नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने दावा किया है कि दुनिया के पांच महाद्वीपों से लोग संघ के कामकाज को समझने के लिए भारत आ रहे हैं। उनका कहना है कि कई विदेशी प्रतिनिधि चाहते हैं कि RSS के स्वयंसेवक उनके देशों में जाकर समाज के लिए समर्पित कार्यकर्ताओं को तैयार करने का ट्रेनिंग दें। नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में भागवत ने संघ के विस्तार, स्वयंसेवकों की भूमिका और संगठन की कार्यप्रणाली पर भी विस्तार से अपनी बात रखी।
विदेशों से लोग संघ का काम देखने आते हैं-भागवत
नागपुर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि समय-समय पर विदेशों से लोग संघ का कार्य देखने आते हैं। वे यह जानना चाहते हैं कि RSS किस प्रकार समाज के लिए समर्पित स्वयंसेवक तैयार करता है। उन्होंने दावा किया कि कई लोग चाहते हैं कि संघ के स्वयंसेवक उनके देशों में जाकर भी इसी तरह के कार्यकर्ताओं को तैयार करने में सहयोग करें।
भारत को पहले खुद मजबूत और समृद्ध बनना होगा-मोहन भागवत
भागवत ने कहा कि दुनिया का विश्वास है कि भारत उसे सही दिशा दिखा सकता है। हालांकि, इसके लिए जरूरी है कि भारत पहले स्वयं उस मार्ग पर चले और एक मजबूत तथा समृद्ध राष्ट्र बने। उन्होंने कहा कि इसी सोच के साथ RSS अपने शताब्दी वर्ष में संगठन के कार्य का विस्तार करने पर विशेष जोर दे रहा है।
‘RSS का कार्यकर्ता होना जीवनभर की साधना’
कार्यक्रम के दौरान संघ के प्रचारकों के जीवन पर आधारित एक ऑडियो-वीडियो सीरीज भी जारी की गई। इस मौके पर मोहन भागवत ने कहा कि RSS का कार्यकर्ता होना केवल एक भूमिका नहीं, बल्कि जीवनभर की साधना है, जिसकी पूर्णता की कोई सीमा नहीं होती। उन्होंने कहा कि प्रचारकों के जीवन के बारे में पढ़ने से बहुत कुछ समझा जा सकता है, लेकिन उनके जीवन को वास्तव में समझने के लिए उन्हें करीब से देखना जरूरी है। भागवत ने कहा कि स्वयंसेवकों की सक्रियता महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण संघ के जीवन मूल्यों को व्यवहार में उतारना है।
‘RSS रिमोट कंट्रोल नहीं करता’
मोहन भागवत ने संघ को लेकर प्रचलित धारणाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अक्सर यह प्रचार किया जाता है कि RSS कई संगठनों और गतिविधियों को रिमोट कंट्रोल से संचालित करता है, जबकि ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि संघ का मूल कार्य ऐसे व्यक्तियों का निर्माण करना है जो समाज के लिए काम कर सकें। जहां स्वयंसेवक होते हैं, वहां संघ के संस्कार और कार्य दिखाई देते हैं। उनके अनुसार, स्वयंसेवक का परिवार भी संघ के जीवन मूल्यों का उदाहरण होता है।












