नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा परिषद प्राथमिक (Primary) और उच्च प्राथमिक स्कूलों जिन शिक्षकों को पढ़ाते हुए 5 साल से अधिक का समय बीत चुका है उनके लिए एक गुड न्यूज और मौका है। ऐसे शिक्षकों का स्टेट रिसोर्स ग्रुप (एसआरजी) के लिए चयन जल्द होने वाला है। 16 जिलों में एसआरजी के 22 पदों पर जल्द किए जाने का निर्देश दिया गया है। इस्तीफे या अन्य वजहों से खाली हुए इन पदों पर जल्द शिक्षकों का सलेक्शन होगा। अपर राज्य परियोजना निदेशक (समग्र शिक्षा) प्रेम रंजन सिंह की ओर से इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं। पांच वर्ष की सेवा के साथ जिन्होंने राष्ट्रीय और राज्य पुरस्कार जीता हो और उनका प्रदर्शन अच्छा हो उन्हें रखा जाएगा।
क्या होगा एसआरजी का काम
ये एसआरजी परिषदीय स्कूलों में शैक्षिक गुणवत्ता को बढ़ाने, सहयोगात्मक पर्यवेक्षण करने और जिले स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लागू कराने का काम करेंगे।
इन जिलों में होगा सलेक्शन
जिन जिलों में एसआरजी का चयन होना है, उनमें बुलंदशहर और प्रयागराज में तीन-तीन, कुशीनगर और मेरठ में दो-दो और अंबेडकर नगर, अमरोहा, बांदा, बस्ती, एटा, गौतमबुद्ध नगर, हापुड़, हरदोई, झांसी, कौशांबी, लखीमपुर खीरी और सिद्धार्थनगर में एक-एक को रखा जाएगा। सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह दो-दो उत्कृष्ट शिक्षकों के नाम 27 जून तक भेजें।
हर ब्लॉक में रखे जाएंगे छह एआरपी
वहीं उत्तर प्रदेश के प्रत्येक ब्लॉक में छह-छह अकादमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) रखे जाएंगे। कुल 4956 एआरपी रखे जाएंगे। यह अपने-अपने ब्लॉक के परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करेंगे। पांच साल की सेवा पूरी करने वाले शिक्षक आवेदन को अर्ह होंगे। 4500 रुपये प्रति महीने यात्रा भत्ता इन्हें दिया जाएगा।
ऐसे शिक्षक जिनके सेवानिवृत्त होने न्यूनतम पांच साल की अवधि शेष हो वह भी आवेदन कर सकेंगे। एक वर्ष से लिए शिक्षक को एआरपी के पद पर चयनित किया जाएगा। फिर उनके प्रदर्शन के आधार पर तीन वर्ष तक विस्तार कर सेवाएं ली जाएंगी। ऐसे शिक्षक जो पहले तीन वर्ष एआरपी रह चुके हैं, वह अब आवेदन नहीं कर सकेंगे।
लिखित परीक्षा ली जाएगी
आवेदन करने वाले शिक्षकों का 100 अंक में मूल्यांकन किया जाएगा। 70 अंक लिखित परीक्षा के होंगे और 30 अंक में साक्षात्कार लिया जाएगा। चयनित एआरपी अपने ब्लॉक के 30 यूनिक विद्यालयों का निरीक्षण करेंगे। वह स्कूल में शैक्षिक कैलेंडर के आधार पर पाठ्यक्रम पूरा होने, समय-समय पर विद्यालयों का भ्रमण करेंगे और योजनाओं को लागू कराने में मदद करेंगे।










