नई दिल्ली। शेयर बाजार में पैसा लगाना आसान है, लेकिन लगातार मुनाफा कमाना आसान नहीं है. ज्यादातर निवेशक यहीं गलती करते हैं. बिना रिसर्च के सिर्फ टिप्स या ट्रेंड देखकर निवेश कर देते हैं. यही आदत बाद में नुकसान की वजह बनती है. अगर आप वाकई मजबूत और लंबे समय तक चलने वाले स्टॉक्स चुनना चाहते हैं, तो आपको कंपनियों के तिमाही नतीजों को समझना जरूरी है.
तिमाही नतीजे किसी भी कंपनी की असली सेहत बताते हैं. यह दिखाते हैं कि कंपनी का बिजनेस बढ़ रहा है या सिर्फ दिखावे में अच्छा लग रहा है. सही तरीके से पढ़े गए नतीजे आपको बाकी निवेशकों से एक कदम आगे रख सकते हैं. इसी आधार पर आप अच्छे और कमजोर स्टॉक्स में फर्क कर सकते हैं.
सबसे पहले कंपनी की रेवेन्यू और नेट प्रॉफिट को देखें. रेवेन्यू यानी कुल बिक्री. यह बताता है कि कंपनी का बिजनेस कितना बढ़ रहा है. आपको इसे साल दर साल और पिछली तिमाही से तुलना करके देखना चाहिए. इसके बाद नेट प्रॉफिट देखें. कई बार रेवेन्यू बढ़ता है, लेकिन मुनाफा घट जाता है. इसका मतलब होता है कि लागत बढ़ गई है. यह एक चेतावनी संकेत हो सकता है. इसलिए सिर्फ बिक्री बढ़ना काफी नहीं है.
कई बार कंपनियां अचानक बड़ा मुनाफा दिखाती हैं. लेकिन यह जरूरी नहीं कि वह उनके मुख्य बिजनेस से आया हो. हो सकता है कंपनी ने कोई एसेट बेचा हो या उसे एक बार का फायदा मिला हो. अगर मुनाफा ऑपरेटिंग इनकम से नहीं आया है, तो वह टिकाऊ नहीं माना जाता. ऐसे नतीजों पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए.
बैंकिंग स्टॉक्स में NPA और गाइडेंस अहम
अगर आप बैंक या NBFC में निवेश कर रहे हैं, तो NPA पर नजर रखना जरूरी है. कम होता NPA अच्छी बात है. बढ़ता NPA खतरे का संकेत देता है. इसके साथ ही मैनेजमेंट क्या कह रहा है, यह भी उतना ही अहम है. कंपनी भविष्य को लेकर क्या उम्मीद जता रही है. ऑर्डर, ग्रोथ और जोखिम पर क्या बोल रही है. यही बातें स्टॉक की अगली चाल तय करती हैं.
वैल्यूएशन को नजरअंदाज न करें
नतीजे देखने के बाद EPS और P/E रेशियो जरूर देखें. EPS बढ़ रहा है तो कंपनी की कमाई बढ़ रही है. अगर इसके बावजूद शेयर नहीं बढ़ा है, तो वह अंडरवैल्यूड हो सकता है. साथ ही यह भी देखें कि बाजार की क्या उम्मीद थी. कई बार अच्छे नतीजे आने के बाद भी शेयर गिर जाता है, क्योंकि उम्मीद उससे ज्यादा थी.











