नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम 2026 के प्रतिभागियों से बातचीत की। इस दौरान ‘माई भारत’ के स्वयंसेवकों ने कार्यक्रम से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
‘माई भारत’ के स्वयंसेवक ने क्या अनुभव साझा किया?
एक ‘माई भारत’ स्वयंसेवक ने कहा कि इस कार्यक्रम ने उन्हें देश के सीमावर्ती गांवों का दौरा करने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसे गांवों को देखने का मौका मिला, जहां जाने की उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। एक अन्य ‘माई भारत’ स्वयंसेवक ने कहा कि जब उन्होंने आयुष्मान आरोग्य मंदिर में स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ली, तब उन्हें महसूस हुआ कि विकसित भारत की रोशनी देश के दूरदराज के इलाकों तक पहुंच रही है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें स्कूलों में भी विकसित भारत की सोच दिखाई दी।
विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम क्या है?
माई भारत के माध्यम से संचालित विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन पर आधारित है, जिसमें भारत के सीमावर्ती गांवों को देश का पहला गांव मानकर उनके विकास पर विशेष जोर दिया गया है। विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम 2026 का आयोजन 4 जून से 30 जून तक दो चरणों में किया गया।
इसके तहत लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के 74 वाइब्रेंट गांवों को शामिल किया गया। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, देशभर में आयोजित ऑनलाइन क्विज प्रतियोगिता में तीन लाख से अधिक युवाओं ने भाग लिया। इनमें से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले 400 से अधिक युवाओं का चयन किया गया।
इस पहल का उद्देश्य क्या है?
कार्यक्रम के जरिए युवाओं को सीमावर्ती क्षेत्रों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों, सांस्कृतिक विरासत और विकास संबंधी आकांक्षाओं को करीब से समझने का अवसर मिला। साथ ही समुदाय की भागीदारी, राष्ट्रीय एकता और सीमावर्ती गांवों के रणनीतिक महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया।












