नई दिल्ली। दिल्ली में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू ने शुक्रवार को उत्तर जिला के सब्जी मंडी क्षेत्र में दिल्ली पुलिस के पहले महिला थाने का उद्घाटन किया. इस मौके पर दिल्ली पुलिस आयुक्त सतीश गोलचा सहित कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहे. यह महिला थाना पूरे उत्तर जिला में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों की जांच और शिकायतों के निस्तारण के लिए काम करेगा.
25 मई 2026 को जारी अधिसूचना के बाद यह थाना 19 जून से पूरी तरह कार्यरत हो गया है. उत्तर जिला का क्राइम अगेंस्ट वूमेन सेल भी अब इसी थाने में शामिल कर दिया गया है. उपराज्यपाल ने कहा कि यह सिर्फ एक पुलिस थाना नहीं बल्कि महिलाओं और बच्चियों के लिए भरोसे और सुरक्षा का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि इस थाने की सफलता केवल दर्ज मामलों की संख्या से नहीं बल्कि महिलाओं और लड़कियों के मन में पैदा होने वाले विश्वास से मापी जाएगी.
जानें किन मामलों की होगी जांच
उन्होंने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी हमारी जिम्मेदारी है. अगर कहीं महिलाओं या बच्चियों के साथ अन्याय होता दिखे तो लोगों को आगे आकर आवाज उठानी चाहिए और पुलिस को सूचना देनी चाहिए. यह थाना घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़, पीछा करने, रेप और पॉक्सो समेत महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले सभी गंभीर अपराधों की जांच करेगा.
दिल्ली पुलिस के चार प्रमुख स्तंभ
थाने में महिलाओं और बच्चों के लिए अनुकूल माहौल बनाया गया है, जहां पीड़िताएं बिना झिझक अपनी बात रख सकें. दिल्ली पुलिस आयुक्त सतीश गोलचा ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस चार प्रमुख स्तंभों रोकथाम, संरक्षण, त्वरित जांच और जनभागीदारी पर काम कर रही है. उन्होंने बताया कि दिल्ली में 116 पिंक बूथ संचालित हैं, ऑल-वूमेन पीसीआर वैन तैनात हैं और अब तक 30 लाख से अधिक महिलाओं एवं लड़कियों को आत्मरक्षा प्रशिक्षण दिया जा चुका है.
स्पेशल सीपी देवेश श्रीवास्तव ने क्या कहा?
कार्यक्रम में स्पेशल सीपी देवेश श्रीवास्तव ने उत्तर जिला की महिला सुरक्षा संबंधी पहलों जैसे पिंक बूथ, रानी झांसी स्क्वॉड और वामिका पेट्रोलिंग वाहन का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि महिला थाना महिलाओं को चौबीसों घंटे सहायता और न्याय उपलब्ध कराने का केंद्र बनेगा. समारोह में आरडब्ल्यूए प्रतिनिधि, महिला संगठनों की सदस्याएं, स्थानीय नागरिक और दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे. अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि यह महिला थाना दिल्ली में जेंडर-संवेदनशील और पीड़ित केंद्रित पुलिसिंग का नया मॉडल बनेगा.










