नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) अपनी बिजली की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सौर ऊर्जा को बढ़ावा दे रहा है। न सिर्फ डीएमआरसी के परिसरों में रोशनी व अन्य आवश्यकताओं के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग किया जा रहा है, बल्कि मेट्रो ट्रेनों का परिचालन भी इससे किया जा रहा है।
दूसरे राज्यों के सौर ऊर्जा संयंत्रों से बिजली लेने के साथ ही, दिल्ली के मेट्रो स्टेशनों और डीएमआरसी के अन्य परिसरों में रूफटाप सोलर पैनल लगाकर सौर ऊर्जा का उत्पादन किया जा रहा है। इसी कड़ी में चौथे चरण के 59 एलिवेटेड मेट्रो स्टेशनों की छतों पर सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं।
बिजली के मामले में आत्मनिर्भर होगी दिल्ली मेट्रो
इस समय 107 मेट्रो स्टेशनों और डिपो परिसरों में सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं, जिनसे लगभग 53 मेगावाट बिजली की क्षमता मिलती है। 59 अन्य स्टेशनों पर सोलर पैनल लगने के बाद यह क्षमता बढ़कर लगभग 60 मेगावाट तक पहुंच जाएगी।
इनमें से कई स्टेशनों पर काम चल रहा है। अन्य प्रस्तावित मेट्रो कारिडोरों पर भी सोलर पैनल लगाने की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है। इसके लिए अधिकांश स्थानों का उपयोग किया जाएगा, जिससे मेट्रो परिचालन सहित बिजली की अन्य आवश्यकताओं के लिए सौर ऊर्जा प्राप्त हो सके।
दिल्ली मेट्रो को कितनी बिजली की जरूरत?
दिल्ली मेट्रो को सालाना लगभग 123.5 करोड़ यूनिट बिजली की आवश्यकता होती है। वर्ष 2025-26 में मेट्रो स्टेशनों पर लगे सोलर पैनलों से लगभग 3.9 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ।
वहीं, डीएमआरसी द्वारा मध्य प्रदेश के रीवा स्थित सौर ऊर्जा संयंत्र से 35.9 करोड़ यूनिट बिजली खरीदी गई। इस तरह कुल बिजली आवश्यकता की लगभग 39.8 करोड़ यूनिट (32 प्रतिशत) सौर ऊर्जा से प्राप्त हुई है। आने वाले समय में इसे और बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।












