कानपुर : लगातार नए नवाचार करने वाले आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों ने बूंदों को लेकर बेहद कारगर शोध किया है. विशेषज्ञों का ठोस दावा है कि अब दवाओं को सीधे शरीर के जरूरत वाले हिस्से में बिना किसी नुकसान के पहुंचाया जा सकेगा. साथ ही प्रिंटर की स्याही की बूंदों को सटीकता से नियंत्रित कर छपाई की गुणवत्ता भी बढ़ेगी.
दरअसल, आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों ने जो तकनीक विकसित की है, उसमें लेजर की मदद से पानी की बूंदों की चाल और दिशा को मनचाहे ढंग से नियंत्रित किया जा सकेगा. यह शोध भारतीय विज्ञान संस्थान और जर्मनी के यूनिवर्सिटी ऑफ ल्यूबेक के वैज्ञानिकों संग मिलकर किया गया है. इस शोध को प्रतिष्ठित जर्नल प्रोसीडिंग्स आफ द नेशनल एकेडमी आफ साइंसेज में प्रकाशित हुआ है.
जानिए कैसे काम करती है ये तकनीक : आईआईटी के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के डाॅ. डी. चैतन्य कुमार राव ने बताया कि यह तकनीक भविष्य में दवाओं को शरीर के सही हिस्से तक पहुंचाने, इंकजेट प्रिंटिंग, लेजर मशीनों और बाॅयोमेडिकल उपकरणों में काफी काम आ सकती है. यह उपलब्धि द्रव्य यांत्रिकी और लेजर तकनीक के क्षेत्र में अहम कदम है. इससे भविष्य की नई तकनीकों का रास्ता खुलेगा. शोध पत्र के मुख्य लेखकों में अवनीश प्रताप सिंह, डाॅ. डी. चैतन्य, माइक राहल्वेस, अल्फ्रेड वोगेल और सप्तर्षि बसु शामिल हैं.
लेजर किरणें फेंककर तरल बूंदों का नियंत्रण : डाॅ. डी. चैतन्य ने बताया कि तकनीक की मदद से वैज्ञानिक लेजर की किरणें फेंककर तरल बूंदों को आगे, पीछे या किसी भी दिशा में घुमा सकते हैं. बूंदों को तोड़ने या उनका आकार बदलने जैसी क्रियाओं को भी नियंत्रित किया जा सकेगा. यह तकनीक लेजर या किसी भी पदार्थ के बीच होने वाली जटिल रासायनिक क्रियाओं को समझने में मील का पत्थर साबित होगी.










