वाराणसी: गंजारी में बन रहे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का काम अंतिम चरण में है. स्टेडियम सेंसर बेस्ड तकनीक पर तैयार किया जा रहा है. लगातार 3 घंटे भी मूसलाधार बारिश होगी तो मात्र 20-30 मिनट में मैच दोबारा शुरू कराया जा सकता है. सेंसर बेस लाइट, पिच की हाईटेक तकनीक इसे अनोखा बना रही है.
प्रधानमंत्री मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट गंजारी क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण की शुरुआत अक्टूबर 2023 में हुई थी. सितंबर 2026 में से निर्माण कंपनी इसे तैयार करके हैंडओवर कर देगी. संभावना जताई जा रही है कि ट्रायल मैच के बाद 2027 में यहां पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच खेला जाएगा.
32 हजार लोगों की क्षमता: स्टेडियम की बात करें तो इसे काशी महादेव की थीम पर तैयार किया गया है. यहां का मीडिया सेंटर डमरू के आकार का नजर आ रहा है. फसाड लाइट को त्रिशूल का रूप दिया गया है और इस पूरे स्टेडियम को अर्द्ध चंद्राकार यानी कि बनारस के घाट के स्वरूप में बनाया गया है.
यहां 32,000 लोगों के बैठने की व्यवस्था है. खिलाड़ियों के लिए अंतरराष्ट्रीय फैसिलिटी वाला ड्रेसिंग रूम बनाया गया है. मुंबई की वानखेड़े स्टेडियम के पिच के आधार पर इसके पिच को तैयार किया गया है.
सेंसर तकनीक से लैस वाराणसी क्रिकेट स्टेडियम.
आधुनिक पिच हो रही तैयार: इस स्टेडियम की पिच में मिट्टी का प्रयोग नहीं किया गया है, बल्कि रेत, कंकड़ का प्रयोग किया गया है. इस पर विशेष तरीके के केमिकल के साथ घास को उगाया गया है. इस तकनीक का प्रयोग मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में किया गया है. इससे खिलाड़ियों को दिक्कत नहीं होगी.
सितंबर में होगा हैंडओवर: प्रोजेक्ट के हेड सरोज शुक्ला ने बताया कि 332 करोड़ रुपए की लागत से यह स्टेडियम तैयार किया गया है. यह करीब 3.5 एकड़ में फैला हुआ है. उन्होंने बताया कि, यहां पर 32000 लोगों के बैठने की व्यवस्था है.
इसे 3 महीने में बनाकर BCCI को हैंडओवर कर दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि स्टेडियम में ड्रेनेज व्यवस्था की गई है. अगर 3 घंटे भी मूसलाधार बारिश होती है, तो 20 मिनट में यह क्रिकेट पिच मैच खेलने के लिए तैयार हो जाएगा.
उन्होंने बताया कि हमने पूरे पिच में जगह-जगह पाइप के जरिए ड्रेनेज सिस्टम बनाया है, जिसके साथ तुरंत पानी निकलने लगेगा. सेंसर बेस्ड लाइट व्यवस्था रखी है. यदि कोई व्यक्ति लाइट के पास से गुजरेगा तो लाइट जलेगी. इसके बाद लाइट बंद हो जाएगी. बिजली की बचत और पर्यावरण दोनों का ध्यान रखा गया है.
बनारस की थीम पर स्टेडियम: उन्होंने बताया कि स्टेडियम को काशी महादेव और घाट के थीम पर तैयार किया गया है. यदि आप पूरे स्टेडियम को देखेंगे तो यह आपको अर्द्ध चंद्राकार स्वरूप में नजर आएगा. जैसा यहां के घाट दिखाई देते हैं. इसके साथ ही भगवान शिव के त्रिशूल की तरह फसाड लाइट लनाई गई है.
स्टेडियम के पीछे के स्ट्रक्चर को बेलपत्र के अनुसार बनाया गया है. इसके आगे की दीवारों पर बेलपत्र की डिजाइन तैयार की गई है. मीडिया सेंटर को डमरू की डिजाइन में तैयार किया गया है, जो देखने में बेहद आकर्षक है.
आध्यात्म और अत्याधुनिकता दोनों का समावेशन इस स्टेडियम में देखने को मिलेगा. हमने पर्यावरण का भी ख्याल रखा है. एसटीपी के माध्यम से यहां प्रयोग होने वाले जो सीवरेज पानी है रिफाइंड करके दूसरे कामों में लिया जाएगा. इसके जरिए कार वॉशिंग, पौधों को पानी देना, सफाई इत्यादि में इनका प्रयोग होगा.
बेहतरीन कुर्सियां लगीं: उन्होंने बताया कि यदि हम इस स्टेडियम में आने वाले दर्शकों की सुविधा की बात करें तो उसका भी भरपूर ख्याल रखा गया है. यहां पर जो चेयर लगाए गए हैं, वह कोई सामान्य चेयर नहीं हैं. यह ज्यादा वजन वहन कर सकते हैं. यही नहीं यह सालों साल खराब भी नहीं होंगे.
यदि स्टेडियम में कभी आग लगती है तो सेकेंड में आग पर काबू पाया जा सकता है. इससे कोई भी जनहानि नहीं होगी. उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों के लिए यहां पर दो पवेलियन भी बनाए गए हैं. ड्रेसिंग रूम में इंटरनेशनल फैसिलिटी है. स्टीम एंड सौना, जकूजी जैसी सुविधाएं दी गई है.
90 फीसदी काम पूरा: वाराणसी मंडलायुक्त एस राजलिंगम ने बताया कि यह इंटरनेशनल स्टेडियम वाराणसी का महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है. इसका 90 फीसदी से ज्यादा काम पूरा हो चुका है. जुलाई-अगस्त में उसका काम पूरी तरीके से फाइनल हो जाएगा.
उन्होंने बताया कि इसके बन जाने से पूर्वांचल के लोगों को एक बड़ा लाभ मिलेगा और वाराणसी स्पोर्ट्स सिटी के रूप में विकसित होगा. स्टेडियम वाराणसी के विकास में बेहद महत्वपूर्ण योगदान देगा.










