लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा चलाई जा रही ‘दिव्यांग भरण-पोषण अनुदान/पेंशन योजना’ आज प्रदेश के लाखों दिव्यांगजनों के लिए केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि सम्मान से जीने का सहारा बन चुकी है। इस कल्याणकारी कदम से न सिर्फ लाभार्थियों को आर्थिक सुरक्षा मिली है, बल्कि वे बिना किसी पर निर्भर रहे आत्मसम्मान के साथ अपना जीवनयापन कर रहे हैं। इस योजना के जरिए सरकार उन परिवारों की ‘लाइफलाइन’ बन गई है, जिनके पास आजीविका का कोई स्थायी साधन नहीं है।
बाराबंकी की ‘आशा’ को मिला जीवन का नया भरोसा
बाराबंकी की रहने वाली आशा और उनके पति हरिलाल के लिए यह पेंशन किसी वरदान से कम नहीं है। आशा एक हाथ से दिव्यांग हैं और उनके पति सांस की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। हरिलाल ने बताया, “स्वास्थ्य खराब रहने के कारण मैं नियमित काम नहीं कर पाता। हमारी चार बेटियां हैं और परिवार का खर्च चलाना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन समय पर मिलने वाली इस पेंशन ने हमें इधर-उधर भटकने से बचा लिया है।”
हर 3 महीने में सीधे खाते में आ रहे हैं 3000
लखनऊ के गोसाईगंज निवासी 35 वर्षीय कौशल (बाएं पैर से दिव्यांग) बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार आने के बाद से ही उन्हें नियमित पेंशन का लाभ मिलना शुरू हुआ है। कौशल को प्रत्येक तीन महीने पर ₹3,000 की सहायता राशि मिलती है। उनका कहना है कि इस राशि से उनकी दवाइयों और रोजमर्रा के जरूरी खर्चों की परेशानी काफी हद तक कम हो गई है।
खेती-किसानी के साथ मिला पेंशन का ‘डबल बूस्टर’
लखनऊ के ही एक अन्य लाभार्थी रजनीश ने बताया कि वे पेशे से किसान हैं और खेती के जरिए अपने परिवार का पेट पालते हैं। शारीरिक दिक्कतों के कारण खेती में कई परेशानियां आती हैं, लेकिन सरकार की ओर से मिलने वाली मासिक सहायता उनके लिए एक बड़ा वित्तीय बैकअप साबित हो रही है, जिससे उनके परिवार को बड़ी राहत मिली है।
आंकड़ों में यूपी मॉडल: 12 लाख से अधिक दिव्यांगों को सीधा लाभ
- योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस और फुल ट्रांसपेरेंसी’ नीति के तहत इस योजना का ढांचा बेहद मजबूत किया गया है:
- वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 12 लाख से अधिक पात्र दिव्यांगजनों को इस योजना से जोड़ा जा चुका है।
- हर पात्र लाभार्थी को 1000 प्रति माह की आर्थिक सहायता दी जा रही है।
- भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए पूरी धनराशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी (DBT) के माध्यम से ट्रांसफर की जाती है।
- यह योजना स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश में विकास और सामाजिक सुरक्षा अब अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक बिना किसी बाधा के पहुंच रही है।










