नई दिल्ली। मोदी सरकार ने पिछले एक दशक में देश में कारोबार को लेकर पूरा माहौल बदल दिया है. कारोबार शुरू करने के लिए जरूरी मंजूरियां दिलाने से लेकर शुरुआती फंड और फिर बाजार तक पहुंच बनाने तक का काम काफी आसान कर दिया है. आज तमाम ऐसी सरकारी योजनाएं हैं, जिनका लाभ उठाकर आसानी से अपना बिजनेस खड़ा किया जा सकता है. सबसे ज्यादा मुश्किल आती है तैयार प्रोडक्ट को कस्टमर्स तक पहुंचाने और अपने लिए बाजार बनाने में. अगर आप भी कोई बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं तो इसके लिए बाजार कैसे बनाएंगे, इसकी पूरी जानकारी स्टेप बाई स्टेप दे रहे हैं.
सरकार की तमाम योजनाओं की मदद से भारत में स्टार्टअप्स और छोटे बिजनेस के लिए माहौल बहुत तेजी से बन रहा है. देशभर के एंटरप्रेन्योर बिजनेस के लिए नए प्रोडक्ट्स और आइडियाज डेवलप कर रहे हैं. इसके अलावा, ऐसी सरकारी स्कीम्स भी हैं जो एंटरप्रेन्योर्स और MSMEs को फंडिंग, क्रेडिट और दूसरी तरह की मदद देने के लिए बनाई गई हैं. बिजनेस स्थापित करने और उसकी मंजूरियां दिलाने में मदद करने वाली फर्म JR Compliance के सीईओ ऋषिकेश मिश्रा का कहना है कि पैसा तो बस कहानी की शुरुआत है. छोटे कारोबारियों को असली मुश्किल तब होती है, जब वे अपने आइडियाज को बाजार के लायक प्रोडक्ट बनाते हैं.
कौन सी सरकारी योजना मददगार
मोदी सरकार की स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम आपको बिजनेस की शुरुआत करने में सबसे ज्यादा मदद करती है. यह स्कीम रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट, प्रोडक्ट डेवलपमेंट, प्रोडक्ट टेस्टिंग और मार्केट एंट्री जैसे फेज में स्टार्टअप्स की मदद करती है. जैसे सरकार ने माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट बना रखा है, जो माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज को बिना किसी कोलैटरल के लोन दिलाने में मदद करती है.
प्रोडक्ट बनाने में कौन करेगा मदद
प्रोडक्ट-बेस्ड स्टार्टअप्स और MSMEs के लिए अपने आइडिया पर प्रोडक्ट डेवलप करना पहला कदम होता है. एक बार प्रोटोटाइप तैयार हो जाने के बाद प्रोडक्ट को कस्टमर्स तक पहुंचाने से पहले बिजनेस को आम तौर पर कई स्टेज से गुज़रना पड़ता है. इन स्टेज में प्रोटोटाइप डेवलपमेंट, टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन और अप्रूवल, प्रोडक्शन और आखिर में बाजार में एंट्री शामिल होती है. ज्यादातर कारोबार को टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन प्रोसेस को पूरा करने के लिए जरूरी रिसोर्स या जानकारी नहीं होती है. इससे न सिर्फ लागत बढ़ेगी, बल्कि बाजार बनाने में देरी भी हो सकती है.
उत्पादन से पहले पूरा करना होगा ये काम
ऋषिकेश मिश्रा का कहना है कि प्रोडक्ट डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग शुरू होने से पहले कम्प्लायंस रिक्वायरमेंट को समझना जरूरी होता है. एंटरप्रेन्योर्स को न सिर्फ प्रोडक्ट डेवलप करने में, बल्कि उस प्रोडक्ट को मार्केट तक ले जाने में भी सपोर्ट की जरूरत होती है. अभी देश में सस्ती टेस्टिंग सुविधाओं की कमी एक बड़ी समस्या है जिसका सामना छोटी फर्में करती हैं. एक छोटी फर्म के लिए अपनी लैब बनाना और अपने इक्विपमेंट खरीदना महंगा होता है. लिहाजा वे बाहरी लैब या टेस्टिंग सेंटर पर निर्भर रहती हैं. अगर सरकारी संस्थाओं, यूनिवर्सिटी, रिसर्च संस्थानों और टेस्टिंग संगठनों के बीच ज्यादा सहयोग हो तो छोटे बिजनेस के लिए टेस्टिंग ज्यादा आसान हो सकती है.
कहां से पूरा करें जरूरी कागजात
कारोबार शुरू करने में एक और समस्या आती है मानकों को पूरा करने और उसके हिसाब से डॉक्यूमेंट बनवाने में. इस मामले में JR Compliance जैसी फर्म काफी मददगार साबित होती हैं. इस फर्म के जरिये BIS, TEC, WPC, AERB और EPR जैसे काम काफी आसानी से पूरे किए जा सकते हैं. इस फर्म ने अभी तक कई हजार सर्टिफिकेशन को सपोर्ट किया है. ऋषिकेश का कहना है कि अधूरे डॉक्यूमेंटेशन, टेस्ट रिपोर्ट का न होना और कम्प्लायंस पूरा न करने से सर्टिफिकेशन की टाइमलाइन लंबी हो सकती है और अचानक खर्च बढ़ सकता है. प्रोडक्ट बनाने से पहले जरूरी स्टैंडर्ड और रेगुलेटरी मानकों को पूरा करना अहम है.
फंडिंग से मार्केट में एंट्री तक कैसे पहुंचें
ऋषिकेश ने बताया कि बिजनेस ग्रोथ के लिए सरकारी योजनाओं जैसे स्टार्टअप इंडिया और स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम का फायदा उठाना चाहिए. यह सरकारी योजनाएं प्रोटोटाइप डेवलप करने, प्रोडक्ट्स की टेस्टिंग करने और मार्केट में एंट्री करने के लिए वित्तीय मदद करती हैं. भारत सरकार ने और भी कई स्कीम शुरू की हैं जिनका मकसद एंटरप्रेन्योर्स के लिए प्रोडक्ट डेवलपमेंट और कस्टमर्स तक पहुंचने के लिए फाइनेंशियल मदद देना है. टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन और डॉक्यूमेंटेशन प्रोसेस पूरा करने के बाद ही प्रोडक्ट्स को मार्केट के लिए तैयार करना चाहिए.
JR Compliance ने बनवाईं 10 हजार कंपनियां
ऋषिकेश का कहना है कि उनकी कंपनी JR Compliance ने अभी तक भारत में ही 10,000 से ज्यादा कंपनियों को 5,000 से ज्यादा सर्टिफिकेशन दिलाने में मदद की है. उनकी कंपनी BIS, TEC, WPC, AERB, और EPR जैसे एरिया में रेगुलेटरी और सर्टिफिकेशन सर्विस देती है. छोटे कारोबार के लिए फंड हासिल करने के साथ ही उनके प्रोडक्ट को जरूरी टेस्ट भी पास करने होते हैं. तभी जरूरी सर्टिफिकेशन और अप्रूवल मिलते हैं. भारत में अच्छे आइडिया वाले कई एंटरप्रेन्योर हैं. लेकिन, सफल बिजनेस के लिए एक आइडिया और प्रोटोटाइप से आगे बढ़कर सर्टिफाइड प्रोडक्ट बनाने पर जोर देना होगा.












