news
Saturday, June 20, 2026
  • Home
    • Home
    • Special Story
  • Politics
  • Bureaucracy
  • National
    • Delhi
    • Uttar Pradesh
    • Bihar
    • Punjab
  • Buzz
  • Opinion
  • Economy
  • Diplomacy
  • International
  • Curated
news
  • Home
    • Home
    • Special Story
  • Politics
  • Bureaucracy
  • National
    • Delhi
    • Uttar Pradesh
    • Bihar
    • Punjab
  • Buzz
  • Opinion
  • Economy
  • Diplomacy
  • International
  • Curated
No Result
View All Result
news
Home Politics

यूपी : मनाही के बावजूद सड़क पर नमाज क्यों पढ़ते मुसलमान, दूसरे धर्मों के लिए कानून और राजनीतिक फायदे क्या?

by National Agenda
May 19, 2026
in Politics, Uttar Pradesh
0
cm yogi
0
SHARES
Share on WhatsappShare on FacebookShare on X

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर सड़कों पर नमाज पढ़ने को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि प्रदेश की सड़कों पर अब नमाज बिल्कुल नहीं पढ़ने दी जाएगी. योगी का ये ताजा बयान बकरीद त्योहार से ठीक पहले आया है, जिसके बाद पूरे प्रदेश में ये मुद्दा एक बार फिर गर्मा गया है. आखिर इस मामले में कानून क्या कहता है, दूसरे धर्मों के लिए क्या नियम हैं और मुसलमान सड़कों पर नमाज पढ़ने के लिए क्यों मजबूर हैं?

नमाज का कानून: सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट क्या कहता है?

भारत में सड़कों पर धार्मिक गतिविधियों को लेकर कानून पूरी तरह स्पष्ट है. सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने 28 अप्रैल 2026 को एक अहम फैसले में साफ कहा कि धार्मिक गतिविधियों के नाम पर सड़कों को बाधित नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने ये भी साफ कहा कि अगर किसी धर्मनिरपेक्ष गतिविधि पर असर पड़ रहा है तो सरकार अपने अधिकारों से दखल दे सकती है. इसके पहले भी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि बिना अनुमति के सड़कों या सार्वजनिक जगहों पर नमाज पढ़ना सही नहीं है, क्योंकि इससे लोगों को परेशानी हो सकती है और व्यवस्था बिगड़ सकती है.

संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है, लेकिन ये अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन है. सड़कों पर धार्मिक आयोजनों के बारे में संविधान में स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं है, लेकिन लोक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य सेवाओं के आधार पर सरकार इन आयोजनों पर प्रतिबंध लगा सकती है.

प्रशासन की सख्ती और अब तक हुई कार्रवाई

यूपी में योगी सरकार ने सड़कों पर धार्मिक आयोजनों को लेकर काफी सख्ती बरती है. मेरठ में पुलिस ने तो यहां तक कह दिया था कि अगर कोई सड़क पर नमाज पढ़ता पाया गया तो उसका पासपोर्ट और लाइसेंस रद्द किया जा सकता है. मेरठ एसपी सिटी ने बताया कि पिछली बार सड़क पर नमाज पढ़ने पर 200 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था.

हाल ही में रामपुर जिले का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें एक व्यक्ति सड़क के बीच नमाज पढ़ते हुए दिख रहा था, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की. इसके अलावा यूपी सरकार ने ईद के मौके पर भी सभी जिलों की पुलिस को आदेश जारी किया था कि सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ी जाएगी और इस तरह के आयोजन निर्धारित स्थलों पर ही होंगे.

बार-बार मनाही के बावजूद सड़कों पर नमाज पढ़ने को मजबूर क्यों मुसलमान?

ये इस पूरे विवाद का सबसे अहम और संवेदनशील सवाल है. मुस्लिम धर्मगुरुओं का कहना है कि मुसलमानों को सड़कों पर नमाज पढ़ने का शौक नहीं होता, बल्कि इसके पीछे कई व्यावहारिक मजबूरियां होती हैं:

मस्जिदों में जगह की कमी: खासकर ईद, बकरीद और जुमे जैसे खास मौकों पर नमाजियों की भारी भीड़ उमड़ती है, जिसे मस्जिदों में समेट पाना मुश्किल होता है. AIMIM नेता वारिस पठान ने भी यही सवाल उठाया, ‘एक तो मस्जिद में जगह नहीं होती है, उसके कारण अगर कोई रास्ते में 5 मिनट नमाज पढ़ लेता है तो क्या हो जाता है?’

मुस्लिम बहुल इलाकों में पर्याप्त मस्जिदें नहीं: जबकि इस्लामिक देशों में स्थिति बिल्कुल अलग है. वहां हर सरकारी संस्था, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, स्कूल-कॉलेज और बड़े मॉल तक में मस्जिदें होती हैं. आबादी के अनुपात में इतनी मस्जिदें होती हैं कि कोई भी मस्जिद इतनी भीड़ नहीं जुटा पाती कि नमाजियों को बाहर गलियों तक सफें खड़ी करनी पड़ें. तभी तो पाकिस्तान और सऊदी अरब जैसे देशों में सड़क पर नमाज पढ़ना गैरकानूनी है और वहां ऐसा करने पर भारी जुर्माना लगाया जाता है.

हालांकि, दिलचस्प बात ये है कि कई मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी सड़क पर नमाज पढ़ने को गलत ठहराया है. ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि नमाज के लिए इस्लाम में मस्जिद का ही प्रावधान है. इस्लामिक धर्मगुरु मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि वो इस बात से सहमत हैं कि नमाज सड़कों पर नहीं पढ़नी चाहिए और सभी लोग मस्जिदों में जरूरत पड़ने पर अलग-अलग शिफ्टों में नमाज अदा करें. हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि मुख्यमंत्री को इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था और उनके बयान में संयम और संतुलन होना चाहिए था.

दूसरे धर्मों के लिए क्या हैं नियम?

ये समझना बेहद जरूरी है कि ये नियम सिर्फ मुसलमानों या नमाज के लिए नहीं हैं. यूपी सरकार ने पहले भी कहा है कि ये नियम सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होता है. सरकार ने ईद उल-फितर, अक्षय तृतीया और परशुराम जयंती जैसे त्योहारों को देखते हुए आदेश जारी किया था कि आगामी त्योहारों के दौरान सड़कों पर किसी भी तरह के धार्मिक आयोजन की इजाजत नहीं दी जाएगी. इस आदेश में साफ कहा गया था कि फील्ड के सभी अधिकारी ये सुनिश्चित करें कि धार्मिक कार्यक्रम घरों में या उनकी तय जगहों पर ही आयोजित किए जाएं. किसी भी व्यक्ति को सड़कों को ब्लॉक करने की अनुमति न दी जाए.

28 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा, ‘मान लीजिए कोई मंदिर है और वो अपना वार्षिक रथ उत्सव मनाना चाहता है, तो आप मंदिर के आसपास की सारी सड़कें ब्लॉक नहीं कर सकते. इसका धर्म से कोई लेना-देना नहीं है. आप अपनी धार्मिक गतिविधि कीजिए, लेकिन सड़कें ब्लॉक करके नहीं.’

हालांकि, जमीनी हकीकत ये है कि इन नियमों का पालन कराने में प्रशासन की मंशा और क्षमता दोनों पर सवाल उठते हैं. कानपुर रामनवमी हंगामा, आगरा हनुमान शोभायात्रा में हाथी का इस्तेमाल और जुलूसों के दौरान सड़कों पर तलवारबाजी के वायरल वीडियो, ये सब इस बात के जीते-जागते सबूत हैं कि नियमों का उल्लंघन सभी तरफ से होता है.

सड़कों पर नमाज न पढ़ने देने के पीछे सियासी फायदे क्या हैं?

यूपी में विशेष समुदाय को टारगेट करना एक कड़वी सच्चाई है. धार्मिक ध्रुवीकरण कई बार सत्ताधारी दल के लिए चुनावी फायदे का सौदा बन जाता है. सितंबर 2025 में कानपुर में बाराह वफात के जुलूस के दौरान ‘आई लव मोहम्मद’ के बैनर को लेकर जबरदस्त विवाद हुआ था.

अंग्रेजी अखबार बॉम्बे समाचार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे विवाद को ‘हिंदुत्व बनाम धार्मिक अतिवाद’ की बहस में बदल दिया और इसे समाजवादी पार्टी के खिलाफ एक बड़े राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया. जब धार्मिक विवाद से सियासी फायदा मिल रहा हो, तो प्रशासन पर भी ये दबाव होता है कि वो एक तरफ सख्ती दिखाए और दूसरी तरफ नरमी बरते. ठीक वैसे ही जैसे चुनावी फायदे का गणित तय करे.

पॉलिटिकल एक्सपर्ट रशीद किदवई 3 बड़ी वजहें बताते हैं:

राजनीतिक दबाव और ध्रुवीकरण का डर: यूपी जैसे राज्य में जहां धार्मिक पहचान की राजनीति गहरी जड़ें जमा चुकी है. अगर पुलिस हिंदू संगठनों के किसी बड़े जुलूस पर सख्त कार्रवाई करती है, तो सरकार पर राजनीतिक दबाव बनता है. यही हाल जैन, सिख, ईसाई या अन्य धर्मों पर भी लागू है. कानपुर रामनवमी मामले में पुलिस ने सिर्फ गैरकानूनी लाउडस्पीकर जब्त किए थे, लेकिन प्रतिक्रिया इतनी तीखी हुई कि सड़कें जाम कर दी गईं और पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई. ऐसे माहौल में प्रशासन कई बार सख्त कार्रवाई करने से कतराता है क्योंकि उसे डर होता है कि कहीं मामला और न बिगड़ जाए और सांप्रदायिक तनाव न भड़क उठे.

‘पारंपरिक जुलूस’ का बचाव कवच: योगी सरकार के अपने ही आदेश में एक बड़ी कमी है. आदेश कहता है कि अनुमति केवल उन्हीं धार्मिक जुलूसों को दी जाए जो पारंपरिक हों. अब ‘पारंपरिक’ की परिभाषा इतनी ढीली है कि हर कोई अपने जुलूस को पारंपरिक बताकर अनुमति ले सकता है और फिर उसी अनुमति की आड़ में नियमों का उल्लंघन भी कर सकता है. जब रामनवमी, हनुमान जन्मोत्सव, जगन्नाथ रथ यात्रा या अन्य धर्मों के बड़े त्योहारों पर जुलूस निकलते हैं, तो प्रशासन उन्हें ‘सदियों पुरानी परंपरा’ मानकर सख्त कार्रवाई से बचता है.

चुनिंदा सख्ती और दोहरे मापदंड का आरोप: यही सबसे बड़ा कारण है कि प्रशासन पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगता है. जहां सड़क पर नमाज पढ़ने पर तुरंत FIR, गिरफ्तारी और यहां तक कि पासपोर्ट-लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई की धमकी दी जाती है, वहीं हिंदू संगठनों के जुलूसों में सड़क जाम करने, तेज आवाज में डीजे बजाने और हथियार लहराने जैसे उल्लंघनों पर प्रशासन की चुप्पी सवाल खड़े करती है. कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दल बार-बार ये आरोप लगाते रहे हैं कि योगी सरकार के निशाने पर सिर्फ एक खास समुदाय है.

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने CM योगी के बयान पर कहा कि सड़कों पर क्या होना चाहिए और क्या नहीं, इसके लिए नियम-कानून बने हुए हैं. इस मुद्दे पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश नहीं होनी चाहिए.

  • Trending
  • Comments
  • Latest
cm yogi

मेक इन इंडिया को मिलेगी रफ़्तार, लखनऊ में लगेगी देश की अत्याधुनिक गोला-बारूद फैक्टरी

May 6, 2026
cm yogi

आईजीआरएस बना जनता की आवाज, योगी सरकार में शिकायतों का तेज निस्तारण

May 19, 2026
cm yogi

यूपी को अब स्वाद के मामले में मिलेगी नई पहचान, जानिए क्या है ODOC योजना

May 7, 2026
बीमारू राज्य से औद्योगिक क्रांति तक: CM योगी ने कैसे बदली UP की तस्वीर

‘जिम जिहाद’ केस में CM योगी के निर्देश पर बड़ा एक्शन, आरोपियों पर लगा गैंगस्टर एक्ट

May 19, 2026
cm yogi

मेक इन इंडिया को मिलेगी रफ़्तार, लखनऊ में लगेगी देश की अत्याधुनिक गोला-बारूद फैक्टरी

up rera

यूपी रेरा का बड़ा फैसला, अब सिर्फ ₹1000 में होगा फ्लैट ट्रांसफर

cm yogi

1.43 लाख शिक्षामित्रों ट्रिपल तोहफा: सैलरी और कैशलेस इलाज की सुविधा के साथ मिलेगा जीवन बीमा कवर

दिल्ली सरकार

दिल्ली सरकार ने लॉन्च किया ‘हीट एक्शन प्लान’, 13 जिलों में तैनात स्पेशल वैन

बीमारू राज्य से औद्योगिक क्रांति तक: CM योगी ने कैसे बदली UP की तस्वीर

विकसित भारत रोजगार योजना में 70 लाख लोगों को मिली नौकरियां, डीबीटी से पैसे होंगे ट्रांसफर

June 19, 2026
money

भारतीय रुपए ने दिखाया दम, आगे भी डॉलर को देगा पछाड़

June 19, 2026
smart transportation services

UP : RTO के चक्कर हुए कम! स्मार्ट परिवहन सेवाओं से कैसे बदला सिस्टम?

June 19, 2026
pm modi

रोजगार मेला नए भारत की पहचान, PM मोदी ने गिनाईं PM-VBRY की उपलब्धियां

June 19, 2026

Recent News

बीमारू राज्य से औद्योगिक क्रांति तक: CM योगी ने कैसे बदली UP की तस्वीर

विकसित भारत रोजगार योजना में 70 लाख लोगों को मिली नौकरियां, डीबीटी से पैसे होंगे ट्रांसफर

June 19, 2026
money

भारतीय रुपए ने दिखाया दम, आगे भी डॉलर को देगा पछाड़

June 19, 2026

Categories

  • Bihar
  • Bureaucracy
  • Buzz
  • Delhi
  • Diplomacy
  • Economy
  • International
  • National
  • Opinion
  • Politics
  • Punjab
  • Special Story
  • Uncategory
  • Uttar Pradesh

Site Navigation

  • About Us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer Policy
  • Terms and Conditions
  • Advertisement
  • Contact Us
news

nationalAgenda is an independent website covering news, politics, sports, culture and everything in between. Get the latest news, reportage, analysis & exclusive information.

Contact Us :- info@nationalagenda.in

© 2025 nationalAgenda - Check out the latest news from India and around the world Era.

No Result
View All Result
  • Home
  • Politics
  • Bureaucracy
  • National
    • Delhi
    • Uttar Pradesh
    • Bihar
    • Punjab
  • Buzz
  • Opinion
  • Economy
  • Diplomacy
  • International
  • Curated

© 2025 nationalAgenda - Check out the latest news from India and around the world Era.