नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था और सरकारी पैरवी को और अधिक मजबूत बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है. राज्य सरकार की ओर से विभिन्न न्यायालयों में मुकदमा लड़ने वाले शासकीय अधिवक्ताओं (Government Advocates) के लिए योगी सरकार ने खजाना खोल दिया है. एक दशक से भी ज्यादा समय के इंतजार को खत्म करते हुए, सरकार ने अधिवक्ताओं की रिटेनरशिप और बहस फीस में 50 प्रतिशत तक की भारी वृद्धि की है. इस फैसले के बाद राज्य के अधिवक्ता समुदाय में जश्न का माहौल है.
‘सुशासन और न्याय की जीत’
इस बंपर इज़ाफ़े के बाद राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General) और उनकी पूरी टीम ने मुख्यमंत्री के प्रति अपना हार्दिक आभार व्यक्त किया है. अधिवक्ताओं ने साफ तौर पर कहा है कि यह सिर्फ फीस बढ़ाने का मामला नहीं है, बल्कि न्यायिक व्यवस्था को अधिक सक्षम, उत्तरदायी और परिणाम देने वाला (Result-oriented) बनाने की दिशा में एक ‘गेमचेंजर’ कदम है. मुकदमों की बढ़ती संख्या और विधिक जटिलताओं के बीच इस फैसले से वकीलों का मनोबल आसमान छुएगा.
जिला कोर्ट तक पहुंचेगा फायदा
योगी सरकार का यह ‘मास्टरस्ट्रोक’ सिर्फ कुछ बड़े वकीलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा बेहद व्यापक है. इस 50% फीस वृद्धि का सीधा लाभ इन्हें मिलेगा:-
- जनपद (जिला) न्यायालयों के जिला व सहायक शासकीय अधिवक्ता
- उच्च न्यायालय (इलाहाबाद और लखनऊ खंडपीठ) में सरकार का पक्ष रखने वाले स्थायी व शासकीय अधिवक्ता
- उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) में पैरवी करने वाले महाधिवक्ता, अपर महाधिवक्ता, एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड और ब्रीफ होल्डर तक
14 साल का वनवास खत्म
आपको बता दें कि जनपद न्यायालयों के अधिवक्ताओं की फीस में लगभग 10 साल और महाधिवक्ता स्तर पर लगभग 14 साल बाद यह संशोधन किया गया है. यह प्रदेश सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है. अधिवक्ताओं का कहना है कि समयानुकूल पारिश्रमिक मिलने से अब वे पूरी ऊर्जा और मजबूती के साथ कोर्ट रूम में राज्य सरकार का पक्ष रख सकेंगे. यह फैसला न केवल राज्य के हितों की रक्षा करेगा, बल्कि यूपी में सुशासन की जड़ें और भी गहरी करेगा.










