संभल। उत्तर प्रदेश का संभल जिला आज अपनी प्राचीन धार्मिक मान्यताओं, पारंपरिक हस्तशिल्प और आधुनिक विकास परियोजनाओं के जरिए नई इबारत लिख रहा है। कभी अपनी सीमित पहचान और पुरानी व्यवस्थाओं के लिए जाना जाने वाला यह जिला अब कल्कि धाम, हॉर्न और बोन क्राफ्ट (Horn and Bone Craft) और आधुनिक कनेक्टिविटी के साथ ‘बढ़ते उत्तर प्रदेश’ की कहानी का एक अहम हिस्सा बन चुका है।
कल्कि धाम और 24 कोसीय परिक्रमा
संभल की पहचान भगवान विष्णु के 10वें अवतार ‘कल्कि’ की जन्मस्थली के रूप में की जाती है। देश का पहला भव्य ‘कल्कि मंदिर’ यहीं स्थित है, जहाँ मान्यता है कि भगवान कल्कि का अवतार होगा।
इसके साथ ही, संभल अपनी ऐतिहासिक ’24 कोसीय परिक्रमा’ के लिए भी प्रसिद्ध है। 68 तीर्थों और 19 कूपों से होकर गुजरने वाले इस परिक्रमा मार्ग को 303 करोड़ रुपये की लागत से एक नया स्वरूप दिया जा रहा है। इस मार्ग पर चौड़ी सड़कें, बेहतर सुविधाएं और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को सुखद अनुभव मिल सके।
‘हॉर्न और बोन क्राफ्ट’ की वैश्विक उड़ान
संभल केवल आस्था के लिए ही नहीं, बल्कि अपने अनूठे हुनर के लिए भी दुनिया भर में जाना जाता है। यहाँ की ‘हॉर्न और बोन क्राफ्ट’ (Horn and Bone Craft) यानी सींग और हड्डी से बनी कलाकृतियां ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) और जीआई टैग (GI Tag) प्राप्त कर चुकी हैं।
इस उद्योग से जुड़े लगभग 25,000 कारीगर अपनी पारंपरिक कला को एक नया आयाम दे रहे हैं। यहाँ बने सजावटी सामान, बटन और आभूषण अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी और सिंगापुर जैसे देशों में निर्यात किए जा रहे हैं। सरकारी प्रयासों और स्किल डेवलपमेंट (Skill Development) कार्यक्रमों के जरिए इस कला को और परिष्कृत किया जा रहा है।
विकास की नई लाइफलाइन
संभल में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए बड़े पैमाने पर काम हो रहा है। गंगा एक्सप्रेसवे और अन्य राजमार्ग परियोजनाओं के कारण अब संभल को दिल्ली और लखनऊ जैसे प्रमुख शहरों से बेहतर तरीके से जोड़ा जा रहा है।
जिले के प्रशासनिक और पुलिस ढांचे को भी मजबूत किया जा रहा है। ₹288 करोड़ की लागत से नई पुलिस लाइन बनाई जा रही है, जो आधुनिक सुविधाओं से लैस होगी।
पीएम श्री स्कूल की पहल
संभल में शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए 14 ‘पीएम श्री विद्यालयों’ को विकसित किया जा रहा है। यहाँ का प्राथमिक लक्ष्य बुनियादी शिक्षा (Basic Education) को मजबूत करना है। इन स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं के साथ निजी स्कूलों से बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि ग्रामीण बच्चों को भी उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा मिल सके।
संभल आज एक ऐसा जिला बन चुका है जहाँ ‘आस्था, हुनर और आधुनिक विकास’ एक साथ कदम मिला रहे हैं। कल्कि धाम की दिव्यता और पारंपरिक क्राफ्ट की वैश्विक मांग ने संभल को ‘बढ़ता उत्तर प्रदेश, दौड़ता भारत’ की थीम में पूरी तरह से फिट कर दिया है।












