बरेली: प्रदेश सरकार की नजर प्राचीन नाथ परंपरा से जुड़े बरेली के धार्मिक स्थलों पर है. मुख्यमंत्री योगी के निर्देशन में बरेली में नाथ कॉरिडोर परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है. करीब 60 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से तैयार हो रही इस योजना का उद्देश्य धार्मिक स्थलों का सौंदर्यीकरण कर श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है.
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार विकास और विरासत की सोच के साथ नाथ परंपरा से जुड़े प्राचीन शिव मंदिरों को एक नई पहचान देने का काम कर रही है. धार्मिक महत्व को बनाए रखते हुए इन स्थलों को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिल सके.
बरेली में आकार ले रहा नाथ कॉरिडोर
नाथ कॉरिडोर के तहत बरेली के कई ऐतिहासिक और आस्था केंद्रों का विकास कराया जा रहा है. इनमें सदर कैंट स्थित प्राचीन धोपेश्वर नाथ मंदिर, जोगी नवादा का वनखंडी नाथ मंदिर, त्रिवटीनाथ मंदिर और तपेश्वर नाथ मंदिर प्रमुख हैं. इसके अलावा करीब 930 वर्ष पुराने अलखनाथ मंदिर का भी व्यापक विकास किया जा रहा है, जहां वैदिक लाइब्रेरी, मुख्य द्वार और अन्य सुविधाएं विकसित होंगी.
पीलीभीत बाइपास स्थित पशुपतिनाथ मंदिर, तुलसी मठ और मढ़ीनाथ मंदिर को भी परियोजना में शामिल किया गया है. परियोजना के तहत यात्री विश्राम गृह, सत्संग शेड, परिक्रमा मार्ग, एलईडी लाइटिंग, प्रसाद केंद्र, टॉयलेट ब्लॉक और सौंदर्यीकरण जैसे कार्य कराए जा रहे हैं. सावन के दौरान आने वाले कांवड़ यात्रियों के लिए भी विशेष व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं, ताकि यात्रा अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बन सके.
सरकार का मानना है कि नाथ कॉरिडोर के विकसित होने से बरेली धार्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में उभरेगा. साथ ही नाथ परंपरा, शिव आस्था और सनातन संस्कृति से जुड़ी विरासत को नई पहचान मिलेगी.










