लखनऊ। उत्तर प्रदेश के गांवों में रहने वाले लोगों के लिए अपने गांव के विकास में सीधे भागीदारी करने का मौका है. सरकार की मातृभूमि योजना के तहत कोई व्यक्ति या निजी संस्था ग्राम पंचायत में अपनी पसंद का जनोपयोगी विकास कार्य कराने के लिए सहयोग कर सकती है. खास बात यह है कि योजना में सहयोगकर्ता को परियोजना की लागत का कम से कम 60 प्रतिशत देना होता है.
मातृभूमि योजना क्या है?
मातृभूमि योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में जनभागीदारी के जरिए विकास कार्य कराना है. इसके तहत गांव में रहने वाले लोगों के साथ बाहर रहने वाले प्रवासी व्यक्ति, निजी संस्था, सामाजिक संस्था या अन्य इच्छुक सहयोगकर्ता ग्राम पंचायत में विकास कार्य कराने के लिए आगे आ सकते हैं. योजना के तहत सड़क, नाली, पंचायत भवन, स्कूल और स्वास्थ्य जैसी जनोपयोगी सुविधाओं के विकास को शामिल किया गया है. आधिकारिक पोर्टल पर योजना के तहत परियोजना चयन से लेकर निर्माण और निगरानी तक की प्रक्रिया दी गई है.
किसे मिलेगा योजना में जुड़ने का मौका
अपने गांव के लिए विकास कार्य कराने के इच्छुक व्यक्ति, प्रवासी नागरिक, निजी संस्था, सामाजिक संस्था और व्यक्तियों का समूह योजना में सहयोग कर सकता है. यानी अगर कोई व्यक्ति अपने गांव से बाहर रह रहा है और अपने गांव में कोई सुविधा विकसित कराना चाहता है, तो वह भी मातृभूमि योजना के जरिए इसमें भाग ले सकता है.
कितना पैसा देना होगा
मातृभूमि योजना में सहयोगकर्ता को परियोजना की लागत का 60 प्रतिशत या उससे अधिक हिस्सा देना होता है. वहीं राज्य सरकार की ओर से शेष 40 प्रतिशत तक राशि दी जाएगी. उदाहरण के तौर पर किसी विकास कार्य की लागत 10 लाख रुपये है, तो 60 प्रतिशत के हिसाब से सहयोगकर्ता को 6 लाख रुपये देने होंगे और बाकी 4 लाख रुपये तक सरकारी हिस्से से मिलेगा.
कौन-कौन से काम करा सकते हैं
योजना के तहत गांव में जरूरत के हिसाब से कई तरह के विकास कार्य कराए जा सकते हैं. सीसी रोड, नाली, पंचायत भवन, सामुदायिक भवन, बारात घर, पुस्तकालय, स्कूल में स्मार्ट क्लास, आंगनबाड़ी केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पेयजल व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, सोलर एनर्जी, सीसीटीवी, ओपन जिम, खेल परिसर, स्किल सेंटर, बस स्टैंड, यात्री शेड और तालाब का सौंदर्यीकरण जैसे काम शामिल हैं. जल संरक्षण और ठोस कचरा प्रबंधन से जुड़े कार्य भी योजना के तहत कराए जा सकते हैं.
ऐसे समझें पूरी प्रक्रिया
पहला चरण- डोनर रजिस्ट्रेशन: इच्छुक व्यक्ति या संस्था को मातृभूमि योजना के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर डोनर के रूप में रजिस्ट्रेशन करना होगा. इसमें नाम, मोबाइल नंबर, ई-मेल, राज्य और जिले जैसी जानकारी भरनी होती है.
दूसरा चरण- काम और गांव का चयन: रजिस्ट्रेशन के बाद संबंधित ग्राम पंचायत में जिस विकास कार्य को कराना है, उसकी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है. परियोजना के लिए तकनीकी स्तर पर आवश्यक जांच और प्रक्रिया पूरी की जाती है.
तीसरा चरण- योगदान: परियोजना की निर्धारित लागत में सहयोगकर्ता को अपना 60 प्रतिशत या उससे अधिक हिस्सा देना होता है. इसके बाद सरकारी हिस्से की प्रक्रिया आगे बढ़ती है.
चौथा चरण- PPR और DPR: परियोजना से संबंधित PPR/DPR तैयार होने और स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी होती है. इसके बाद निर्माण कार्य के लिए आगे की कार्रवाई की जाती है.
पांचवां चरण- टेंडर और निर्माण: स्वीकृति के बाद टेंडर की प्रक्रिया पूरी की जाती है. इसके बाद चयनित एजेंसी के माध्यम से संबंधित विकास कार्य कराया जाता है. योजना के दिशा-निर्देशों में कार्य कराने और उसकी निगरानी से जुड़ी प्रक्रिया निर्धारित है.
दानदाता को कितना फायदा मिलेगा
मातृभूमि योजना के जरिए सहयोगकर्ता अपने गांव में अपनी जरूरत के मुताबिक जनोपयोगी सुविधा विकसित कराने में भागीदारी कर सकता है. आधिकारिक जानकारी के अनुसार स्वीकृत दान पर नियमों के तहत आयकर अधिनियम की धारा 12A और 80G के तहत आयकर छूट का लाभ मिल सकता है. इसके अलावा योजना में सहयोगकर्ता के नाम से निर्धारित प्रावधानों के अनुसार शिलापट्ट/प्लेक लगाने की व्यवस्था भी है.
कहां से करें रजिस्ट्रेशन
मातृभूमि योजना का आधिकारिक पोर्टल उत्तर प्रदेश पंचायती राज विभाग से संबंधित है. इच्छुक व्यक्ति पोर्टल पर जाकर Donor Registration के विकल्प से प्रक्रिया शुरू कर सकता है. रजिस्ट्रेशन के बाद परियोजना से संबंधित आगे की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी होती है.












