नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में बिजली फॉल्ट ठीक करने में बढ़ रहे समय और उससे पैदा हो रहे बिजली संकट को देखते हुए बिजली कंपनियों ने बड़ा फैसला लिया है। अब कंपनियां दोबारा संविदा कर्मचारियों की भर्ती करेंग। गर्मियों के पहले तकरीबन 20 हजार संविदा कर्मचारियों की छंटनी कर दी गई थी।
उत्तर प्रदेश बिजली पावर न्यूज
उत्तर प्रदेश में बिजली फॉल्ट ठीक करने में बढ़ रहे समय और उससे पैदा हो रहे बिजली संकट को देखते हुए बिजली कंपनियों ने बड़ा फैसला लिया है। अब कंपनियां दोबारा संविदा कर्मचारियों की भर्ती करेंगी ताकि खराबी आने पर उसे जल्द ठीक किया जा सके। इससे उपभोक्ताओं को राहत मिल सके। दरअसल, गर्मियों से पहले करीब 20 हजार संविदा कर्मचारियों की छंटनी कर दी गई थी। इसके बाद कई क्षेत्रों में फॉल्ट सुधार कार्य प्रभावित हुआ और बिजली आपूर्ति बहाल करने में अधिक समय लगने लगा।
बिना बिजली के घंटो रहना पड़ रहा था
गर्मी के मौसम में उपभोक्ताओं को बड़ा बिजली संकट झेलना पड़ रहा है। किसी भी जगह पर होने वाले फॉल्ट पर उसे बनाने में तय समय से ज्यादा लग रहा था। बिजली उपकेंद्रों पर मरम्मत कार्य देखने वाली टीमों की संख्या घटाकर सिर्फ एक कर दी गई थी, जबकि एक उपकेंद्र से सात से आठ फीडर संचालित होते हैं। ऐसे में जब एक साथ कई फीडरों में खराबी आती थी, तो उन्हें बारी-बारी से ठीक करना पड़ता था। इसी कारण फॉल्ट दूर करने में अधिक समय लगने लगा और बिजली आपूर्ति बहाल होने में देरी होती रही। लोगों को भीषण गर्मी के बीच घंटों बिना बिजली के रहना पड़ा था।
संविदा कर्मचारियों की भर्ती
बीते कई दिनों में कई बार इस मसले पर सवाल उठने के बाद आखिरकार जरूरत के मुताबिक संविदा भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ने जेम पोर्टल से कुशल और अर्धकुशल संविदा कर्मचारियों की भर्ती के लिए निविदा निकालकर इसमें हिस्सा लेने वाली कंपनियों के प्रपत्रों की जांच शुरू कर दी है। इसी तरह से अन्य बिजली कंपनियां भी इस दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
10 प्रतिशत अधिभार शुल्क को लेकर दी सफाई
वहीं, पावर कॉरपोरेशन ने शनिवार को बिजली बिलों पर लगाए गए 10 प्रतिशत अधिभार शुल्क को लेकर सफाई दी। निगम के अनुसार यह निर्णय अपीलीय अधिकरण के आदेशों के अनुपालन में लिया गया है। पावर कॉरपोरेशन ने बताया कि इसमें NTPC को राख परिवहन मद में देय एरियर और सीटीयू को पूर्व वर्षों के लंबित बकाये का भुगतान शामिल है। इस वजह से विद्युत क्रय लागत में अस्थाई बढ़ोतरी हुई है।
बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई
पावर कॉरपोरेशन का कहना है कि, बीते छह साल से यूपी की बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। अधिभार नियामक आयोग की व्यवस्था के मुताबिक वसूला जा रहा है। हर महीने के लिए इसकी दरें परिवर्तित होती रहती हैं। अधिभार की गणना आयोग द्वारा अनुमोदित लागत और बिजली की वास्तविक खरीद लागत के बीच के अंतर के आधार पर की जाती है। इसी वजह से इसकी दरें समय-समय पर बढ़ती या घटती रहती हैं। फरवरी-2026 में दर 10 थी, जबकि माह मार्च में ऋणात्मक (-2.42 प्रतिशत) हो गई थी।
बिजली खरीद के जांच की मांग की
परिषद उपभोक्ता परिषद ने महंगी दरों पर हुई बिजली खरीद के जांच की मांग की है। नियामक आयोग के टैरिफ आदेश में वास्तविक विद्युत खरीद लागत 4.94 रुपये प्रति यूनिट अनुमोदित की गई थी, जबकि पावर कॉरपोरेशन ने मार्च 2026 में लगभग 5.86 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद की। इससे उपभोक्ताओं पर 1610 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ डाल दिया गया। इस महंगी बिजली खरीद की जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष फरवरी में नियामक आयोग के समक्ष याचिका दाखिल कर ईंधन अधिभार शुल्क की जांच की मांग की गई थी। हालांकि, इस मामले में अब तक आयोग की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है। पावर कॉरपारेशन इस तरह बढ़े बिजली बिल का बोझ जनता पर डाल रहा है।










