नई दिल्ली। वे हाथ जो बच्चों को उंगली पकड़कर चलना सिखाते हैं, कई बार बुढ़ापे में उन कांपते हाथों को सहारा देने वाला कोई नहीं होता। किसी को घर से निकाल दिया जाता है, किसी की पेंशन पर कब्जा कर लिया जाता है तो कोई ठगी का शिकार बन जाता है। ऐसे में बुजुर्ग कहां और कैसे मदद मांगें, एक्सपर्ट्स से बात कर जानकारी दे रहे है वरुण आनंद…
केस से समझें
यह कहानी है 70 साल की कौशल्या रानी (बदला हुआ नाम) की। उन्होंने यह सोचकर अपनी सारी प्रॉपर्टी बेटे के नाम कर दी कि अब उनकी उम्र हो बली है। लेकिन प्रॉपर्टी हाथ में आते ही बेटे-बहू के तेवर बदल गए। जब प्रताड़ना हद से बढ़ गई, तब कुछ पड़ोसियों और दूर के रिश्तेदारों की सलाह पर उन्होंने कानून का दरवाजा खटखटाया और महज कुछ ही महीनों में अपनी प्रॉपर्टी वापस पा ली।
देश में न जाने कितनी कौशल्या रानी और उनके जैसे बुजुर्ग ऐसे हालात झेल रहे है। वे परिवार की बदनामी न हो इसलिए चुप रहते हैं, लेकिन बुजुर्गों को प्रताड़ना से बचाने के लिए कानून में उन्हें कई अधिकार दिए गए है।
जब बाहरी करें परेशान
आज जब रोटी कमाने के लिए इंसान को अपना घर, गांव, शहर छोड़कर दूसरी जगह जाना पड़ रहा है, तो कई घरों में बुजुर्ग पीछे छूट जाते हैं। इस उम्र में न तो बेटा-बेटी उनके साथ होते हैं और न ही कोई भरोसेमंद शख्स। उनके इसी अकेलेपन का फायदा उठाकर उन्हें कोई परेशान कर सकता है। बुजुर्गों को परेशान करने वाले इन बाहरी लोगों में पड़ोसी, किरायेदार, दुकानदार, झाड़-फूंक के नाम पर ठगने वाले तांत्रिक, फर्जी फोन कॉल करने वाले ठग और प्रॉपर्टी पर नजर गड़ाए बैठे दूर के शिलेदार तक शामिल हो सकते है।
ऐसे तरीको से नुकसान पहुंचाते है बुजुर्गों को
- फोन पर KYC अपडेट या बैंक अकाउंट बंद होने का डर दिखाकर OTP और पैसे ठगना
- किसी फोटो या डॉक्यूमेंट के आधार पर ब्लैकमेल करके डिजिटल अरेस्ट करना
- लॉटरी जीतने का झांसा देकर प्रोसेसिंग फीस के नाम पर रकम उड़ाना
- सस्ती दवाई, जड़ी-बूटी या चमत्कारी इलाज के नाम पर ठगी
- प्रॉपर्टी के कागज पर धोखे से या जबरदस्ती दस्तखत करवाना
घर के सामने हंगामा करके डराना-धमकाना
बुजुर्ग सबसे ज्यादा साइबर ठगी का शिकार होते हैं। सबसे ज्यादा वे बुजुर्ग ठगे जाते है है जो अकेले रहते है। सबसे जरूरी है कि किसी भी बाहरी शख्त पर पहली नजर में भरोसा न करें, चाहे वह आपको किसी सरकारी योजना का लाभ देने की ही बात क्यों न कर रहा हो। अगर ऐसा लग रहा है कि कोई हमे नुकसान पहुंचा सकत है या ब्लैकमेल कर सकता है तो आगे बताए कदम उत्ताए।
अपने करीबी को बताएं
रिश्तेदार या परिचित को तुरंत बताएं। कोई भी डॉक्यूमेंट, बैंक OTP या कैश बिना जांचे किसी को न दे। फोन पर आई किसी भी सरकारी स्कीम या इनाम की जानकारी को पहले परिवार से शेयर करें।
साइबर ठगी की शिकायत दे
1930 पर कॉल: किसी भी तरह की साइबर ठगी में तुरंत 1930 पर कॉल करें। यह राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन है जो 24 घंटे काम करती है। इसके अलावा cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं। जितनी जल्दी शिकायत होगी, ठगे गए पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी ज्यादा होगी।
दबंग सताए तो डरें नहीं
112 नंबर पर कॉल: कई बार पढ़ोसी या दबंग लोग बुजुर्गों की जमीन पर कब्ब्ड करने, सस्ता रोकने, प्रॉपर्टी को लेकर झगड़ा करने या उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश करते है। अकेले रहने वाले कुजुर्यो को पड़ोस के कुछ लोग मानसिक रूप से परेशान कर सकते है, उनसे बदसलूकी कर सकते है का उनकी असहाय स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते है। उनसे डरे नहीं।
ऐसे निपटें दबंगों से
- हर जिले के थाने में वरिष्ठ नागरिक सहायता प्रकोष्ठ होता है। वहा लिखित शिकायत दें। गभीर मामले में FIR भी दर्ज हो सकती है।
- कानून देता है सम्मान के साथ जीने का अधिकार भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत धोखाधड़ी, हराना-धमकाना, मारपीट और संपत्ति हडपने जैसे अपराधी के लिए पुलिस में FIR दर्ज करा सकते है।
- भारत के संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को चाहे वह किसी भी उम्र का हो सम्मान के साथ जीने का अधिकार देता है।
- हमेशा रखें ध्यानः सरकार और आरबीआई (RBI) के मुताबिक, कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या विडियो कॉल पर किसी को अरेस्ट नहीं करती और न ही डिजिटल अरेस्ट करते हैं।










