नई दिल्ली। अक्सर हम ऐसा सुनते हैं कि लोगों के मोबाइल पर एक कॉल आता है, जिसमें सामने वाला खुद को बैंक अधिकारी बताता है और KYC अपडेट करने के नाम पर आपसे कुछ जानकारी ले लेता है। कुछ ही मिनटों में आपके खाते से हजारों रुपए निकल जाते हैं।
घबराकर आप 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करते हैं और पुलिस की मदद से ठग के खाते में पहुँची रकम फ्रीज भी हो जाती है। लेकिन इसके बाद शुरू होती है लंबी प्रक्रिया। बैंक, पुलिस और कई बार अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई लोगों को महीनों तक अपने पैसे का इंतजार करना पड़ता है।
ऐसे ही लाखों साइबर ठगी पीड़ितों की परेशानी को कम करने के लिए गृह मंत्रालय के अधीन इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM) शुरू किया है।
यह राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) का नया डिजिटल मॉड्यूल है, जिसके जरिए साइबर फ्रॉड के पीड़ित घर बैठे अपनी फ्रीज हुई रकम वापस पाने के लिए आवेदन कर सकेंगे।
आखिर MRM पोर्टल की जरूरत क्यों पड़ी?
भारत में डिजिटल भुगतान तेजी से बढ़ा है। UPI, नेट बैंकिंग और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन ने लोगों की जिंदगी आसान तो बनाई है, लेकिन इसके साथ साइबर अपराधों जैसी समस्या में भी जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है।
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, 2022 में साइबर सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं की संख्या करीब 10.29 लाख थी, जो 2024 में बढ़कर 22.68 लाख तक पहुँच गई। आज साइबर ठग केवल OTP फ्रॉड तक सीमित नहीं हैं।
बल्कि डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश योजनाएँ, पार्ट-टाइम जॉब स्कैम, KYC अपडेट और फेक कस्टमर केयर जैसे कई नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि यदि किसी पीड़ित की रकम समय रहते फ्रीज भी हो जाए तो उसे वापस पाने की प्रक्रिया बेहद जटिल रहती थी। MRM इसी परेशानी को दूर करने के लिए लाया गया है।
क्या है मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM)?
मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल एक ऑनलाइन रिफंड सिस्टम है जिसे I4C ने विकसित किया है। इसका उद्देश्य साइबर ठगी के पीड़ितों को एक ऐसा प्लेटफॉर्म देना है जहाँ वे अपनी फ्रीज हुई रकम वापस पाने के लिए डिजिटल तरीके से आवेदन कर सकें।
पहले लोगों को बैंक शाखाओं, पुलिस कार्यालयों और अन्य विभागों के चक्कर लगाने पड़ते थे। कई मामलों में अदालत से आदेश लेने की जरूरत भी पड़ती थी। अब इस प्रक्रिया का बड़ा हिस्सा ऑनलाइन कर दिया गया है ताकि पीड़ितों को कम परेशानी हो और रिफंड की प्रक्रिया तेज हो सके।
MRM पोर्टल का लाभ हर साइबर ठगी पीड़ित को नहीं मिलेगा। इसके लिए दो महत्वपूर्ण शर्तें पूरी होना जरूरी हैं। पहली यह कि पीड़ित ने ठगी का पता चलते ही 1930 हेल्पलाइन या NCRP पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई हो।
दूसरी यह कि ठगी की रकम अपराधी के बैंक खाते में ट्रेस होकर फ्रीज कर दी गई हो। यदि पैसा किसी दूसरे खाते में ट्रांसफर हो चुका है या निकाल लिया गया है, तो इस मॉड्यूल के जरिए रिफंड संभव नहीं होगा। इसलिए साइबर विशेषज्ञ हमेशा सलाह देते हैं कि फ्रॉड का पता चलते ही तुरंत शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
MRM पोर्टल पर रिफंड के लिए आवेदन कैसे करें?
रिफंड पाने के लिए सबसे पहले पीड़ित को MRM पोर्टल पर जाना होगा और सिटीजन लॉगिन विकल्प पर क्लिक करना होगा। इसके बाद उसी मोबाइल नंबर से लॉगिन करना होगा जो NCRP शिकायत में दर्ज है।
OTP सत्यापन पूरा होने के बाद रिफंड का अनुरोध करें वाले सेक्शन में जाकर 14 अंकों वाली शिकायत ID दर्ज करनी होगी। इसके बाद पैन कार्ड की कॉपी, बैंक खाता संख्या और IFSC कोड जैसी जरूरी जानकारी भरनी होगी।
जिन मामलों में FIR और कोर्ट ऑर्डर की आवश्यकता है, वहाँ उनकी कॉपी भी अपलोड करनी होगी। आवेदन सबमिट करने के बाद पोर्टल एक यूनिक रिक्वेस्ट ID जारी करेगा, जिसकी शुरुआत ‘MR2026’ से होगी। इसी ID की मदद से आवेदक अपने रिफंड की स्थिति ऑनलाइन ट्रैक कर सकेगा।
संचार साथी ऐप भी कर रहा है बड़ी मदद
जहाँ MRM का उद्देश्य साइबर ठगी के बाद फंसी रकम वापस दिलाना है, वहीं सरकार का ‘संचार साथी’ प्लेटफॉर्म साइबर अपराध को रोकने और डिजिटल पहचान की सुरक्षा में मदद कर रहा है।
दूरसंचार विभाग द्वारा शुरू किए गए इस प्लेटफॉर्म के जरिए नागरिक अपना खोया या चोरी हुआ मोबाइल ब्लॉक कर सकते हैं, IMEI नंबर ट्रैक कर सकते हैं, संदिग्ध कॉल और मैसेज की शिकायत कर सकते हैं और मोबाइल की वैधता की जाँच कर सकते हैं।
सरकार के अनुसार इस पहल की मदद से लाखों संदिग्ध सिम कार्ड और IMEI नंबर ब्लॉक किए जा चुके हैं, जबकि लाखों मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं।
साइबर ठगी का शिकार होने पर क्या करें?
अगर आपके साथ साइबर ठगी होती है तो घबराने की बजाय तुरंत कार्रवाई करना सबसे जरूरी है। सबसे पहले 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या NCRP पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएँ।
अपने बैंक को तुरंत जानकारी दें ताकि ट्रांजैक्शन को ट्रैक किया जा सके। किसी अनजान व्यक्ति या एजेंट को रिफंड दिलाने के नाम पर पैसे न दें और केवल सरकारी पोर्टल का ही इस्तेमाल करें। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, रकम फ्रीज होने और वापस मिलने की संभावना उतनी ही अधिक होगी।










