवेश जरूरी नहीं है बल्कि सही जगह निवेश जरूरी है। आपके निवेश पर मिलने वाला रिटर्न इनफ्लेशन से काफी ज्यादा होना चाहिए। तभी आपके पैसे की वैल्यू समय के साथ बढ़ेगी। उदाहरण के लिए बैंक के रेकरिंग डिपॉजिट में आप नियमित निवेश से भी बहुत बड़ा फंड तैयार नहीं कर पाएंगे। इसके लिए आपको म्यूचुअल फंड्स या शेयरों में निवेश करना होगा। म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम से आप औसत 12 फीसदी सालाना रिटर्न हासिल कर सकते हैं।
निवेश को बढ़ने के लिए समय दें
बड़ा फंड कुछ महीने या कुछ सालों के निवेश से तैयार करना मुमकिन नहीं है। इसके लिए आपको कई साल का समय देना होगा। हर महीने म्यूचुअल फंड की स्कीम में सिप के जरिए 10-15 साल तक निवेश करने के बाद बड़ा फंड तैयार हो सकता है। इसकी वजह यह है कि निवेश की अवधि लंबी होने पर कंपाउंडिं का फायदा मिलता है।
डायवर्सिफिकेशन का ध्यान रखें
डायवर्सिफिकेशन का मतलब अलग-अलग एसेट में निवेश करना है। अलग-अलग एसेट में निवेश करने से रिस्क को कम करने में मदद मिलती है। आपको कुछ पैसा शेयरों में, कुछ गोल्ड-सिल्वर में और कुछ डेट में डालना चाहिए। डेट का मतलब फिक्स्ड रिटर्न इंस्ट्रूमेंट्स होता है। आप बैंक एफडी में भी कुछ पैसा डाल सकते हैं। अलग-अलग एसेट्स में निवेश का फायदा यह है कि अलग-अलग एसेट का व्यवहार अलग-अलग होता है। एक साथ सभी एसेट्स नहीं चढ़ते हैं और वे साथ नहीं गिरते हैं। एक के गिरने पर दूसरा आपको नुकसान से बचाता है।











