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PM मोदी के इंडोनेशिया दौरे से भारत को क्या मिला?

by National Agenda
July 9, 2026
in International, National
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PM Modi
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नई दिल्ली। इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांटो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया तो पूरी दुनिया की निगाहें इस मुलाकात पर टिक गईं. जब दोनों नेताओं के बीच 20 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए, तो यह साफ हो गया कि यह यात्रा भारत की विदेश नीति के लिए एक गेम-चेंजर थी. मिसाइलों से लेकर खनिजों तक और सबांग बंदरगाह से लेकर UPI तक, इस यात्रा से भारत को हुए पांच बड़े फायदों को समझते हैं…

पहला बड़ा फायदा: रक्षा क्षेत्र में बड़ी कामयाबी

इस यात्रा का सबसे चर्चित नतीजा रहा रक्षा सौदे. इंडोनेशिया ने भारत से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और एयर-टू-एयर मार करने वाली अस्त्र मिसाइल खरीदने का समझौता किया.

भारत को क्या फायदा?

पहली बार इतना बड़ा एक्सपोर्ट: यह समझौता 200 मिलियन डॉलर (करीब 1600 करोड़ रुपए) से 350 मिलियन डॉलर (करीब 2800 करोड़ रुपए) के बीच का है. पहले चरण में ब्रह्मोस की दो बैटरियां खरीदी जाएंगी. यह भारत के लिए रक्षा निर्यात के इतिहास का एक बड़ा मुकाम है.

हथियार खरीदने वाले से बेचने वाले बनने की कहानी: अब तक भारत दुनिया का सबसे बड़ा हथियार खरीदने वाला देश माना जाता था. लेकिन अब भारत दुनिया को हाई-टेक मिसाइलें बेचने वाला देश बन रहा है. यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ की सोच को साकार करने जैसा है.

ब्रह्मोस की ग्लोबल पहचान: ब्रह्मोस मिसाइल पिछले साल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान इस्तेमाल की गई थी, जिसने दुनिया के सबसे तेज प्रिसिजन हथियारों में से एक के रूप में उसकी छवि बनाई. अस्त्र मिसाइल 150 किलोमीटर से ज्यादा दूर तक दुश्मन को भेद सकती है. ये सौदे भारत की मिसाइल तकनीक की ताकत को दुनिया के सामने साबित करते हैं.

दूसरा बड़ा फायदा: समुद्री रणनीति में बड़ी छलांग

भारत और इंडोनेशिया ने सबांग बंदरगाह को मिलकर विकसित करने का फैसला किया. यह बंदरगाह इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के उत्तरी छोर पर है और मलक्का स्ट्रेट के बिल्कुल नजदीक है.

भारत को क्या फायदा?

मलक्का स्ट्रेट पर नजर: यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक है. दुनिया की 25 से 35 फीसदी व्यापारिक खेप इसी रास्ते से गुजरती है. चीन अपनी 80 फीसदी ऊर्जा जरूरतें इसी रास्ते से पूरी करता है. सबांग बंदरगाह भारत को इस रणनीतिक रास्ते पर नजर रखने और चीन की नौसेना की गतिविधियों पर पैनी नजर रखने की ताकत देगा.

भारतीय नौसेना को नया अड्डा: यह बंदरगाह भारतीय नौसेना को हिंद महासागर और मलक्का जलडमरूमध्य में अपनी मौजूदगी बनाए रखने के लिए एक बेहतरीन लॉजिस्टिक्स और रसद आपूर्ति केंद्र मुहैया कराएगा. यह गहरे पानी का बंदरगाह है, जो पनडुब्बियों समेत हर तरह के नौसैनिक जहाजों को रास्ता दे सकता है. इससे भारत को आपदा राहत, समुद्री डकैती रोकने और मानवीय सहायता जैसे कामों में भी मदद मिलेगी.

ग्रेट निकोबार से सिर्फ 160 किमी दूर: यह बंदरगाह भारत के अपने ग्रेट निकोबार ट्रांस-शिपमेंट पोर्ट प्रोजेक्ट से महज 160 किलोमीटर दूर है. दोनों बंदरगाह मिलकर भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक मजबूत समुद्री ताकत बनाएंगे.

यह कदम चीन की ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ (हिंद महासागर में चीन के समुद्री ठिकानों) की रणनीति का सीधा जवाब माना जा रहा है.

तीसरा बड़ा फायदा: खनिज संसाधनों पर पकड़

दोनों देशों ने क्रिटिकल मिनरल्स के मामले में समझौता किया. भारत इंडोनेशिया में स्टील, निकल और रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स के प्रोडक्शन में निवेश करेगा.

भारत को क्या फायदा?

निकल की कमी दूर होगी: निकल इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बैटरी और स्टील बनाने के लिए बेहद जरूरी है. भारत अपनी 80 फीसदी से ज्यादा फेरोनिकल (स्टील बनाने वाली एक अहम सामग्री) की जरूरत इंडोनेशिया से पूरी करता है. इस समझौते से भारत को सप्लाई चेन मजबूत करने में मदद मिलेगी.

चीन पर निर्भरता घटेगी: दुनिया के रिफाइंड निकल का 65 फीसदी हिस्सा इंडोनेशिया और चीन के पास है. इंडोनेशिया अकेला 2040 तक दुनिया के 44 फीसदी रिफाइंड निकल की आपूर्ति करेगा. इस निवेश से भारत निकल प्रोसेसिंग में अपनी मौजूदगी बढ़ाएगा और चीन के एकाधिकार को चुनौती दे सकेगा.

चौथा बड़ा फायदा: डिजिटल और शैक्षणिक सहयोग

इंडोनेशिया में EVM: भारत इंडोनेशिया को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) मुहैया कराएगा. इंडोनेशिया दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा लोकतंत्र है, लेकिन अभी भी वहां कागजी वोट्स से चुनाव होते हैं. 2029 के आम चुनावों से वहां EVM का इस्तेमाल होगा. यह भारत की इलेक्शन टेक्नोलॉजी की दुनिया भर में पॉपुलेरिटी को दिखाता है.

UPI का विस्तार: इंडोनेशिया की पेमेंट प्रणाली के साथ भारत की UPI को जोड़ा जाएगा. इससे दोनों देशों के बीच व्यापार और यात्रा आसान हो जाएगी. UPI अब सिंगापुर, UAE, फ्रांस, श्रीलंका, मॉरीशस, भूटान और नेपाल सहित कई देशों में चलता है.

इंडोनेशिया में IIM: बेंगलुरु के IIM का पहला अंतरराष्ट्रीय कैंपस इंडोनेशिया में खुलेगा. टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्टार्टअप के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ेगा.

पांचवां बड़ा फायदा: सांस्कृतिक और कूटनीतिक कनेक्ट

प्रम्बानन मंदिर का संरक्षण: भारत इंडोनेशिया के योग्यकर्ता में स्थित 1000 साल पुराने प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण प्रोजेक्ट में सहयोग करेगा. यह मंदिर भारत और इंडोनेशिया की साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है.

टैगोर की विरासत: रवींद्रनाथ टैगोर की इंडोनेशिया यात्रा की 100वीं वर्षगांठ ‘टैगोर-देवंतरा वर्ष’ के रूप में मनाई जाएगी.

सर्वोच्च सम्मान: PM मोदी को इंडोनेशिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बिंतंग अदिपूर्णा’ से सम्मानित किया गया. यह भारत-इंडोनेशिया संबंधों की गहराई को दर्शाता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस यात्रा ने भारत-इंडोनेशिया के रिश्तों को नई ऊंचाई दी है. जैसा कि विदेश मंत्रालय ने कहा, इस यात्रा ने ‘भारत-इंडोनेशिया व्यापक सामरिक साझेदारी को और मजबूत किया है.’ अब देखना यह है कि इन समझौतों का जमीनी स्तर पर कितना असर होता है.

 

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