नई दिल्ली। अमेरिका की मेजबानी में हुई एक मंत्री-स्तरीय बैठक में भारतीय राजदूत विनय क्वात्रा ने 67 देशों के सामने आंखों में आखें डालकर इस्लामी और दक्षिणपंथी चरमपंथ का मुद्दा उठाया लेकिन अमेरिका लेकिन अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अलग ही राह पकड़ ली। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अति-वामपंथी चरमपंथ और राजनीतिक आतंकवाद पर ज्यादा जोर दिया। उन्होंने इसके खिलाफ सभी देशों को एकजुट होने की अपील की। रूबियो ने कहा कि आज के अति-वामपंथी आतंकवादी एक देश में पैसा जुटा सकते हैं; दूसरे देश में अपना कम्युनिकेशन सिस्टम रख सकते हैं।
तीसरे देश में ट्रेनिंग ले सकते हैं और चौथे देश में लड़ाकों को भर्ती कर सकते हैं। और फिर मिलकर पांचवें देश में किसी टारगेट पर हमला कर सकते हैं। इसलिए, हमारे पास इस खतरे का मिलकर सामना करने के अलावा कोई चारा नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि देशों को सीमाओं के पार सहयोग करना होगा, वरना आतंकवादी उनके बीच की कमियों का फायदा उठाते रहेंगे।
भारतीय राजदूत ने दमदार तरीके से रखी अपनी आवाज
भारतीय राजदूत विनय क्वात्रा ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद पर उन्होंने कहा कि यह शांति और सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है और आतंकवादी कृत्यों के अपराधियों को जवाबदेह ठहराने की आवश्यकता पर जोर दिया। क्वात्रा ने आगे कहा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सीमा पार आतंकवाद और अलगाववादी एजेंडा का समर्थन करने वाले समूहों सहित आतंकवाद के सभी रूपों के प्रति जीरो टोलेरेंस अपनाने की जरूरत पर जोर दिया है।
रुबियो बोले- जिहादी आतंकवाद का खतरा भारत पर ज्यादा
मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका और यूरोप द्वारा अपनाई गई सफल आतंकवाद-विरोधी रणनीतियों के कारण जिहादी आतंकवाद का खतरा कम हो गया है। हालांकि, भारत के लिए जिहादी खतरा उतना ही गंभीर बना हुआ है जितना एक दशक पहले था, जैसा कि 2025 के पहलगाम आतंकी हमले से साफ है। रुबियो ने कहा कि जिहादी खतरा तब तक पूरी तरह खत्म नहीं होगा जब तक हम ऐसे इमिग्रेशन सिस्टम को बर्दाश्त करते रहेंगे जो इन खतरों को सीधे हमारे देशों में लाते हैं। लेकिन यह खतरा काफी कम हो गया है।












