नई दिल्ली। भारत ने परमाणु क्षमता वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का पहला परीक्षण कर लिया है। भारत के प्रमुख रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने शुक्रवार शाम ओडिशा के चांदीपुर के पास समुद्री तट से इस अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) का पहला परीक्षण किया है। खुद डीआरडीओ ने शनिवार को सोशल मीडिया एक्स पर यह जानकारी दी। भारत ने यह परीक्षण कर अपने पड़ोसियों चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश को कड़ा संदेश दे दिया है। खासतौर पर चीन को, जो हिंद प्रशांत क्षेत्र में अपना दबदबा बढ़ाने की फिराक में रहता है।
DRDO ने बताया, एडवांस अग्नि मिसाइल का हुआ टेस्ट
DRDO ने बंगाल की खाड़ी में ओडिशा के चांदीपुर के पास एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप (व्हीलर द्वीप) से यह परीक्षण किया है। शनिवार को सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में डीआरडीओ ने बताया-8 मई 2026 को ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से एमआईआरवी (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेड री-एंट्री व्हीकल) प्रणाली से लैस एडवांस अग्नि मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया।
डेटा एनालाइज करने वाली Open Source Intelligence (OSINT) Spectator ने भी सोशल मीडिया एक्स पर बताया है कि भारत ने 8 मई को किस मिसाइल का परीक्षण किया है, यह अभी कंन्फर्म नहीं हो पाया है। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अग्नि-6 का परीक्षण सफल रहता है तो इसे भारत की रणनीतिक और सैन्य ताकत में बड़ा इजाफा होगा।
रिपोर्टों में कहा गया है कि भारत ने 6 से 9 मई के बीच बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक बड़े हवाई क्षेत्र को प्रतिबंधित करते हुए नोटिस टू एयरमेन (NOTAM) जारी किया था। इस परीक्षण में लगभग 3,560 किलोमीटर के नोटम कॉरिडोर का इस्तेमाल किया गया था, जिसमें मिसाइल का लक्ष्य इससे कहीं अधिक अधिकतम रेंज हासिल करना था। यह कॉरिडोर ओडिशा तट के पास अब्दुल कलाम द्वीप से करीब 3,560 किलोमीटर तक फैला हुआ है।
अमेरिका-रूस, चीन और उत्तर कोरिया के पास ICBM तकनीक
रिपोर्ट्स के अनुसार, अभी तक केवल चार देशों अमेरिका, रूस, चीन और उत्तर कोरिया के पास ही आईसीबीएम तकनीक है। इन देशों ने 12,000 किलोमीटर से अधिक मारक क्षमता वाली आईसीबीएम तैनात की हैं। फ्रांस और ब्रिटेन के पास परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बी से दागी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल तकनीक है।
यदि भारत आईसीबीएम क्षमता को पूरा कर लेता है, तो अमेरिका-चीन समेत कोई भी देश उसकी मिसाइल हमले की जद में आ जाएगा।
हाल ही में डीआरडीओ के प्रमुख समीर वी कामथ ने अग्नि-6 के बारे में कहा था-जैसे ही सरकार अनुमति देगी, हम आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं।
पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार, पर आईसीबीएम नहीं
पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार तो हैं, मगर वह आईसीबीएम के बजाय मध्यम दूरी की मिसाइलों पर ध्यान केंद्रित करता है। वहीं, बांग्लादेश के पास न तो परमाणु हथियार हैं और न ही ऐसी किसी बैलेस्टिक टाइप की मिसाइलें ही हैं।
31 देशों में से 9 के पास केवल परमाणु हथियार
31 देशों में से केवल नौ (चीन, फ्रांस, भारत, इज़राइल, उत्तर कोरिया, पाकिस्तान, रूस, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका) के पास परमाणु हथियार होने की जानकारी है या संदेह है।
इन नौ देशों और ईरान ने 1,000 किलोमीटर से अधिक मारक क्षमता वाली मिसाइलों का उत्पादन या परीक्षण किया है। चीन और रूस ही ऐसे दो देश हैं जो अमेरिका के सहयोगी नहीं हैं, लेकिन जिनके पास अपने क्षेत्र से महाद्वीपीय अमेरिका पर हमला करने वाली बैलिस्टिक मिसाइलें दागने की सिद्ध क्षमता है।
भारत के लिए क्यों जरूरी था ऐसा परीक्षण
- एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत का आईसीबीएम मिसाइल का परीक्षण करना बेहद अहम है। दरअसल, भारत को अपने करीबी पड़ोसियों जैसे पाकिस्तान-बांग्लादेश और चीन के साथ सीमा विवाद अरसे से है। जब-तब तनाव की स्थिति आ जाती है।
- कई बार भारत को चीन-पाकिस्तान और बांग्लादेश के नापाक गठजोड़ का भी सामना करना पड़ जाता है। साथ ही हिंद प्रशांत क्षेत्र को सुरक्षित करने के लिहाज से भी ये अहम है।
- इसके अलावा, भूराजनीतिक लिहाज से भी समीकरण साधने और संतुलन बनाने में भी ऐसे परीक्षण बेहद कारगर माने जाते हैं।











