लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो गई है. एक तरफ जहां समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव सवर्ण समाज खासकर ब्राह्मणों का भरोसा जीतने की कोशिश में हैं, वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नजर समाज के अंतिम पायदान पर खड़े ‘अंत्योदय वर्ग’ पर है.
सीएम योगी ने उन आदिवासी और घुमंतू जातियों के लोगों से सीधा संवाद किया, जिनकी सुध लंबे समय से किसी राजनीतिक दल ने नहीं ली. इसी दिशा में यूपी सरकार ने ‘घुमंतू जाति आयोग’ का गठन किया है. यह आयोग उन जातियों के सर्वांगीण विकास के लिए सरकार को सुझाव देगा, जिन्हें 150 साल पहले अंग्रेजों ने ‘क्रिमिनल ट्राइब्स’ (अपराधी जाति) घोषित कर दिया था.
विपक्ष पर हमला और अंत्योदय का विजन
कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने पिछली सरकारों, खासकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला:
आजादी के बाद की सरकारों ने अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल फूंकने वाले बहादुर घुमंतू समाज के लिए कुछ नहीं किया.
सपा सरकार में सिर्फ कुछ गिनी-चुनी जातियों का ख्याल रखा गया, जबकि बीजेपी ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत पर काम करती है.
पीएम मोदी के विचारों का जिक्र करते हुए योगी ने कहा कि जिन्हें कांग्रेस और सपा ने नकारा, बीजेपी ने उन्हें शासन की सुविधाओं का लाभ देकर जनार्दन के रूप में पूजा है.
वंचित वर्गों और सांस्कृतिक धरोहरों का उत्थान
मुसहर, कोल, बोक्सा, सहरिया, गोंड, थारू और चेरो जैसी जातियों तक योजनाओं का लाभ शत-प्रतिशत (सेचुरेशन) पहुंचाने के प्रयास जारी हैं. इसके अलावा सांस्कृतिक पहचान को उभारने के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं:
श्रृंगवेरपुर: भगवान राम और निषादराज गुह के आलिंगन की भव्य प्रतिमा स्थापित.
बहराइच: महाराजा सुहेलदेव के भव्य विजय स्मारक का निर्माण.
ट्राइबल म्यूजियम: बलरामपुर के इमलिया कोडर में ट्राइबल म्यूजियम तैयार, सोनभद्र-मिर्जापुर में निर्माण की तैयारी.
कुछ दिन तक यही बात चलती रही कि अखिलेश यादव तो राम मंदिर ही नहीं आए वो कौन होते हैं मंदिर का चढ़ावा चोरी का खुलासा करने वाले. मुलायम सिंह यादव ने कार सेवकों पर गोली चलाई थी इनको कैसे अधिकार है कि वो बोल पाएं. सवाल ही यही है कि चोरी का खुलासा करने के लिए 21 बार मंदिर जाने की कोई बाध्यता है क्या. लेकिन अखिलेश यादव ने अपनी बात कहना जारी रखा. सूत्र बताते हैं कि चढ़ावा चोरी की सारी जानकारी पवन पांडेय ने ही अखिलेश यादव को मुहैया कराई थी. माना जा रहा है कि इसी वजह से समाजवादी पार्टी ने 2027 चुनाव के लिए पवन पांडेय को अपना पहला आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया है. पवन पांडेय को अयोध्या से मैदान में उतारा गया है.
इन तमाम घटनाओं से एक बात तो क्लियर है कि यूपी में 2027 का चुनाव धर्म के बजाय जाति पर लड़ा जाएगा. क्योंकि अखिलेश यादव हिंदुओं से जुड़े मुद्दों पर इतने ज्यादा अग्रेसिव नजर आ रहे हैं उसे देखकर ऐसा ही लगता है कि बीजेपी भी इसलिए जाति समुदाय पर फोकस कर रही है. सीएम योगी आदित्यनाथ दलितों, आदिवासियों समेत अन्य जातीय के लोगों के लिए घोषणाएं करने में जुटे हैं.












