लखनऊ। लखनऊ में वीरांगना अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा का अनावरण हुआ. इस कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) के निर्माण पर सवाल उठाए.
उनका कहना था कि जिस प्रोजेक्ट को करीब 200 करोड़ रुपये में बनना था, उस पर 864 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए. इतना पैसा लगने के बाद भी इमारत अधूरी रह गई. उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी जगह को निजी फायदे का अड्डा बनाने की कोशिश की गई थी. इसी सिलसिले में उन्होंने अखिलेश यादव, डिंपल यादव और धर्मेंद्र यादव के नाम वाली एक कमेटी का जिक्र किया. योगी ने दावा किया कि इस कमेटी के जरिए JPNIC पर सपा का कब्जा बनाए रखने की कोशिश की गई थी.
‘JPNIC को प्राइवेट लिमिटेड का अड्डा बना दिया’
सीएम योगी ने JPNIC के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला. आरोप लगाया कि इस जगह को एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह चलाने की साजिश रची गई. उनका दावा है कि यहां से होने वाली कमाई को निजी फायदे के लिए इस्तेमाल करने की पूरी तैयारी थी. सीएम ने कहा कि इतने भारी-भरकम खर्च के बाद भी यह प्रोजेक्ट अधूरा पड़ा है.
दरअसल, इस इमारत को लेकर यूपी की सियासत पहले से ही गरमाई हुई है. हाल ही में कैबिनेट ने JPNIC को 30 साल की लीज पर देने का फैसला लिया था. इसी के बाद अखिलेश यादव ने सरकार पर हमला बोलते हुए कड़ा विरोध जताया था.
अखिलेश के बाद योगी का पलटवार
इससे पहले अखिलेश यादव ने JPNIC को लेकर सरकार पर निशाना साधा था. उन्होंने आरोप लगाया था कि सरकार सरकारी संपत्तियों को बेचने की दिशा में आगे बढ़ रही है. JPNIC के साथ छतर मंजिल का भी उन्होंने जिक्र किया था.
सीएम योगी ने अपने बयान में इसी मुद्दे का जवाब दिया. उन्होंने कहा कि अच्छी सरकार आने पर काम होता है, जबकि पिछली सरकार के दौरान विकास के नाम पर सरकारी धन का सही इस्तेमाल नहीं हुआ. JPNIC अब यूपी की राजनीति में सिर्फ एक इमारत नहीं रह गया है. इसे लेकर दोनों दल एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं. इसी वजह से इसका विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है.
पुलिस सुधार से महिला सुरक्षा तक
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पुलिस व्यवस्था का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने पीएसी की 54 कंपनियों को खत्म कर दिया था. बीजेपी सरकार ने इन्हें फिर से संगठित किया.
उन्होंने बताया कि महिलाओं को पीएसी में नेतृत्व देने के लिए तीन महिला बटालियन बनाई गई हैं. लखनऊ की बटालियन का नाम वीरांगना ऊदा देवी पासी, गोरखपुर की झलकारीबाई कोरी और बदायूं की बटालियन का नाम वीरांगना अवंतीबाई लोधी के नाम पर रखा गया है. इस दौरान, सीएम योगी ने यह भी कहा कि सरकार 50 हजार स्नातक बेटियों को स्कूटी देने जा रही है.
क्यों अहम है JPNIC विवाद?
JPNIC को लेकर विवाद की जड़ इसके निर्माण और भविष्य के इस्तेमाल से जुड़ी है. योगी आदित्यनाथ ने इसके निर्माण पर हुए खर्च को लेकर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि करीब 200 करोड़ के काम पर 864 करोड़ खर्च हुए, फिर भी परियोजना अधूरी है.
दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी इस मुद्दे पर सरकार को घेर रही है. अखिलेश यादव ने JPNIC को लीज पर देने के फैसले का विरोध किया है. उन्होंने इसे सरकारी संपत्ति को निजी हाथों में सौंपने की कोशिश बताया है.
ऐसे में JPNIC आने वाले दिनों में यूपी की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है. एक तरफ इसे पुराने खर्च और कथित गड़बड़ियों से जोड़ा जा रहा है, दूसरी तरफ मौजूदा सरकार के लीज फैसले पर सवाल उठ रहे हैं. यही टकराव इस विवाद को लगातार चर्चा में बनाए हुए है.












