लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत की हैट्रिक लगाने के लिए भाजपा गुजरात मॉडल अपना सकती है. पार्टी आंतरिक सर्वे में विधायकों के प्रदर्शन और जीतने की क्षमता को आधार बनाकर टिकट बांटने की तैयारी कर रही है. गुजरात में कई विधायकों के टिकट काटने की रणनीति से सबक लेते हुए यूपी में भी कमजोर रिपोर्ट वाले विधायकों के दोबारा चुनाव लड़ने पर संकट आ सकता है.
भाजपा विधायकों की रिपोर्ट से तय होगा टिकट
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति पर काम तेज कर दिया है. पार्टी गुजरात में अपनाए गए चुनावी फॉर्मूले से सबक लेकर यूपी में उम्मीदवारों का चयन कर सकती है. खबर के अनुसार, आंतरिक सर्वे में 124 विधायकों की रिपोर्ट संतोषजनक नहीं बताई गई है. इनमें करीब 40 प्रतिशत विधायक ऐसे हैं, जो कम से कम दो बार चुनाव जीत चुके हैं. खराब प्रदर्शन और कमजोर जनसमर्थन वाले विधायकों के टिकट कटने की संभावना जताई जा रही है.
गुजरात मॉडल से भाजपा को मिली सीख
भाजपा की चुनावी रणनीति में गुजरात का उदाहरण महत्वपूर्ण माना जा रहा है. वहां पार्टी ने पिछले चुनावों के अनुभवों से सीखकर उम्मीदवारों के चयन में बदलाव किए थे. रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 के गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कई मौजूदा विधायकों के टिकट काटे थे. इससे पार्टी को चुनावी मैदान में नए चेहरों को मौका देने का अवसर मिला. उत्तर प्रदेश में भी पार्टी इसी तरह उम्मीदवारों की लोकप्रियता, क्षेत्र में कामकाज और चुनाव जीतने की क्षमता को ध्यान में रखकर फैसला कर सकती है.
लोकसभा चुनाव के नतीजों ने बढ़ाई चिंता
पिछले लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के नतीजों ने भाजपा को अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर किया था. राज्य की 80 लोकसभा सीटों में पार्टी को अपेक्षा के मुताबिक सफलता नहीं मिली. खबर के अनुसार, भाजपा ने 49 मौजूदा सांसदों पर भरोसा किया था, लेकिन इनमें से उसे केवल 17 सीटों पर जीत मिली. इस अनुभव के बाद पार्टी विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों के चयन को लेकर ज्यादा सतर्क रह सकती है. कमजोर प्रदर्शन करने वाले नेताओं के बजाय नए चेहरों पर दांव लगाने की संभावना है.
आंतरिक सर्वे में 124 विधायकों की रिपोर्ट खराब
भाजपा के आंतरिक सर्वे में 124 विधायकों की रिपोर्ट संतोषजनक नहीं बताई गई है. खबर में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, इनमें 40 प्रतिशत से अधिक विधायक ऐसे हैं, जो कम से कम दो बार चुनाव जीत चुके हैं. पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती पुराने नेताओं के अनुभव और जनता के बीच उनकी मौजूदा लोकप्रियता के बीच संतुलन बनाना है. यदि किसी विधायक की क्षेत्र में पकड़ कमजोर पाई जाती है, तो उसका टिकट कट सकता है. हालांकि, अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व के आकलन और चुनावी परिस्थितियों पर निर्भर करेगा.
लंबे समय तक सत्ता में रहने के लिए टिकट चयन अहम
भाजपा का मानना है कि लंबे समय तक सत्ता में बने रहने के लिए उम्मीदवारों का सही चयन जरूरी है. गुजरात में 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी ने करीब 23 प्रतिशत विधायकों के टिकट काटे थे. इसके बाद पार्टी की सीटें 115 से घटकर 99 रह गई थीं. वहीं, 2022 के चुनाव में भाजपा ने 99 में से 45 विधायकों के टिकट काटे और 43 नए उम्मीदवारों को जीत मिली. पार्टी की सीटों की संख्या बढ़कर 156 हो गई. इन नतीजों से उम्मीदवार बदलने की रणनीति को मजबूती मिली.
यूपी में कई विधायकों की बढ़ सकती है मुश्किल
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा विधायकों के कामकाज और जनता के बीच उनकी छवि का आकलन कर सकती है. पार्टी के सामने सत्ता में वापसी के साथ अपना जनाधार मजबूत बनाए रखने की चुनौती भी है. ऐसे में केवल पुराने अनुभव के आधार पर टिकट मिलना तय नहीं माना जा सकता. जिन विधायकों की रिपोर्ट कमजोर होगी, उन्हें नेतृत्व की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि, अभी टिकट काटने को लेकर कोई अंतिम सूची सामने नहीं आई है. उम्मीदवारों का फैसला चुनाव से पहले पार्टी नेतृत्व करेगा.












