नई दिल्ली। आज की Gen Z कम उम्र में घर खरीदने और होम लोन लेने की तरफ तेजी से बढ़ रही है। लेकिन एक्सपर्ट का मानना है कि बिना सही फाइनेंशियल प्लानिंग के भारी EMI फ्यूचर में फाइनेंशियल प्रेशर और स्ट्रेस बढ़ा सकती है। घर खरीदने से पहले ज्यादा सेविंग, इमरजेंसी फंड और लॉन्ग टर्म प्लानिंग बेहद जरूरी है।
घर खरीदना एक बड़ा फाइनेंशियल डिसीजन है। डाउनपेमेंट, ईएमआई और इंटरेस्ट रेट आदि को समझे बिना घर में पैसे लगाने से कोई भी मुसीबत में फंस सकता है। ऐसी गलती Gen Z कर रहे हैं। यह वर्ग प्रॉपर लॉन्ग टर्म प्लानिंग किए बिना घर खरीद रहा है और इसे स्मार्ट इन्वेस्टमेंट समझ रहा है। एक्सपर्ट का मानना है कि ऐसी जल्दबाजी आपके लिए एक सीरियस फाइनेंशियल बर्डन बन सकती है।
BASIC Home Loan के एक सर्वे के अनुसार, यह वर्ग भारत में कुल रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी खरीद का लगभग 90-95% हिस्सा बन चुके हैं। बेसिक होम लोन्स के सर्वे के मुताबिक, होम लोन लेने वालों की औसत उम्र 35 साल से घटकर 25 साल हो गई है। डिजिटल लेंडिंग ऐप्स ने लोन अप्रूवल को इतना आसान बना दिया है कि लगभग 80% ऑनलाइन लोन अप्रूवल 30 साल से कम उम्र के लोगों को मिल रहे हैं।
अनुराग मेहरा, डायरेक्टर, एक्सपर्ट पैनल के अनुसार, युवा वर्ग बिना पूरी फाइनेंशियल प्लानिंग के जल्दी घर खरीद रहा है। लॉन्ग टर्म के लिए ईएमआई का बोझ सेविंग, फ्यूचर की जरूरतों, करियर बदलने की फ्रीडम और फाइनेंशियल सेफ्टी पर असर डाल सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कम उम्र में होम लोन लेना Gen Z के लिए एक वित्तीय जाल बनता जा रहा है? चलिए इसे सरल तरीके से समझते हैं।
जल्दी घर क्यों खरीदना चाहते हैं Gen Z
- आज की यंग जनरेशन को लगता है कि फ्यूचर में घरों की कीमतें और ज्यादा बढ़ जाएंगी। इसी वजह से दिल्ली-एनसीआर, पुणे, नोएडा और बेंगलुरु जैसे शहरों में लोग जल्दी घर खरीदने की कोशिश कर रहे हैं।
- अब बैंक और फाइनेंस कंपनियां कम डाउन पेमेंट और आसान EMI पर जल्दी लोन दे रही हैं। कई युवा सिर्फ EMI देखकर घर खरीद रहे हैं, बिना लॉन्ग टर्म फाइनेंशियल प्लानिंग के।
- सोशल मीडिया पर घर खरीदना सफलता और अच्छी लाइफस्टाइल की निशानी दिखाया जाता है। इससे युवा जल्दी घर खरीदने का दबाव महसूस करते हैं, भले ही उनकी सेविंग्स मजबूत न हों।
- कोरोना के बाद लोगों की जरूरतें बदल गई हैं। अब युवा बड़े घर, ज्यादा फैसिलिटी, गेटेड सोसाइटी और होम ऑफिस जैसी चीजों को प्रायोरिटी दे रहे हैं, जिससे घरों की डिमांड बढ़ी है।
सैलरी और EMI का गणित समझें
एक्सपर्ट के अनुसार, एक यंग प्रोफेशनल जिसने हाल ही में नौकरी शुरू की है, हर महीने 25 से 40 हजार रुपये के बीच कमाता है। इस सैलरी के साथ अगर शहर के बाहरी इलाके में 40 लाख रुपये का 1BHK फ्लैट देखा जाए, तो लगभग 20% डाउन पेमेंट यानी 8 लाख रुपये की जरूरत पड़ती है और बाकी 32 लाख रुपये का होम लोन। अगर लोन 9% ब्याज दर पर 20 साल के लिए लिया जाए, तो मंथली EMI लगभग 29000 रुपये बैठती है। यानी 40000 रुपये कमाने वाले व्यक्ति की करीब 72% आय सिर्फ ईएमआई में चली जाती है।
कहां शुरू होती है प्रॉब्लम
एक्सपर्ट EMI को सैलरी का 30-40% तक सीमित रखने की सलाह देते हैं। ईएमआई भरने के बाद किराया, खाने-पीने, ट्रांसपोर्ट या बचत जैसी जरूरतों के लिए बहुत कम पैसा बचता है। अगर किसी कपल की मिलाकर इनकम 80000 रुपये हो, तब भी 48 लाख रुपये का लोन उनकी कमाई का लगभग आधा हिस्सा खा जाता है।
रिपोर्ट बताती हैं कि लगभग 69% युवाओं के पास इमरजेंसी कंडीशन के लिए पर्याप्त सेविंग नहीं है। ज्यादातर के पास सिर्फ 3 से 6 महीने का फंड होता है, जो मेडिकल इमरजेंसी या नौकरी जाने जैसी कंडीशन में तुरंत खत्म हो सकता है। करीब 79% युवा अपनी आय का 20% से भी कम बचाते हैं, जबकि 72-78% लोग हेल्थ या लाइफ इंश्योरेंस तक नहीं लेते।
रियल इंसिडेंट से मिल सकता है बड़ा सबक
एक्सपर्ट ने बताया कि कई ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं, जहां होम लोन का दबाव युवाओं पर भारी पड़ा। गाजियाबाद के एक टेक प्रोफेशनल की कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी, जो 1.4 करोड़ रुपये के फ्लैट पर 95000 रुपये की ईएमआई चुका रहे थे। अच्छी सैलरी होने के बावजूद नौकरी जाने के बाद उन्हें खर्च चलाने के लिए बाइक टैक्सी तक चलानी पड़ी। इसका मतलब यह है कि कई बार हाई सैलरी के सहारे लिया गया बड़ा लोन उस समय चुकाना भारी हो जाता है, जब नौकरी पर संकट आ जाए।
होम लोन से पहले फाइनेंसियल प्लानिंग बहुत जरूरी
एक्सपर्ट ने बताया कि इसका मतलब यह नहीं कि युवाओं को घर नहीं खरीदना चाहिए। इसका मतलब सिर्फ इतना है कि सही समय और सही तैयारी बेहद जरूरी है। सबसे पहले आय में स्थिरता होनी चाहिए, जबकि करियर के शुरुआती वर्षों में यह चीज सबसे कम होती है।
घर खरीदने से पहले किन बातों का रखें ध्यान
- बचत पर ज्यादा जोर दें- एक्सपर्ट के अनुसार, होम लोन जैसा बड़ा फाइनेंशियल डिसीजन लेने से पहले आपको कम से कम 6 महीने का इमरजेंसी फंड बनाना जरूरी है, ताकि अगर बाद में नौकरी चली जाए तो कुछ महीनों तक ईएमआई भरने का रिस्क न रहे।
- बड़ी डाउन पेमेंट- एक्सपर्ट का सुझाव है कि आप किसी भी लोन को बहुत ज्यादा लंबा न रखें, इसलिए आपके पास डाउन पेमेंट करने का बड़ा ऑप्शन होना चाहिए। यह रकम जितनी ज्यादा होगी ईएमआई उतनी ही कम होगी।
- एक साथ दो बड़े लोन से बचें- अगर आपके पास पहले से कोई बड़ा लोन है, तो आप दूसरा लोन लेने की गलती न करें। इससे आपका सारा पैसा लोन की ईएमआई भरने में जा सकता है। इसके अलावा इनकम के दूसरे सोर्स देखें ताकि ईएमआई का बोझ कम हो सके।
- पूरी प्लानिंग से करें फैसला- सिर्फ इसलिए घर खरीदना कि दोस्तों ने खरीद लिया है, कीमतें बढ़ रही हैं या सोशल मीडिया पर दबाव है, आगे चलकर आर्थिक परेशानी बन सकता है। घर खरीदने से पहले अपनी जरूरत, फाइनेंशियल तैयारी और लॉन्ग टर्म बजट पर जरूर ध्यान दें।










