अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) प्रदेश में वायु प्रदूषण जांच का हब बनने जा रही है। यूनिवर्सिटी को क्लीन एयर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट की स्वीकृति मिल गई है। यहां अलीगढ़ ही नहीं प्रदेश के सभी जिलों के वायु प्रदूषण सेंपल की जांच होगी।
एएमयू और उत्तर प्रदेश क्लीन एयर प्रोजेक्ट अथॉरिटी (यूपीसीएएमपी) के बीच करार हुआ है। एएमयू में एडवांस रिसर्च लैब समेत चार प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ प्रदूषण प्रदेश के नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालयों से एकत्रित नमूनों का विश्लेषण करेंगे।
विभिन्न उद्योगों की चिमनियों से निकलने वाले उत्सर्जन की एयर क्वालिटी की भी जांच होगी। आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा। एएमयू सहित प्रदेश के 15 शिक्षण संस्थानों में रीजनल नालेज सेंटर (आरकेसी) भी खोले जाएंगे। सभी केंद्रों पर सर्टिफिकेट कोर्स भी संचालित किए जाएंगे। पांच जून को मुख्यमंत्री की मौजूदगी में यूपी सरकार के अधिकारी और एएमयू की टीम एमओयू की प्रतियों का आदान-प्रदान करेंगे।
प्रोजेक्ट को स्वीकृति, मुख्यमंत्री की मौजूदगी में एमओयू की प्रतियों का होगा आदान-प्रदान
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का रीजनल नालेज सेंटर एक क्षेत्रीय तकनीकी एवं कार्यान्वयन इकाई के रूप में कार्य करेगा। विश्व बैंक और प्रदेश सरकार इस प्रोजेक्ट पर करीब 13 करोड़ रुपये खर्च करेगी। छह साल चलने वाले प्रोजेक्ट के तहत कई आयोजन होंगे। तकनीकी स्टाफ को प्रशिक्षित किया जाएगा। कार्यशालाओं के जरिए पर्यावरण के लिए काम करने वाले पेशेवरों की क्षमता को भी बढ़ाएंगे।
उत्तर प्रदेश क्लीन एयर प्रोजेक्ट अथॉरिटी और एमएयू के बीच हुआ करार
वायु प्रदूषण गतिविधियों को कम करने के लिए जागरूकता बढ़ाने, सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने व नागरिकों के बीच जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देने की दिशा में काम करेगा। वायु महत्वपूर्ण प्रदूषण से मानव जीवन पर होने वाले प्रभाव का सभी केंद्र अध्ययन करेंगे।
एएमयू को अधिक जिम्मेदारी
प्रोजेक्ट में एएमयू और मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, इलाहाबाद (एमएनआईटी) को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन संस्थानों में रीजनल नॉलेज सेंटर तो होंगे ही प्रदेश की सभी आरकेसी पर निगरानी भी करेंगे। प्रदेश के औद्योगिक संस्थाओं से निकलने वाले धुएं से होने वाले वायु प्रदूषण का अध्ययन करने के लिए दोनों संस्थानों में अत्याधुनिक लैब स्थापित की जाएंगी। जहां सभी आरकेसी के सेंपल जांच के लिए भेजे जाएंगे।
एएमयू के अलावा मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी और डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा में ‘मिनी सुपरसाइट्स’ (वायु गुणवत्ता प्रबंधन और प्रदूषण की निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले एडवांस्ड एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन) की सुविधाएं होंगी।
इन संस्थाओं में खुलेंगे रीजनल नॉलेज सेंटर
एएमयू के अलावा डॉ. बीआर आंबेडकर यूनिवर्सिटी (आगरा), महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड यूनिवर्सिटी (बरेली), राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज बिजनौर, सेंटर फॉर द डेवलपमेंट ऑफ ग्लास इंडस्ट्री (फिरोजाबाद), मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (दिल्ली), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (रुड़की), बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी (झांसी), हरकोर्ट बटलर तकनीकी विश्वविद्यालय (कानपुर), उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण विभाग (लखनऊ), राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, आंबेडकर नगर, चौ. चरण सिंह यूनिवर्सिटी (मेरठ) और मोतीलाल नेहरू नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, प्रयागराज और बीएचयू में रीजनल नॉलेज सेंटर खुलेंगे।










