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Home Economy

Strategic Petroleum Reserve क्या है? तेल संकट के समय देश का सुरक्षा कवच कैसे बनता है

by National Agenda
June 10, 2026
in Economy
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strategic petroleum reserve
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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संभावित तेल सप्लाई व्यवधान की आशंकाओं के बीच एक बार फिर रणनीतिक तेल भंडार (SPR) चर्चा में है। जब भी दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों में संकट गहराता है, तब कच्चे तेल की कीमतों और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ने लगती हैं।

ऐसे में यह जानना जरूरी है कि रणनीतिक तेल भंडार आखिर क्या होता है, इसे क्यों बनाया जाता है और तेल संकट के दौरान यह किसी देश के लिए सुरक्षा कवच की तरह कैसे काम करता है…

क्या है रणनीतिक तेल भंडार (SPR)?
रणनीतिक तेल भंडार (SPR) सरकार द्वारा बनाया गया ऐसा विशेष भंडार होता है, जहां बड़ी मात्रा में कच्चा तेल भूमिगत या सुरक्षित स्टोरेज सुविधाओं में जमा रखा जाता है। इसका इस्तेमाल तब किया जाता है, जब वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई बाधित हो जाए या कीमतों में असामान्य उछाल आ जाए। एसपीआई का मुख्य उद्देश्य देश की ऊर्जा जरूरतों को कुछ समय तक सुरक्षित रखना होता है।

क्यों पड़ती है एसपीआई की जरूरत ?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अगर युद्ध, समुद्री मार्गों में बाधा, प्रतिबंध या उत्पादन में कटौती जैसी स्थिति पैदा हो जाए, तो तेल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। SPR ऐसे समय में बैकअप स्टॉक के रूप में काम करता है और देश को तत्काल आपूर्ति संकट से बचाता है।

कहां स्थित हैं भारत के रणनीतिक तेल भंडार?

भारत के मौजूदा एसपीआई तीन प्रमुख स्थानों पर बने हुए हैं:

  • Visakhapatnam – 1.33 मिलियन टन क्षमता
  • Mangaluru – 1.5 मिलियन टन क्षमता
  • Padur – 2.5 मिलियन टन क्षमता

इन तीनों भंडारों की कुल क्षमता करीब 5.33 मिलियन टन है। सरकार के अनुसार, पूरी क्षमता पर भरे होने की स्थिति में अकेले SPR देश की करीब 9.5 दिनों की कच्चे तेल की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं।

संकट के समय कैसे काम करता है एसपीआई?
अगर युद्ध या वैश्विक संकट के कारण तेल की सप्लाई अचानक कम हो जाती है। तो ऐसे में सरकार एसपीआई में जमा तेल को बाजार में जारी कर सकती है। इससे रिफाइनरियों को कच्चा तेल मिलता रहता है और ईंधन की उपलब्धता बनी रहती है।

भारत के पास कितना तेल सुरक्षा कवच है?
हाल ही में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने CNN-News18 को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि भारत के पास वर्तमान में 76 से 80 दिनों की जरूरतों को पूरा करने लायक तेल और गैस भंडार मौजूद है।

इस आंकड़े में एसपीआई के अलावा रिफाइनरियों और तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के पास मौजूद वाणिज्यिक भंडार भी शामिल हैं।

SPR का इतिहास
एसपीआई की अवधारणा 1973 के वैश्विक तेल संकट के बाद सामने आई थी। उस समय तेल निर्यातक देशों द्वारा आपूर्ति में कटौती से कई देशों को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ा था। इसके बाद कई देशों ने आपातकालीन तेल भंडार बनाने शुरू किए ताकि भविष्य में ऐसे संकटों से निपटा जा सके।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गई है। सरकारी तेल कंपनियों ने मई 2026 में तीसरी बार ईंधन के दाम बढ़ाए हैं। दिल्ली में पेट्रोल 87 पैसे महंगा होकर 99.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल 91 पैसे बढ़कर 92.49 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए यह फैसला लिया गया है।

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