रायबरेली: नोएडा और लखनऊ जैसे शहरों की तर्ज पर अब रायबरेली का ट्रैफिक सिस्टम भी हाईटेक हो रहा है. शहर के तीन प्रमुख चौराहों पर इंटेलीजेंट ट्रैफिक सिग्नल सिस्टम (ITSS) लगाया जा रहा. नियम तोड़ने पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस आधुनिक कैमरे से खुद ही चालान कट जाएगा. पेश है संवाददाता रविंद्र सिंह की खास रिपोर्ट.
एडिशनल एसपी आलोक सिंह ने बताया कि इंटेलिजेंस ट्रैफिक सिंगनल सिस्टम (ITSS) को हम रायबरेली में तीन प्रमुख चौराहों पर शुरू कर रहे हैं. सिविल लाइंस, सुपर मार्केट का खालसा चौक और लालगंज कस्बे के गांधी चौराहे पर यह सिस्टम लगाए गए हैं.
मेट्रो शहरों जैसी ITSS व्यवस्था
स्मार्ट होगा ट्रैफिक सिस्टम: उन्होंने बताया कि इसकी मोनिटरिंग के लिए पुलिस लाइन में हेड क्वार्टर बनाया गया है. यहां पर पुलिसकर्मी भी तैनात रहेंगे. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कैमरे नियमों का उल्लंघन करने वाले चालकों को ट्रेस करके उनका स्वयं चालान करेंगे. उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर चालान पहुंच जाएगा. ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए यह महत्वपूर्ण है. मेट्रो शहरों में यह काफी कारगर है.
ट्रैफिक पुलिस को बॉडी वार्म कैमरे: उन्होंने बताया कि हमने पुलिसकर्मियों को बॉडी वॉर्म कैमरे भी दिए हैं, ताकि वह मौके पर किसी भी प्रकार की घटना का लाइव रिकॉर्ड रख सकें. यदि कोई गलत चालान की समस्या आती है, तो वह भी दिख जाती है. किसी से गलत व्यवहार होगा तो वह भी रिकॉर्ड रहेगा.
चौराहों की लाइव मॉनिटरिंग: सीओ ट्रैफिक अमित सिंह ने बताया कि रायबरेली में सबसे पहले इंटरनेट प्रोटोकॉल कैमरा (IP) लगे थे, जो कि मुख्य मार्गों के चौराहों पर लगाए गए थे. इनकी कुल संख्या 318 है. वहीं, अब तीन चौराहों सिविल लाइन, खालसा चौक और गांधी चौराहे पर 11 कैमरे ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) और 3 कैमरे पैनारोमिक टिल्ट जूम (PTZ) लगाए हैं.
यह 3 कैमरों में 360 डिग्री घूमने की क्षमता है और यह आसानी से वाहनों को अलग-अलग एंगल से ट्रेस कर लेते हैं. पुलिस लाइन में बने मॉनिटरिंग रूम में लगाई गई स्क्रीन पर कैमरे के लाइव वीडियो दिखते हैं.
हाईटेक कैमरे की मदद से वाहनों में लगी हाई-सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) नंबर प्लेट को ट्रेस करके यातायात नियमों को तोड़ने वाले वाहन चालकों का चालान उनके मोबाइल नंबर पर पहुंच जाएगा. इसमें उस समय की तस्वीर भी एक लिंक के जरिये अटैच होगी.
कैसे काम करता है ITSS
ई-रिक्शों की नई व्यवस्था: एडीशनल एसपी आलोक सिंह ने बताया कि इस समय रायबरेली शहर में करीब 5-6 हजार की संख्या में रजिस्टर्ड ई-रिक्शा हैं. हमने ARTO के साथ प्लानिंग की है. अब रूट्स की कलरिंग करके ई-रिक्शा को कलर दिया गया है.
जिस रूट के लिए जो रंग निर्धारित होगा, उसी कलर का ई-रिक्शा उस रूट पर चलेगा. उन्होंने कहा कि ई-रिक्शा चालक का लाइसेंस नही है, तो उसे ब्लॉक किया जाएगा. इसके अलावा ई-रिक्शा के सम्बंध में जो भी नियम हैं, उसके लिए जागरूकता अभियान चलाया जाएगा.
लोगों ने क्या कहा: स्थानीय नागरिक राकेश गुप्ता ने बताया कि यदि शहर में ITSS योजना के जरिए कैमरे लग जाएंगे तो मेट्रो शहर दिल्ली, गाजियाबाद की तरह रायबरेली में भी यातायात नियम का उल्लंघन करने वाले लोग चालान के डर से नियमों का पालन करेंगे.
यह भी जान लें
- आशीष पाठक ने भी कहा कि AI कैमरे लगने से ऑटोमेटिक चालान वाली टेक्नोलॉजी आ गई तो सीधे ऑनलाइन चालान हो जाएगा. इससे वाहन चालकों के मन मे भी आएगा और वह नियमों का पालन करेंगे.
- संतोष पांडेय ने कहा कि आधुनिक तकनीक से युक्त कैमरे यदि चौराहा पर लगेंगे तो मेट्रो शहर की यह तकनीक हमारे आबादी के मामले में बढ़ते शहर के लिए फायदेमंद होगी. चौराहे पर काफी जाम लगता है. एंबुलेंस भी फंस जाती है.
- ई-रिक्शा के कारण भी जाम लगता है. यह नियमों को सबसे ज्यादा तोड़ते हैं. ऑटोमेटिक चालान से भय भी बनेगा. जब लोग नियमों को समझेंगे तो सभी को जाम से छुटकारा मिलेगा. यह तकनीक जल्द से जल्द शुरू होगी चाहिए.










