नई दिल्ली। देश में तेजी से बढ़ रहे साइबर फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) और RBI Innovation Hub (RBIH) ने मिलकर एक अहम समझौता किया है। इसका मकसद बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित बनाना है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि सरकार “साइबर सिक्योर भारत” बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। X (Twitter) में उन्होंने कहा कि म्यूल अकाउंट्स साइबर क्राइम से निपटने में एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं और कहा कि यह पार्टनरशिप ऐसे अकाउंट्स का तेजी से पता लगाने और उन्हें खत्म करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करेगी।
क्या है म्यूल अकाउंट्स?
म्यूल अकाउंट्स वह बैंक अकाउंट होता है जिसका इस्तेमाल साइबर ठग चोरी या फ्रॉड के पैसे को इधर-उधर ट्रांसफर करने के लिए करते हैं। लोग कई बार लालच या जानकारी की कमी में अपना अकाउंट दूसरों को इस्तेमाल करने देते हैं।
साइबर ठगी में म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल कैसे होता है?
पहले साइबर अपराधी ठगी से मिले पैसे म्यूल अकाउंट्स में भेजते हैं और फिर उन्हें कई खातों में घुमाते हैं। इससे असली आरोपी तक पहुंचना और पैसों का ट्रैक करना काफी मुश्किल हो जाता है।
सरकार का नया प्लान क्या है?
सरकार ने साइबर ठगी रोकने के लिए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) और रिज़र्व बैंक इनोवेशन हब (RBIH) के बीच एक MoU किया है। इसके तहत I4C संदिग्ध म्यूल अकाउंट्स से जुड़ी जानकारी बैंकों और AI-आधारित फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम के साथ शेयर करेगा, ताकि फर्जी खातों और संदिग्ध ट्रांजैक्शन की जल्दी पहचान हो सके।
AI कैसे मदद करेगा?
AI-आधारित सिस्टम संदिग्ध ट्रांजैक्शन पैटर्न, अचानक बढ़े लेनदेन और फर्जी खातों की गतिविधियों को रियल-टाइम में पहचान सकेगा। MuleHunter.ai™ जैसे टूल्स इन डेटा का विश्लेषण करके फ्रॉड होने से पहले अलर्ट देंगे।
जनसत्ता के सहयोगी द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, अधिकारियों ने कहा कि AI टूल्स के साथ रियल-टाइम इंटेलिजेंस के इंटीग्रेशन से अर्ली वॉर्निंग सिस्टम में काफ़ी सुधार होने और फाइनेंशियल फ्रॉड से होने वाले नुकसान कम होने की उम्मीद है। इस कदम का मकसद भारत के तेज़ी से बढ़ते डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में भरोसा मजबूत करना भी है।
I4C क्या है?
I4C भारत के साइबरक्राइम रिस्पॉन्स आर्किटेक्चर में सबसे आगे रहा है, जो नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) जैसे प्लेटफॉर्म ऑपरेट करता है और सस्पेक्ट रजिस्ट्री जैसे डेटाबेस को मेंटेन करता है। इस बीच, RBIH, जो भारतीय रिजर्व बैंक की पूरी तरह से मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी है, फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी, खासकर AI-बेस्ड फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम में इनोवेशन को बढ़ावा दे रही है।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
इस पहल से ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट पहले से ज्यादा सुरक्षित हो सकते हैं। फर्जी बैंक खातों और संदिग्ध ट्रांजैक्शन की जल्दी पहचान होने से साइबर ठगी के मामलों में कमी आने की उम्मीद है। अगर किसी अकाउंट में धोखाधड़ी जैसी गतिविधि दिखती है, तो उस पर तेजी से कार्रवाई हो सकेगी।
भारत के स्पेस सेक्टर ने सोमवार को एक नई उपलब्धि अपने नाम कर ली। IIT मद्रास के पूर्व छात्रों द्वारा शुरू किए गए भारतीय स्पेस-टेक स्टार्टअप GalaxEye ने अपना पहला सैटेलाइट ‘Drishti’ सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह दुनिया का पहला ऐसा सैटेलाइट बताया जा रहा है, जो ऑप्टिकल और रडार इमेजिंग को एक साथ करने में सक्षम है।










