नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत आठ लोगों के खिलाफ दाखिल आपराधिक शिकायत की पुनरीक्षण याचिका को प्रयागराज के अपर जिला एवं प्रभारी सत्र न्यायाधीश/अपर सत्र न्यायाधीश जयेंद्र कुमार की अदालत ने खारिज कर दिया है। अदालत ने आपराधिक प्रक्रिया का आधारभूत तथ्य न पाए जाने और आपराधिक न्याय प्रक्रिया के अनावश्यक इस्तेमाल को देखते हुए पुनरीक्षणकर्ता पर 50 हजार रुपये का अनुकरणीय हर्जाना भी लगाया है।
अदालत ने यह धनराशि 30 दिन के भीतर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, प्रयागराज में जमा करने का निर्देश दिया है। यह आदेश कोर्ट ने राज्य की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) मनोज कुमार पांडे एवं पुनरीक्षणकर्ता राकेश नाथ पांडेय अधिवक्ता के तर्कों को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध सामग्री को देखने के बाद दिया।
एसीजेएम कोर्ट से भी खारिज हुई थी याचिका
मामला अधिवक्ता राकेश नाथ पांडेय की ओर से प्रस्तुत आपराधिक शिकायत से संबंधित था। शिकायत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार सहित अन्य को प्रतिवादी बनाया गया था। शिकायत को एसीजेएम कोर्ट एमपी/एमएलए ने 29 जून 2026 को खारिज कर दिया था। इसके विरुद्ध आपराधिक पुनरीक्षण दाखिल की गई थी।
राजनीतिक असहमति पर अदालत की टिप्पणी
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि शिकायत की सामग्री से किसी विशिष्ट आपराधिक अपराध का होना सामने नहीं आता। संवैधानिक शपथ के कथित उल्लंघन को मात्र आरोपित करने से अपने आप कोई दंडनीय अपराध स्थापित नहीं होता। अदालत ने यह भी कहा कि राजनीतिक या संवैधानिक असहमति के आधार पर आपराधिक कानून को प्रक्रिया में नहीं लाया जा सकता। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि निराधार कार्यवाही को न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग में बदलने की अनुमति नहीं दी जा सकती और उपयुक्त मामलों में वास्तविक लागत लगाई जा सकती है।
50 हजार की कॉस्ट पर विशेष जोर
आदेश के अंतिम हिस्से में अदालत ने स्पष्ट किया कि 50 हजार रुपये की कॉस्ट पुनरीक्षणकर्ता के राजनीतिक, धार्मिक अथवा संवैधानिक विचारों के कारण नहीं लगाई गई है, बल्कि इस कारण लगाई गई है कि आपराधिक प्रक्रिया का इस्तेमाल उस तरीके से किया गया जिसमें किसी कानूनी रूप से टिकाऊ आपराधिक अपराध के आवश्यक तत्वों का खुलासा नहीं हुआ और उसके बाद उसी कार्यवाही को पुनरीक्षण में आगे बढ़ाया गया। अदालत ने इस राशि को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में कानूनी सहायता सेवाओं के लिए जमा करने का निर्देश दिया है।












