नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को मैसूर में स्वामी विवेकानंद कल्चरल यूथ सेंटर – विवेका स्मारक का उद्घाटन किया. इस अवसर पर पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की नई यात्रा पर तेजी से आगे बढ़ रहा है, वो भी भारत के युवाओं के सामर्थ्य की वजह से है. आज भारत की अर्थव्यवस्था सबसे तेज गति से आगे बढ़ रही है. ये सब भारत के युवाओं के सामर्थ्य की वजह से ही हो रहा है.
उन्होंने कहा कि आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है, वो भी भारत के युवाओं के सामर्थ्य से. आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाईल फोन निर्माता बन चुका है, वो भी भारत के युवाओं के सामर्थ्य से.
पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत में बने digital solutions दुनिया के अनेक देशों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं, वो भी भारत के युवाओं के सामर्थ्य से. उस दौर से लेकर आज तक भारत के युवा ने एक लंबी यात्रा तय की है.
आज का युवा दुनिया के विकास को गति दे रहा
उन्होंने कहा कि भारत का जो युवा कभी जंजीरों में था, आज वो युवा दुनिया के विकास को गति दे रहा है. स्वामी विवेकानंद जी युवाओं की शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का मजबूत आधार मानते थे. उन्होंने ये देखा था कि कैसे दुनिया के देश अपने युवाओं को शिक्षित बना रहे हैं, लेकिन दुर्भाग्य से तब भारत गुलाम था. भारत के युवा भी गुलामी की जंजीरो में जकड़े हुए थे.
उन्होंने कहा कि करीब 130 वर्ष पहले स्वामी विवेकानंद एक युवा सन्यासी के रूप में भ्रमण करते हुए मैसूर आए थे तब उनकी प्रसिद्धि वैसी नहीं थी लेकिन विचार उतने ही ऊंचे थे. उनमें से एक प्रमुख नाम मैसूर के तत्कालीन महाराजा का भी था. जब स्वामी विवेकानंद अमेरिका में थे तब उन्होंने वहां से मैसूर के तत्कालीन महाराजा को एक पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने स्वयं महाराजा के सहयोग का उल्लेख किया था. स्वामी विवेकानंद ने शास्त्रों को आत्मसात किया था जो कहते हैं कि वास्तव में वही जीता है जो दूसरों के लिए जीता है.
पीएम मोदी ने कहा कि श्री रामकृष्ण आश्रम और स्वामी विवेकानंद की स्मृतियां भी मैसूर की विरासत का एक समृद्ध हिस्सा हैं.. स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक युवा केंद्र यानी ‘विवेक स्मारक’ के उद्घाटन के जरिए हम इस मिशन को एक नया विस्तार दे रहे हैं इसके लिए मैं श्री रामकृष्ण आश्रम और इससे जुड़े सभी विद्वानों को हार्दिक बधाई देता हूं.
स्वामी विवेकानंद को लेकर पीएम ने कही ये बात
पीएम मोदी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी की प्रेरणा थी शिव ज्ञाने, जीव सेवा, यानी जीव की सेवा ही शिव की सेवा है हमें इस स्मारक में ऐसे युवाओं को घड़ना है, जिनके लिए समाज और राष्ट्र के हित, गरीब और वंचित के दुःख आने सुख-दुःख से ऊपर हो. जिन युवाओं के लिए राष्ट्र प्रथम ही सर्वोपरि मंत्र हो, मां भारती की सेवा ही जिनका जीवन लक्ष्य हो.
पीएम मोदी ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ से जुड़ी सेवाएं हों या प्राकृतिक आपदा में राहत कार्य, श्री रामकृष्ण आश्रम ने स्वामी विवेकानंद जी की विरासत को जीवंत रखा है. मुझे विश्वास है कि विवेका स्मारक साधकों और श्रद्दालुओं के लिए आत्मिक उत्थान के एक तीर्थ बनेगा.
उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी ने भारतीय चेतना को आत्मसात किया था. उन्होंने शास्त्रों को आत्मसात किया था, जो कहते हैं कि वास्तव में वही जीता है, जो दूसरों के लिए जीता है. जब स्वामी विवेकानंद जी अमेरिका में थे, तब उन्होंने वहां से मैसूरु के महाराजा को एक पत्र लिखा था, उसमें उन्होंने स्वयं महाराजा के सहयोग का उल्लेख किया था. व्यक्ति से विभूति का निर्माण एकाएक नहीं होता.
स्वामी विवेकानंद के जीवन में मैसूरु का अहम योगदान
उन्होंने कहा कि इसके लिए हमें जीवन की अनगिनत परीक्षाएं देनी होती है, साधनाएं करनी होती हैं, तप करना होता है, खुद को तपाना और खपाना पड़ता है. ख्याति के बाद तो संसार पीछे खड़ा होता है, लेकिन तप के समय महान विभूतियों को पहचानना आसान नहीं होता, जो साधक को तपस्या में पहचानता है, वो उसकी सिद्धि का सहभागी भी होता है.
उन्होंने कहा कि इसलिए भाई-बहनों स्वामी विवेकानंद जी के जीवन में मैसूरु का इतना अहम योगदान था. करीब 130 वर्ष पहले स्वामी जी एक युवा सन्यासी के रूप में भ्रमण करते हुए यहां आए थे. तब उनकी प्रसिद्धि वैसी नहीं थी, लेकिन विचार उतने ही ऊंचे थे. उस समय उन्हें जिन लोगों ने पहचाना, जो उनके साथ जुड़े उनमें से एक प्रमुख मैसूर के तत्कालीन महाराजा का भी था.












