नई दिल्ली। ब्रिक्स देशों ने ‘इंदौर घोषणापत्र’ को अपनाया है। इसमें कृषि क्षेत्र में गहरे सहयोग और कई नई पहल शुरू करने का वादा किया गया है। इनमें किसानों के बीज अधिकारों पर एक ग्लोबल फोरम, एक डिजिटल कृषि नेटवर्क और एग्रो-इकोलॉजी और रीजेनरेटिव फार्मिंग के लिए प्लेटफॉर्म शामिल है।
इसलिए खास है यह पहल
ब्रिक्स की ओर से इस घोषणापत्र को अपनाने और भारत को कृषि और डिजिटल पहलों का नेतृत्व सौंपने का खास मतलब है। यह दिखाता है कि चीन की मौजूदगी के बावजूद इस शक्तिशाली ग्लोबल फोरम पर भारत का प्रभाव और दबदबा बढ़ रहा है।
ये फैसले भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों और अधिकारियों की पांच दिन तक चली बैठक के आखिर में लिए गए।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सदस्य देश कई नए इंस्टीट्यूशनल मेकेनिज्म पर सहमत हुए। इनमें से कई में भारत समन्वय की भूमिका निभाएगा।
क्या कहता है इंदौर घोषणापत्र?
इंदौर घोषणापत्र के अनुसार, ब्रिक्स देशों ने खाद्य और पोषण सुरक्षा को मजबूत करने, छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका में सुधार करने, कृषि में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने, जलवायु-अनुकूल और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने और कृषि व्यापार और निवेश में सहयोग बढ़ाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
सदस्य देशों ने एक निष्पक्ष, समावेशी और पारदर्शी बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई। कृषि व्यापार को आसान बनाने के उपायों पर चर्चा की।
किसानों के बीज अधिकारों पर ग्लोबल फोरम
प्रमुख फैसलों में ब्रिक्स देश किसानों के अधिकारों को बढ़ावा देने और बीज प्रणालियों से जुड़ी पारंपरिक जानकारी को संरक्षित करने के लिए ‘बीज प्रणालियों में किसानों के अधिकारों पर ग्लोबल फोरम’ स्थापित करने पर सहमत हुए।
चौहान ने कहा, ‘भारत इस पहल का समन्वय करेगा।’
यह फोरम किसानों के बीज अधिकारों, देशी बीज विविधता के संरक्षण और पारंपरिक कृषि जानकारी को संरक्षित करने पर फोकस करेगा।
AGRIN नेटवर्क को कॉर्डिनेट करेगा भारत
सदस्य देश कृषि इनपुट, आनुवंशिक संसाधनों और जानकारी साझा करने में सहयोग को आसान बनाने के लिए BRICS AGRIN नेटवर्क बनाने पर भी सहमत हुए। भारत इस नेटवर्क के लिए समन्वय करने वाले देश के रूप में काम करेगा।
चौहान के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म सदस्य देशों के बीच कृषि संसाधनों, तकनीकी जानकारी और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान में मदद करेगा।
आगे बढ़ा ग्रेन एक्सचेंज का प्रपोजल
यह समूह प्रस्तावित ‘ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज’ को चालू करने पर चर्चा जारी रखने पर भी सहमत हुआ। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच अनाज व्यापार और सप्लाई चेन को मजबूत करना है।
चौहान ने कहा कि इस पहल से ब्रिक्स देशों के बीच अनाज व्यापार, बाजार संपर्क और सप्लाई चेन सहयोग में सुधार हो सकता है।
जलवायु-अनुकूल खेती पर फोकस
जलवायु परिवर्तन से पैदा हुई चुनौतियों का सामना करने के लिए ब्रिक्स देश एग्रो-इकोलॉजी और रीजेनरेटिव एग्रीकल्चर में ‘ब्रिक्स सेंटर ऑफ एक्सीलेंस नेटवर्क’ स्थापित करने पर सहमत हुए। इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) के तहत काम करने वाला ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मिंग सिस्टम्स रिसर्च, मोदीपुरम’ शुरुआती तालमेल का काम संभालेगा।
डिजिटल एग्रीकल्चर नेटवर्क को मंजूरी
सदस्य देशों ने खेती में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी और दूसरे डिजिटल समाधानों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए ‘डिजिटल एग्रीकल्चर नेटवर्क’ बनाने पर भी सहमति जताई।
इस नेटवर्क के लिए शुरुआती तालमेल का काम ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) दिल्ली’ संभालेगा।
रिसर्च प्लेटफॉर्म बनेगा एक्शन हब
चौहान ने कहा कि ब्रिक्स देश ‘ब्रिक्स एग्रीकल्चरल रिसर्च प्लेटफॉर्म’ को मजबूत करने और इसे ‘नॉलेज टू एक्शन हब’ में बदलने पर भी सहमत हुए हैं ताकि रिसर्च के नतीजे किसानों तक तेजी से पहुंच सकें।
मंत्री के अनुसार, इन पहलों का मकसद छोटे और सीमांत किसानों को सशक्त बनाना, खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना और खेती को ज्यादा टिकाऊ और लचीला बनाना है।
100 प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा
पांच दिन चली इस बैठक में लगभग 100 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इनमें सदस्य और सहयोगी देशों के करीब 60 विदेशी प्रतिनिधि शामिल थे।
चौहान ने कहा कि ये फैसले इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और ज्ञान के आदान-प्रदान के जरिए खेती से जुड़ी आम चुनौतियों से निपटने के लिए ब्रिक्स देशों की साझा प्रतिबद्धता को दिखाते हैं।
उन्होंने बताया कि ब्रिक्स देश दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। दुनिया की कुल कृषि योग्य भूमि का लगभग 42% हिस्सा इनके पास है। दुनिया के कुल अनाज उत्पादन में इनका योगदान भी लगभग 42% है।
उन्होंने कहा कि देशों के बीच बेहतर सहयोग वैश्विक खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
ब्रिक्स में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। बाद में इस समूह का विस्तार हुआ। इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया भी शामिल हो गए।










