नई दिल्ली। केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय 19 जून 2026 को उत्तर प्रदेश के आगरा में “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” विषय के अंतर्गत पहला ब्रिक्स एमएसएमई फोरम और तीसरी एसएमई कार्य समूह बैठक आयोजित करेगा। इस आयोजन में ब्रिक्स देशों और सहयोगी देशों के नीति निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, उद्यमी और अन्य प्रमुख हितधारक भाग लेकर भविष्य के लिए तैयार एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण पर विचार-विमर्श करेंगे।
ब्रिक्स और सहयोगी देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल
पहले ब्रिक्स एमएसएमई फोरम में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात, बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान, वियतनाम और भारत सहित कई देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। फोरम का उद्देश्य वैश्विक एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना, स्थिरता को बढ़ावा देना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा देना है।
भारत का एमएसएमई क्षेत्र अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार
भारत का एमएसएमई क्षेत्र देश की आर्थिक प्रगति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है। 86 लाख से अधिक उद्यमों वाला यह क्षेत्र राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 31.1% से अधिक योगदान देता है। इसके अलावा विनिर्माण उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 35.4% है, जबकि भारत के कुल निर्यात में इसका योगदान 48.58% से अधिक है। यह क्षेत्र देशभर में करोड़ों लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराता है।
प्रदर्शनी और कार्य समूह बैठक होगी आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम की शुरुआत एमएसएमई क्षेत्र की उपलब्धियों और नवाचारों को प्रदर्शित करने वाली प्रदर्शनी के उद्घाटन के साथ होगी। इसके बाद ब्रिक्स सदस्य देशों की तीसरी एसएमई कार्य समूह बैठक आयोजित की जाएगी, जिसका विषय “एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण – सतत जड़ों से वैश्विक मार्गों तक” रखा गया है।
वित्त, तकनीक और स्थिरता पर होगा मंथन
फोरम के दौरान ब्रिक्स देशों के उद्योग संगठनों और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि ‘एमएसएमई के लिए वित्त तक पहुंच’, ‘एमएसएमई के लिए प्रौद्योगिकी तक पहुंच’ और ‘स्थिरता उन्मुख एमएसएमई के विकास’ जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करेंगे। इसमें विभिन्न देशों के अनुभव, नीतिगत पहल और सफल मॉडल साझा किए जाएंगे।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मिलेगी मदद
फोरम में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधि भविष्य के लिए तैयार एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं, नीतिगत अनुभवों और सफल केस स्टडी का आदान-प्रदान करेंगे। इससे ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को और मजबूती मिलने के साथ-साथ एमएसएमई क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
नवाचार और सतत विकास को मिलेगा बढ़ावा
एमएसएमई मंत्रालय के अनुसार यह फोरम सहभागी देशों को नए अवसरों की पहचान करने, ज्ञान साझा करने और ऐसी साझेदारियां विकसित करने का मंच प्रदान करेगा, जो समावेशी और सतत आर्थिक विकास को गति दें। ब्रिक्स एमएसएमई फोरम इस बात का भी प्रतीक है कि सदस्य देश एमएसएमई को आर्थिक लचीलापन, नवाचार और सतत विकास के प्रमुख चालक के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।










