लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कारोबार करने वाले करीब पांच लाख व्यापारियों को बड़ी राहत मिलने वाली है. प्रदेश सरकार की उत्तर प्रदेश ब्याज माफी योजना-2026 के तहत करीब 10,000 करोड़ रुपये के ब्याज और जुर्माने से राहत मिलेगी. इस योजना को कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है. इससे पुराने कर विवादों को खत्म करने और व्यापारियों को बकाया चुकाने का अवसर मिलेगा.
ऑनलाइन करना होगा आवेदन, तीन महीने तक चलेगी योजना
राज्य कर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल के मुताबिक, योजना का संचालन ऑनलाइन किया जाएगा. व्यापारी विभागीय पोर्टल पर आवेदन कर सकेंगे. यह योजना तीन महीने तक लागू रहेगी. इसमें 31 दिसंबर 2025 तक के बकाया मामलों को शामिल किया गया है. यानी जीएसटी लागू होने के बाद भी पुराने कानूनों के तहत निर्धारित देनदारियों पर राहत मिल सकेगी. योजना का लाभ लेने के लिए व्यापारियों को मूल कर की पूरी राशि सरकारी खजाने में जमा करनी होगी. इसके बाद ब्याज और जुर्माने में निर्धारित छूट मिलेगी.
10 लाख से 5 करोड़ रुपये तक के बकाये पर कितनी छूट?
योजना के तहत छूट की दर बकाये की राशि के आधार पर तय की गई है. 10 लाख रुपये तक के मामलों में ब्याज और जुर्माने पर 100 प्रतिशत छूट मिलेगी. वहीं, 10 लाख रुपये से एक करोड़ रुपये तक के बकाये पर ब्याज में 90 प्रतिशत और जुर्माने में 100 प्रतिशत की छूट दी जाएगी. एक करोड़ से पांच करोड़ रुपये तक के मामलों में ब्याज पर 75 प्रतिशत और जुर्माने पर पूरी छूट मिलेगी. पांच करोड़ रुपये से अधिक के बकाये वाले मामलों में ब्याज पर 50 प्रतिशत और जुर्माने पर 100 प्रतिशत की छूट का प्रावधान है.
इन आठ पुराने कानूनों के मामलों में मिलेगी राहत
ब्याज माफी योजना के तहत उत्तर प्रदेश बिक्री कर अधिनियम-1948, केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम-1956, उत्तर प्रदेश आमोद एवं पणकर अधिनियम-1979, उत्तर प्रदेश व्यापार कर अधिनियम-1995, उत्तर प्रदेश प्रवेश कर अधिनियम-2007, उत्तर प्रदेश वैट अधिनियम-2008, मनोरंजन कर नियमावली और उत्तर प्रदेश केबल टेलीविजन नेटवर्क नियमावली-1997 के तहत बने पुराने बकाये के मामलों को शामिल किया गया है. इन कानूनों से जुड़े कर विवादों में व्यापारियों को राहत मिलने की उम्मीद है.
कोरोना काल की योजना में 3.23 लाख व्यापारी हुए थे चिह्नित
इससे पहले कोरोना काल में वर्ष 2020-21 के दौरान भी इसी तरह की योजना लागू की गई थी. उस समय विभाग ने 3,23,439 व्यापारियों को चिह्नित किया था. इन व्यापारियों पर कुल 23,457.96 करोड़ रुपये का कर बकाया था. अब नई योजना के जरिए पुराने बकाये से जुड़े मामलों को निपटाने और व्यापारियों को ब्याज व जुर्माने के बोझ से राहत देने की कोशिश की जा रही है.












