नई दिल्ली। यूपी में योगी सरकार की हैट्रिक के लिए अभी से भाजपा ने तैयारी और रणनीति बनानी शुरू कर दी है। पंचायत चुनाव भले टल गए हों, मगर भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव प्रधानी की तर्ज पर लड़ेगी। इसके जिले से लेकर मंडल, शक्ति केंद्र और बूथ तक का माइक्रो मैनेजमेंट प्लान तैयार किया गया है। एक-एक वोट पर फोकस है। इस रणनीति को अमलीजामा पहनाने की कवायद भी प्रदेश संगठन ने शुरू कर दी है। अपने हर वोटर को पोलिंग बूथ तक पहुंचाने की जिम्मेदारी अभी से तय की जा रही है।
भाजपा ने अब सरकार के साथ ही संगठन स्तर पर भी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूरे प्रदेश को मथने में जुटे हैं। दूसरी ओर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह भी अलग-अलग क्षेत्रों में प्रवास के जरिए कार्यकर्ताओं को चुनावी मोड में लाने को जुट गए हैं। चुनाव भले ही विधानसभा के हों लेकिन पार्टी उसे प्रधानी वाले अंदाज में लड़ने पर फोकस कर रही है। जिस तरह प्रधानी के चुनाव में गांव में एक-एक वोटर को केंद्र में रखा जाता है, वही प्रयोग भाजपा विधानसभा चुनाव में करेगी।
प्रदेश महामंत्री का बूथ केंद्रित व्यूह रचना पर फोकस
प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह के हालिया बुंदेलखंड दौरे सहित अन्य जिलों के प्रवास पर इसी बूथ केंद्रित व्यूह रचना पर फोकस किया गया है। प्रदेश में रिकार्ड दो करोड़ 52 लाख लोगों ने भाजपा की सदस्यता ली थी। यह सदस्यता अभियान लोकसभा चुनाव के बाद तब चला था, जब नतीजे भाजपा के बहुत पक्ष में नहीं थे।
पार्टी का मानना है कि उसके पास ढाई करोड़ से अधिक सदस्यों की वो फौज है, जिन्हें यदि परिवार सहित बूथ तक पहुंचाने में सफलता मिली तो नतीजे हर हाल में अनुकूल होंगे। इसके अलावा हर बूथ पर पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को भी सूचीबद्ध करने को कहा गया है। पार्टी ने फिलहाल इसी सूची पर पूरा फोकस करने की रणनीति बनाई है।
विधानसभाओं में सम्मेलन
भाजपा 22 जुलाई को विधानसभा क्षेत्रों में बूथ सम्मेलन आयोजित करेगी। इसे पार्टी के अभियान के श्रीगणेश के रूप में देखा जा रहा है। इसका संयोजक प्रदेश महामंत्री दिलीप पटेल और सह संयोजक प्रदेश मंत्री शिव भूषण सिंह,राहुल वाल्मीकि को बनाया है।
हर बूथ पर 11 सदस्यीय महिला समिति बनाएं
उधर, वाराणसी में भाजपा महिला मोर्चा की नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष सरोज कुशवाहा ने कार्यकर्ताओं से हर बूथ तक महिला कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने और सरकार की योजनाओं को घर-घर पहुंचाने का आह्वान किया है। उन्होंने क्षेत्र कार्यसमिति की बैठक में पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ आगामी कार्यक्रमों और संगठन विस्तार पर चर्चा की। सरोज ने कहा कि विपक्ष के पास जमीनी महिला कार्यकर्ता ही नहीं हैं। उन्हें डर है कि अगर 33 फीसदी आरक्षण पूरी तरह लागू हो गया, तो वे उम्मीदवार कहां से लाएंगे? वे सिर्फ अपने परिवार की महिलाओं को राजनीति में लाते हैं।












