नई दिल्ली। बुंदेलखंड के विकास को नई रफ्तार देने वाली योगी सरकार की महत्वाकांक्षी ग्रीनफील्ड इंडस्ट्रियल सिटी परियोजना को केंद्र की मोदी सरकार से मंजूरी मिल गई है। भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने झाँसी में विकसित होने वाली बुंदेलखंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (बीडा) की इस परियोजना को हरी झंडी दे दी है। करीब 1.51 लाख करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना से 5.6 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद है। इससे बुंदेलखंड में औद्योगिक विकास का नया दौर शुरू होगा।
बुंदेलखंड के विकास में बड़ा कदम
यह परियोजना 253.33 वर्ग किलोमीटर यानी करीब 62,599 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जाएगी। इसके दायरे में झाँसी के 33 गाँव आएँगे। मास्टर प्लान-2045 के तहत तैयार की गई इस इंडस्ट्रियल सिटी को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा।
परियोजना को मंजूरी मिलने से पहले विशेषज्ञ समितियों ने कई चरणों में इसकी जाँच की। स्थानीय लोगों की राय जानने के लिए जनसुनवाई भी कराई गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने परियोजना का समर्थन किया। सभी जरूरी प्रक्रियाएँ पूरी होने के बाद केंद्र सरकार ने अंतिम मंजूरी दे दी।
उद्योगों का हब बनेगा झाँसी, लाखों को मिलेगा रोजगार
मास्टर प्लान के तहत करीब 83.66 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र उद्योगों के लिए आरक्षित किया गया है। यहाँ कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र, रक्षा उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रिक वाहन जैसे क्षेत्रों से जुड़े उद्योग स्थापित किए जाएँगे।
इस परियोजना से सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से 5.6 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे स्थानीय युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार मिलने के साथ-साथ बुंदेलखंड में निवेश और आर्थिक गतिविधियाँ भी बढ़ेंगी।
हरियाली और पर्यावरण संरक्षण पर रहेगा विशेष जोर
परियोजना में विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी गई है। कुल क्षेत्रफल का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा हरित क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा। परियोजना सीमा पर 50 मीटर चौड़ा और डोंगरी बाँध के चारों ओर 150 मीटर चौड़ा ग्रीन बेल्ट तैयार किया जाएगा। ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत बड़े पैमाने पर पौधारोपण भी किया जाएगा ताकि क्षेत्र में हरियाली बढ़ाई जा सके।
गाँवों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएँ, पानी के दोबारा इस्तेमाल की व्यवस्था
परियोजना के तहत नए आवासीय क्षेत्रों का विकास किया जाएगा और मौजूदा गाँवों को भी आधुनिक शहर के साथ जोड़ा जाएगा। स्थानीय लोगों के लिए पार्क, स्वास्थ्य केंद्र, शैक्षणिक संस्थान और कौशल विकास केंद्र जैसी सुविधाएँ विकसित की जाएँगी। वहीं जल संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस्तेमाल किए गए पानी का शोधन कर उसे दोबारा उपयोग में लाया जाएगा।
इसके लिए बड़े सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जाएँगे। अधिकारियों के अनुसार किसी भी प्रकार का गंदा पानी बेतवा, पहुज और अंगौरी नदियों में नहीं छोड़ा जाएगा।
बीडा सीईओ बोले- बुंदेलखंड के लिए नए युग की शुरुआत
बीडा के सीईओ संजय कुमार खत्री ने कहा कि केंद्र सरकार से मिली यह मंजूरी बुंदेलखंड के विकास के इतिहास में एक नया अध्याय है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप बीडा को देश की सबसे आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। उनका कहना है कि यह परियोजना बुंदेलखंड को वैश्विक विनिर्माण मानचित्र पर नई पहचान दिलाने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में भी बड़ा बदलाव लाएगी।










