मेरठ: प्रदेश भर में किसान इन दिनों अपनी अगली फसल की तैयारी में जुटे हैं, कुछ उन्नत बीज की तलाश में हैं, तो कुछ पहले से रखे हुए हैं. कुछ बीज की खरीदारी पर विचार कर रहे हैं, ताकि फसलों की पैदावार बेहतर हो सके. हालांकि, इस सीजन में कृषि विभाग भी कई फसलों के बीज निःशुल्क किसानों को उपलब्ध कराता है. साथ ही कुछ फसलो के बीज पर सब्सिडी भी देता है. जिसकी जानकारी ज्यादा तर किसानों को नही होती और वह बीज की तलाश में “घूमते फिरते” मिलते हैं. इस संबंध में मेरठ जिला कृषि अधिकारी ने कई बातें बताई.
उन्होंने बताया कि खरीफ के सीजन में किसान बड़ी संख्या में धान, मक्का, ज्वार, बाजरा आदि की खेती करते हैं, इसके साथ ही दलहनी फसलों में मूंग, उरद अरहर और मुंगफली जैसी फसलों को किसान तरजीह देते हैं. इस दौरान, कृषि विभाग की तरफ से दो तरह के बीज किसानों को वितरित किया जाता है. कुछ बीज ऐसे होते हैं जिसमें सब्सिडी मिलती है, जबकि वहीं कुछ बीज पूरी तरह से नि:शुल्क किसानों को दिया जाता है.
इसके अलावा धान, मूंग, अरहर और उरद का कुछ सामान्य बीज भी उपलब्ध कराया जाता है, जो कि 50 फीसदी अनुदान पर मिलता है. बीज वितरण में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से किसानों के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाया गया है, जहां किसान अपना पंजीकरण कर बीज की बुकिंग कर बीज ले सकते हैं.
किसी ब्लॉक में अगर लक्ष्य की तुलना में ज्यादा ई बुकिंग हो जाती है तो फिर ई-लॉटरी की जाती है. ई लॉटरी में जिन किसानों का नाम आता है, उन किसानों को निकटवर्ती बीज भंडार से बीज मिलता है. अगर किसी विकास खंड में बुकिंग बीज लक्ष्य से कम होती है तो वहां किसानों की बुकिंग auto conferm हो जाती है और ब्लॉक के सभी किसानों को बीज मिल जाता है.
कृषि अधिकारी राजीव कुमार के अनुसार, मेरठ में धान मुख्य फसल है, लेकिन इसका एरिया यहां सिर्फ 13000 हेक्टेयर है. इस क्षेत्रफल के लगभग 95 फिसदी हिस्से में धान उगाये जाते हैं. कृषि विभाग की तरफ से खासतौर से बासमती की जो उन्नत किस्में हैं, जिनमें पूसा बासमती की वैरायटी 1692,1847, 1718 और 1509 को लोग ज्यादा पसंद करते हैं. बासमती का बीज भी किसानों को दिया जाता है.
कृषि अधिकारी के मुताबिक, अभी बुकिंग खुली हुई है, किसान जाकर बुकिंग करा सकते हैं. एक किसान को अधिकतम दो हेक्टेयर तक खेती के लिए बीज मिलती है. यहां कुछ नियम और शर्तें भी किसानों के लिए लागू हैं. अगर किसान इस वर्ष बीज लेता हैं, तो उसे अगले साल बीज नहीं मिलेगा. यानी कृषि विभाग अल्टरनेट ईयर पर बीज देता है. इसके आलावा मिलेट्स को बढ़ावा देने के लिए सरकार सांबा, कोदो, रागी, बाजरा और ज्वार की मिनी कीटस किसानों में निःशुल्क वितरण कर रही है.










