लखनऊ। उत्तर प्रदेश की धरती अब केवल विकास की नई गाथा ही नहीं लिख रही, बल्कि अपनी सनातन विरासत को पुनर्जीवित करने का वैश्विक केंद्र भी बन रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘विरासत भी, विकास भी’ के संकल्प को नई उड़ान देते हुए राज्य सरकार ने अब ‘गुरु गोरखनाथ सर्किट’ के निर्माण की महत्वाकांक्षी कार्ययोजना को धरातल पर उतारना शुरू कर दिया है। भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या के कायाकल्प, काशी विश्वनाथ धाम के भव्य स्वरूप और ब्रज भूमि के विकास के बाद, यह योगी सरकार का चौथा सबसे बड़ा आध्यात्मिक गलियारा होगा, जो नाथ संप्रदाय की सदियों पुरानी परंपराओं को एक सूत्र में पिरोएगा।
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गोरक्षपीठ बनेगा आस्था का मुख्य द्वार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जो स्वयं नाथ पंथ के सर्वोच्च केंद्र गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर हैं, की इस योजना का हृदय स्थल गोरखपुर का गोरखनाथ मंदिर होगा। इस सर्किट के माध्यम से मुख्यमंत्री का लक्ष्य केवल मंदिर निर्माण नहीं, बल्कि उस पूरी विचारधार को पुनर्जीवित करना है जिसने समाज को योग और अनुशासन का मार्ग दिखाया। सरकार गोरखपुर को एक ऐसे ‘आध्यात्मिक हब’ के रूप में विकसित कर रही है, जहाँ से उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और उत्तराखंड के साथ-साथ नेपाल के श्रद्धालुओं के लिए आस्था की राह सुगम हो जाएगी।
बुंदेलखंड से लेकर पश्चिमी यूपी तक विकास की बयार
योगी सरकार इस सर्किट के तहत करोड़ों रुपये के निवेश से प्रदेश के विभिन्न जिलों में फैले नाथ संप्रदाय के केंद्रों का कायाकल्प कर रही है। बुंदेलखंड के महोबा में स्थित ऐतिहासिक ‘गोरखगिरि पर्वत’ को मुख्यमंत्री के विशेष निर्देश पर 11.21 करोड़ रुपये की लागत से संवारा गया है। यहाँ न केवल श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचा तैयार किया गया है, बल्कि ध्यान केंद्र, इको-ट्रेल और ओपन थिएटर के जरिए इसे प्राकृतिक पर्यटन के एक बड़े केंद्र के रूप में स्थापित किया गया है। वहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में ‘नाथ नगरी कॉरिडोर’ के तहत सात प्रमुख शिव मंदिरों (अलखनाथ, त्रिवटी नाथ, पशुपतिनाथ आदि) के सौंदर्यीकरण पर लगभग 31 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक तस्वीर बदल रही है।
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अमेठी में प्रतीक और चित्रकूट में प्राचीनता का संरक्षण
इस आध्यात्मिक यात्रा का एक बड़ा मील का पत्थर अमेठी का जायस क्षेत्र बनेगा, जहाँ गुरु गोरखनाथ की 25 फुट ऊंची विशालकाय कांस्य प्रतिमा स्थापित की जा रही है। योग मुद्रा में बैठी यह प्रतिमा न केवल पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को योग और साधना की महत्ता का बोध कराएगी। इसके लिए सरकार द्वारा 2 करोड़ रुपये की पहली किस्त के साथ काम को युद्ध स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में, चित्रकूट की पहाड़ियों में स्थित प्राचीन गोरखनाथ गुफा और पालेश्वरनाथ मंदिर को भी पर्यटन मानचित्र पर लाते हुए वहां मूलभूत सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि साधु-संतों और शोधकर्ताओं को एक अनुकूल वातावरण मिल सके।
नेपाल और उत्तराखंड तक विस्तृत होगा कनेक्टिविटी का जाल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दृष्टि इस सर्किट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जोड़ने की है। बलरामपुर में भारत-नेपाल सीमा पर स्थित देवीपाटन शक्तिपीठ इस योजना की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। सरकार की योजना है कि गंगा एक्सप्रेसवे और बेहतर सड़क नेटवर्क के माध्यम से इस सर्किट को उत्तराखंड के नाथ स्थलों और नेपाल के काठमांडू व गोरखा जैसे क्षेत्रों से सीधा जोड़ा जाए। पर्यटन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यह कॉरिडोर न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगा, बल्कि नेपाल के साथ भारत के सदियों पुराने सांस्कृतिक और रोटी-बेटी के संबंधों को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।
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ब्रांडिंग और आर्थिक क्रांति का नया अध्याय
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस दूरदर्शी प्रोजेक्ट का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को दुनिया के ‘स्पिरिचुअल टूरिज्म’ मैप पर सबसे ऊपर लाना है। योजना के तहत सभी संबंधित स्थलों पर हाई-टेक साइन बोर्ड, डिजिटल गाइड्स, और विश्वस्तरीय परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सरकार का मानना है कि जब यह सर्किट पूर्णतः क्रियाशील होगा, तो यह न केवल करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को गंतव्य प्रदान करेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए होटल, गाइड, और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में रोजगार की एक नई क्रांति लेकर आएगा। यह प्रयास सिद्ध करता है कि मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौटते हुए आधुनिकता के पथ पर अग्रसर है।










