नई दिल्ली। भारत और इस्राइल के बीच मित्रता के संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। मुंबई स्थित इस्राइली महावाणिज्य दूतावास ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर इस्राइल में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्थापित करने की पहल के लिए समर्थन और सहयोग मांगा है।
महावाणिज्य दूतावास के दूत यानिव रेवाच ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस्राइल की ऐतिहासिक यात्रा के बाद हमारी सरकार ने दोनों देशों के लोगों को करीब लाने के विशेष प्रयास करने का निर्णय लिया है।
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शिवाजी महाराज आज भी पीढ़ियों को करते हैं प्रेरित : महावाणिज्य दूत यानिव रेवाच
रेवाच ने कहा कि मुंबई आने के बाद उन्होंने मराठा साम्राज्य के इतिहास का अध्ययन किया और पाया कि छत्रपति शिवाजी महाराज न केवल मराठा साम्राज्य के संस्थापक थे, बल्कि एक असाधारण नेता भी थे, जिनकी सुशासन, साहस, धार्मिक सहिष्णुता, नौसैनिक शक्ति और प्रजा की रक्षा की दृष्टि आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करती है।
उन्होंने कहा कि भारत में जहां भी वे जाते हैं, लोगों की आंखों में इस्राइल और उनके राष्ट्रीय नायकों के प्रति गहरा सम्मान देखते हैं। इसी भावना के तहत इस्राइल में छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में अधिक जागरूकता पैदा करने के प्रयास किए जाने चाहिए। इसी मित्रता की भावना से महावाणिज्य दूतावास ने इस्राइल में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय लिया है।
भारत और इस्राइल के संबंधों का शक्तिशाली प्रतीक होगी प्रतिमा
उनका मानना है कि इस्राइल में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा उनके देश और भारत के बीच घनिष्ठ संबंधों का एक शक्तिशाली प्रतीक होगी। यह स्मारक विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि महाराष्ट्र और भारतीय यहूदी समुदाय के बीच ऐतिहासिक संबंध रहे हैं, जिनके वंशज आज इस्राइली समाज में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
महाराष्ट्र सरकार से समर्थन और मार्गदर्शन का किया अनुरोध
रेवाच ने महाराष्ट्र सरकार से इस पहल के लिए समर्थन और मार्गदर्शन का अनुरोध किया है। वे ऐतिहासिक संदर्भों, कलात्मक परामर्श, डिजाइन संबंधी विचारों और परियोजना को सफल बनाने में सहायक किसी भी अन्य सहायता के संबंध में महाराष्ट्र सरकार के साथ सहयोग करने के अवसर का स्वागत करेंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में इसे एक जन-परियोजना बनाया जा सकता है।
उन्होंने यह भी विश्वास जताया कि यह पहल दोनों देशों के लोगों के बीच दोस्ती को और मजबूत करेगी और साहस, नेतृत्व और आपसी सम्मान के साझा मूल्यों को एक स्थायी श्रद्धांजलि के रूप में खड़ी होगी, जो महाराष्ट्र और इस्राइल दोनों की पहचान है।










